नई दिल्ली, धीरेंद्र कुमार। एक दिन मैं फिटनेस एप के साथ किसी के अनुभव के बारे में एक ब्लाग पोस्ट पढ़ रहा था। ब्लाग के लेखक ने यह एप इंस्टाल किया फिर एक लक्ष्य तय किया कि वह कितनी एक्सरसाइज एक दिन में करेगा। कुछ दिन के बाद उसने गौर किया कि अगर वह लक्ष्य के अनुरूप एक्सरसाइज रिकार्ड नहीं करता है तो एप उसे कम एक्सरसाइज रिकार्ड करने की पेशकश करता है। उसने आधे घंटे की एक्सरसाइज मिस की तो एप से उसे मैसेज आता है और इसमें पूछा जाता है कि क्या वह पांच मिनट या 10 मिनट या इससे भी कम समय में एक्सरसाइज करना पसंद करेगा। उस समय लेखक को निराशा हुई। उसने महसूस किया कि एप उसके लिए यह स्वीकार करना आसान बनाना चाहता है कि वह कम-से-कम कुछ मिनट एक्सरसाइज करेगा। लेखक एप के साथ बना रहा। फिर उसने यह माना कि कुछ मिनट एक्सरसाइज करना भी अहम है। हो सकता है कि इससे उसकी फिटनेस पर कोई फर्क न पड़ा हो लेकिन एक्सरसाइज की आदत मजबूत होना शुरू हो गई।

बचत और निवेश की दुनिया में भी मैं ऐसा ही कुछ देखता हूं। लोग बचत शुरू करने के बारे में सोचते हैं और सबसे पहले ऑनलाइन गोल कैलकुलेटर पर जाकर यह पता लगाने का प्रयास करते हैं कि उनको भविष्य की जरूरत के लिए कितना बचत करने की जरूरत है। जोश में वे खुद को मुश्किल मंथली गोल में डाल देते हैं। वे एक बड़ी एसआइपी शुरू करते हैं। कुछ माह बाद वे पाते हैं कि वे एसआइपी की रकम जमा नहीं कर सकते हैं।

इसका समाधान भी फिटनेस एप जैसा ही है। शुरुआत में आप थोड़ी बचत करें जितना आप आसानी से कर सकते हैं। यह बचत की आदत को मजबूत बनाएगा। यह एक मनोवैज्ञानिक फैक्टर है जो बेहतर रिटर्न और सफलता के लिए निवेश जारी रखने पर जोर देता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि निवेश में सबसे बड़ी समस्या यह नहीं है कि कहां निवेश करें। इसके बजाय सबसे अहम बात किसी भी स्थिति में निवेश करना है। लोग कभी-कभी निवेश करते हैं और फिर जब उनके पास रकम नहीं बचती है या जब बाजार गिरता है तो वे निवेश बंद कर देते हैं।

एसआइपी (SIP) इस मोर्चे पर मदद करती है क्योंकि इसके जरिये निवेश एक आदत बन जाती है। सबसे अहम बात यह है कि कोई ऐसा महीना नहीं होना चाहिए जिसमें आपने बचत न की हो। हमने देखा है कि समय के साथ निवेश की रकम में इजाफा अपने आप होता है। छोटी-छोटी रकम एकत्र होती है और मुनाफा दिखता है। इसके बाद आपको यह देखकर अच्छा महसूस होता है कि आपकी रकम बढ़ रही है। धीरे-धीरे आप अपना निवेश भी बढ़ाने लगते हैं। मैं सोचता हूं कि क्या म्युचुअल फंड को भी ऐसी सहूलियत देनी चाहिए जैसा फिटनेस एप ने किया। अभी चाहे आप सीधे फंड के जरिये निवेश कर रहे हैं या थर्ड पार्टी एप के जरिये, एसआइपी किश्त मिस होने के बारे में कोई चिंता नहीं करता है। अगर कोई मैसेज आए और छोटी रकम निवेश करने की पेशकश करें तो यह तरीका भी काम कर सकता है।

(लेखक वैल्यू रिसर्च के सीईओ हैं। प्रकाशित विचार लेखक के निजी हैं।)

Edited By: Ankit Kumar