नई दिल्ली, संदीप भारद्वाज। हमारे माता-पिता की ही तरह हममें से अधिकांश लोग आंशिक रूप से बैंक जमा, FDs और बीमा पॉलिसियों में ही निवेश करते आए हैं। ज्‍यादा से ज्‍यादा निवेश के लिए हम अचल संपत्ति/real estate को चुना करते थे। लेकिन मूल तर्क यह था कि बैंक FDs सुरक्षित होते हैं क्योंकि पीएसयू (सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम) बैंक बंद नहीं होंगे। वे आकर्षक भी थे क्योंकि एक समय में FDs 10% से अधिक का भुगतान करती थी। ऐसा तब था जब भारतीय ब्याज दरें अपेक्षाकृत अधिक थीं और यह एक बैंक की सुरक्षा का लालच था जिसने लोगों को बैंक FDs में अपना पैसा लॉक करने के लिए वास्तव में आकर्षित किया था। संक्षेप में, बैंक FDs, ऋण निवेश का पर्याय बन गई थी।

डेट फंड एक व्यवहार्य विकल्प के तौर पर उभरे हैं

पिछले 20 वर्षों में बहुत कुछ बदल गया है। ब्‍याज दरों में कटौती की गई है, डेट फंड एक व्यवहार्य विकल्प के रूप में उभरे हैं, FDs से टैक्स का खेल खत्म हो रहा है और वे लिमिटेड फ्लेक्सिबिलिटी प्रदान करते हैं। आइए, उन 8 प्रमुख कारणों पर गौर करें जो बताते हैं कि म्‍युचुअल फंड (Mutual Funds) बैंक FDs के लिए एक व्यवहार्य विकल्प के तौर पर क्यों उभरा है। बेशक, हम इस तुलना को सार्थक बनाने के लिए बड़े पैमाने पर बैंक FDs की तुलना डेट फंड्स से करेंगे। कभी-कभी, हम बढ़ते टैक्स को कम करने के लिए इक्विटी फंड का भी उपयोग करेंगे।

बैंक FDs की तुलना में म्युचुअल फंड क्‍यों हैं बेहतर विकल्प?

1. सीपीआई महंगाई दर आज एक महत्वपूर्ण कारक है। सामान्य महंगाई दर 4-5% के दायरे में रही है और यहाँ तक कि आरबीआई को भी इसके उसी स्तर पर बने रहने की उम्मीद है। बैंकों द्वारा FDs पर 6-6.5% ब्याज का भुगतान किया जा रहा है, FDs में निवेश करने वाले अधिकांश निवेशकों को वास्तविक रिटर्न्स के सम्बन्ध में बहुत कम सेफ्टी मार्जिन के साथ छोड़ दिया जाता है। ये चलन केवल भारत में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में है।

2. मार्केट में दरें कम होने पर FDs का फायदा नहीं मिलता है। यह एक अनोखा फायदा है कि बैंक FDs पर डेट फंड का फायदा लिया जाता है। डेट फंड सरकारी बॉन्ड और कॉर्पोरेट डेट (government bonds and corporate debt) (निगमित ऋण) को अपने पोर्टफोलियो में रखता है। जब दरों में गिरावट आती है तो इन ऋण उपकरणों की कीमत, दरों और बॉन्ड की कीमतों के बीच के विपरीत संबंध के कारण बढ़ जाती है।

3. तरलता के आधार पर, डेट फंड निश्चित रूप से अधिक लिक्विड होते हैं। आप रिडेम्पशन रिक्वेस्ट दे सकते हैं और T + 1 दिन के हिसाब से फंड वापस अपने खाते में पा सकते हैं। डेट फंड लगभग नकदी के ही समान होते हैं। बेशक, एग्जिट लोड को लेकर निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए। 

4. पारदर्शिता एक और बड़ा लाभ है जो डेट फंडों की FDs के सम्बन्ध में रखी जाती है। एक फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट निवेशक के रूप में आप वास्तव में नहीं जानते कि आपके निवेश के साथ क्या किया जा रहा है। आपकी FD की धनराशि अन्य जमा राशियों के साथ संचित होती है और खुदरा तथा कॉमर्शियल लोन के तौर पर कर्ज दिया जाता है। जब आप डेट में निवेश करते हैं, तो पोर्टफोलियो डिस्क्लोजर, NAV की गणना, व्यय अनुपात आदि में पूरी पारदर्शिता रखी जाती है। बैंक FDs में ये काफी अपारदर्शी होते हैं।

5. फिर हम फ्लेक्सिबिलिटी की बात करते हैं कि फंड मैनेजर ने बैंक की तुलना की है। एक डेट फंड के फंड मैनेजर के एसेट सेलेक्शन और एसेट एलोकेशन में कहीं अधिक फ्लेक्सिबिलिटी होता है। एक बैंक फिक्‍स्‍ड में इनमें से कुछ भी नहीं होता है।

6. यहां तक कि टैक्स की दृष्टि से देखें तो डेट फंड बैंक फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट की तुलना में कहीं अधिक फलदायी साबित होते हैं। उदाहरण के लिए, बैंक फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट पर प्राप्‍त ब्याज पर टैक्स की अधिकतम दर से लगाया जाता है। यदि आपकी FDs में 7% की यील्ड है, तो आपकी वास्तविक टैक्स-यील्ड केवल 4.9% (30% टैक्स ब्रैकेट के हिसाब से) होती है, जोकि महंगाई-लागत को कवर करती है। पूंजीगत लाभ पर टैक्स लगाने से डेट फंड में भी फायदा होता है। 3 वर्षों से अधिक अवधि के डेट फंडों को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स के रूप में वर्गीकृत किया जाता है और इंडेक्सेशन के साथ 20% की दर से टैक्स लगाया जाता है। यह काफी हद तक डेट फंड्स पर आपकी बाद की टैक्स-यील्ड में काफी सुधार लाता है।

7. अंत में, हम इक्विटी लिंक्‍ड सेविंग्‍स स्‍कीम (ELSS) और लॉन्ग टर्म बैंक फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट्स की तुलना करते हैं, क्योंकि दोनों आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत छूट की पात्र हैं। यहाँ फिर से म्‍युचुअल फंड के अपने अलग फायदे हैं। फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट के 5 वर्ष की तुलना में लॉक इन पीरियड सिर्फ 3 वर्ष ही है। दूसरी बात, ELSS धन संचय का लाभ दे सकता है, जो बैंक FDs में नहीं होता है।

8. डेट फंड्स तेजी से बैंक FDs के एक व्यवहार्य विकल्प / viable alternative के रूप में उभर रहे हैं। वास्तव में, बचत खातों और बैंक फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट पर डेट फंड्स से अधिक लिक्विड फंडों को पसंद करने वाले निवेशकों की संख्या बढ़ती जा रही हैं। जैसा कि निवेशक बैंक डिपॉजिट पर डेट फंड्स की खूबियों को समझते और उसकी सराहना करते हैं, तो शिफ्ट और भी स्पष्ट हो जाती है। हालांकि, बैंक FD और म्‍युचुअल फंड के बीच निवेश करने का निर्णय हमेशा निवेशक की जोखिम क्षमता पर निर्भर करेगा।

(लेखक एंजेल ब्रोकिंग लिमिटेड के चीफ सेल्स ऑफिसर हैं। प्र‍काशित विचार उनके निजी हैं।)

Posted By: Manish Mishra

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