शशांक भारद्वाज। हमारा देश आर्थिक सुधारों की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। परंतु एक विडंबना यह भी सामने आ रही है कि इसका लाभ सभी वर्ग के लोगों को नहीं मिल पा रहा है। शेयर बाजार में ऐसा करने की क्षमता है, किंतु हमारे देश में अभी भी यह अल्प विकसित अवस्था में ही है। राष्ट्र की जनसंख्या का बहुत ही कम भाग शेयरों की जानकारी रखता है, इस कारण वह इनमें निवेश भी बहुत कम ही कर पाता है।

आंकड़े बताते हैं कि वित्त वर्ष 2021-2022 तक भारत में महज नौ करोड़ डीमैट खाते थे जो जनसंख्या की तुलना में बहुत कम है। आधुनिक युग में शेयर बाजार संपत्ति निर्माण का एक बड़ा केंद्र है। संपत्ति का यह एक प्रमुख प्रकार है जिसने भारत समेत पूरे विश्व में खरबों रुपये की संपति निर्मित की है। केवल भारतीय शेयर बाजार का ही मार्केट पूंजीकरण 2.75 लाख करोड़ रुपये से अधिक है अर्थात इसने इतनी बड़ी राशि की संपत्ति निर्मित की है। शेयर बाजार ने विकसित राष्ट्रों यथा अमेरिका, जापान, यूरोपीय राष्ट्र आदि में तो भारत की तुलना में कई गुना अधिक संपत्ति का सृजन किया है।

भारत में भी पिछले कुछ वर्षों में शेयर बाजार में जो तेजी आई है, संपत्ति सृजन हुआ है, उसका लाभ अत्यंत अल्प भारतीयों को तथा विदेशी निवेशकों को ही हुआ है। इसका एक प्रमुख कारण सामान्य भारतीयों की शेयर बाजार में बहुत कम प्रतिभागिता रही है। इस बारे में जानकारी का अभाव और उदासीनता भी बड़ा कारण है। अब इन सभी कारणों को दूर करने की आवश्यकता है, ताकि बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक शेयर बाजार की समृद्धि का लाभ उठा सकें।

आज विश्व के सर्वाधिक धनी व्यक्ति अपने शेयरों के मूल्यों के कारण ही धनी हैं। अनेक कंपनियों का बाजार पूंजीकरण कुछ देशों की जीडीपी से भी अधिक है। निश्चित तौर पर शेयर आर्थिक विकास और सुदृढ़ीकरण का एक महत्वपूर्ण आधार होते हैं। किसी राष्ट्र की अर्थव्यस्था के विकास में शेयर की महती भूमिका है। पूंजी किसी उद्योग को स्थापित करने और उसके संचालन के लिए अनिवार्य है। शेयर बाजार बिना किसी प्रत्यक्ष अधिभार के, बिना ब्याज की पूंजी उपलब्ध करवाते हैं। इससे धन की प्रत्यक्ष लागत कम होती है और लाभप्रदता में वृद्धि होती है। आज समूचे विश्व में जो विकास दिख रहा है, उसमें सर्वाधिक योगदान शेयर बाजार का है। सभी प्रकार की संपत्तियों में सर्वाधिक प्रतिफल शेयरों में मिला है।

सबसे बड़ी बात यह है कि शेयरों में निवेश पर प्रतिफल आशातीत हो सकता है, हुआ है, इसकी कोई सीमा नहीं है तथा यह एक सतत अवसर होता है। परंतु इस संदर्भ में सर्वाधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि हमें उसमें निवेश करना आना चाहिए। यह कार्य सीखना चाहिए। भारतीय शेयर बाजार विकसित होंगे, बड़े होंगे तो राष्ट्र में पूंजी की उपलब्धता होगी। इससे पूंजी की कमी दूर होगी और विदेशी पूंजी व ऋण पर निर्भरता कम होगी। इससे उद्योगों का विस्तार होगा।

परिणामस्वरूप आजीविका के साथ अच्छे वेतन के अवसर बढ़ेंगे। साथ ही, उद्यमिता को प्रोत्साहन मिलेगा। सुप्त संपत्ति चलायमान संपत्ति में परिवर्तित होकर शेयर धारकों के हाथों में आएगी। शेयरों का बढ़ता मूल्य : भारतीय स्टेट बैंक के शेयर सूचीबद्ध होकर आज चार लाख करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति का निर्माण कर चुके हैं। रिलायंस का पूंजीकरण 17 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक है जिसमें मुकेश अंबानी का भाग 49 प्रतिशत अर्थात साढ़े आठ लाख करोड़ रुपये है।

शेष शेयर यानी साढ़े आठ लाख करोड़ रुपये के शेयर जनसाधारण के पास हैं। कहा जा सकता है कि अंबानी ने केवल अपने लिए ही संपत्ति अर्जित नहीं की है, बल्कि जनसाधारण को भी धनवान बनाया है। यह शेयर बाजार का एक अत्यंत सकारात्मक पक्ष है। यह सभी के लिए धन संपत्ति का सृजन करने का अवसर प्रदान करता है, सृजित करता है। भारत में अनेक स्टार्टअप प्रारंभ हुए हैं और इनमें से कितने ही यूनिकार्न के रूप में परिवर्तित होकर लाखों करोड़ रुपये की संपत्ति बना चुके हैं।

शेयर बाजार के विकास से जीविका के लाखों अवसर सृजित होते हैं। उद्योग धंधों के विस्तार से नई नौकरियां तो मिलती ही हैं, अनेक प्रकार के नए व्यापार के अवसर भी उत्पन्न होते हैं। क्षेत्रों का विकास होता है। साथ ही वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में भी विकेंद्रीकृत एवं बड़ी संख्या में स्व-जीविका के अवसर सृजित होते हैं। भारत में चूंकि जनसंख्या का बहुत बड़ा भाग अभी भी वित्तीय सेवाओं की परिधि से बाहर है, ऐसे में वित्तीय सलाहकार के रूप में जीविका की बड़ी संभावना है। अतः भारत सरकार को शेयर बाजार को सर्वोच्च प्राथमिकता में से एक मानकर इसके विकास के लिए महती कदम उठाने चाहिए। जनसाधारण के मन में शेयर बाजार के प्रति विश्वास का भाव बनाया जाना चहिए। पारदर्शिता, अच्छा कारपोरेट परिचालन, किसी प्रकार की धोखाधड़ी पर यथासंभव रोक के लिए व्यवस्था तथा उपाय इत्यादि माध्यमों से एक विश्वास का भाव का निर्माण होना चाहिए।

देश के द्वितीय और तृतीण श्रेणी के नगरों, ग्रामीण क्षेत्रों में शेयर को लेकर सतत जागरूकता अभियान चलाना चाहिए। शेयर आर्थिक विकास का अत्यंत महत्वपूर्ण पक्ष हो गया है। समय आ गया है कि भारत सरकार राष्ट्र में शेयर क्रांति की दिशा में सोचे और जन धन खाते की तरह शेयर में निवेश करने के लिए डीमैट खाते खोलने का भी अभियान चलाया जाए।

संपत्ति के सृजन और पूंजी निर्माण में शेयरों की भूमिका निरंतर बढ़ती जा रही है, परंतु हमारे देश में एक बड़ी जनसंख्या को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। ऐसा परिवेश निर्मित होना चाहिए ताकि अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ मिल सके।

[क्षेत्रीय उपाध्यक्ष, चाइस ब्रोकिंग]

Edited By: Sanjay Pokhriyal