आदिल शेट्टी, नई दिल्‍ली। पिछले दो वर्षों के दौरान ब्याज दरों में काफी गिरावट आई है। साल 2019 से अब तक कई बार भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रेपो रेट में कटौती की है। इसका असर फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की ब्याज दरों पर पड़ना जायज है। पिछली जून की शुरुआत में बड़े बैंक 6 प्रतिशत से लेकर 8.2 प्रतिशत तक ब्याज दे रहे थे। अब दरें धीरे-धीरे 4-6.50 प्रतिशत के स्तर पर आ गई हैं। इसका असर उन निवेशकों पर होगा जो जोखिम उठाना पसंद नहीं करते। ऐसे में सवाल उठता है कि, जो लोग थोड़ा ज्यादा रिटर्न चाहते हैं, उन्हें क्या करना चाहिए? इसका एक जवाब कंपनी एफडी हो सकता है।

क्या होते हैं कंपनी एफडी?

जिस तरह आप बैंक में एफडी खुलवाते हैं, उसी तरह कंपनियों के साथ भी एफडी खाता खुलवा सकते हैं। अंतर यह है कि इस तरह केवल एफडी खुलवाया जा सकता है, बचत खाता नहीं। ये कंपनियां निजी या सरकारी हो सकती हैं और इन्हे 'कंपनीज एक्ट' की धरा-58 के तहत इजाजत है कि वे जनता को डिपॉजिट का निमंत्रण दें। कंपनी डिपॉजिट अनसेक्योर्ड यानी आप कंपनी को कर्ज तो दे रहे हें, लेकिन उसके बदले कंपनी आपके पास कुछ गिरवी नहीं रखती। ऐसे कर्ज के बदले आपको ब्याज मिलता है, जिसकी दर अमूमन बैंक एफडी के मुकाबले ज्यादा होती है। यही इन्हें आकर्षक बनाता है।

कितना मुनाफा होगा?

यदि आप सरकारी बैंकों के एक-दो साल तक के एफडी की ब्याज दर देखें तो यह 5.50 प्रतिशत से लेकर 5.90 प्रतिशत तक नजर आएंगी। प्राइवेट बैंक थोडा ज्यादा ब्याज देंगे। कुछ छोटे प्राइवेट बैंक निवेशकों को आकषिर्षत करने के लिए अब भी 7-7.25 प्रतिशत तक ब्याज दे रहे हैं, जबकि बड़े प्राइवेट बैंक 5.60 से लेकर 6.00 प्रतिशत तक ब्याज की पेशकश कर रहे हैं। इनकी तुलना में चुनिंदा कंपनी एफडी 7-8 प्रतिशत ब्याज भी दे रहे हैं। तो क्या इसका मतलब है कि कंपनी एफडी ही बेहतर विकल्प है? असल में कंपनी एफडी ज्यादा ब्याज भले ही देते हैं, लेकिन निवेशकों को इनके जोखिम भी समझना होगा।

कंपनी एफडी के जोखिमों को समझें

डीआईसीजीसी नाम की एक संस्थान हैं, जो आरबीआई की सब्सिडियरी है। इसका काम है किसी भी बैंक में पड़ी आपकी बचत का बीमा करना। ऐसा आज तक हुआ नहीं है, लेकिन यदि किसी दिन कोई भारतीय कमर्शियल बैंक डूबता है तो आपकी जमा पूंजी पांच लाख रपये तक सुरक्षित है। यह गारंटी आपको कंपनी एफडी में नहीं मिलती। डिपॉजिट लेने वाली कंपनी की आर्थिक स्थिति यदि बिगड़ती है तो उसे आपका मूलधन और ब्याज, दोनों चुकाने में दिक्कत हो सकती है। जाहिर है, ऐसी स्थिति में आपको नुकसान हो सकता है।

क्रेडिट रेटिंग जानें

क्रिसिल जैसी कुछ क्रेडिट रिसर्च एजेंसियां कंपनी एफडी की रेटिंग करती हैं। इस तरह की रेटिंग से यह पता चलता है कि किसी कंपनी एफडी में निवेश कितना सुरक्षित है। यह रेटिंग ट्रिपल ए, डबल ए, ए, बी, सी या डी जैसे अंग्रेजी अक्षरों में होती है। ध्यान रहे है कि इन दिनों वैश्विक आर्थिक परिदृश्य खराब हैं। ऐसे में आपको ट्रिपल ए रेटिंग वाले एफडी ही चुनने चाहिए। यह रेटिंग दर्शाता है कि इस एफडी में निवेश करने से आपका मूलधन और ब्याज, दोनों समय पर मिलने की अच्छी संभावना है। जैसे-जैसे रेटिंग कम होती है, आपका पैसा अटकने की आशंका ब़़ढती जाती है। कम रेटिंग वाली कंपनियां निवेशकों को आकर्षित करने के लिए अक्सर ज्यादा ब्याज देती हैं। यह आप पर निर्भर है कि आप कितना जोखिम उठाना चाहते हैं। आखिर पैसा आपका है।

कितना पैसा लगाएं?

एक मुहावरा है कि अपने सारे अंडे एक टोकरी में न रखें। निवेश में इसका अर्थ है कि सारा पैसा एक जगह न अटकाएं। अलग--अलग जगह निवेश करें, ताकि जोखिम कम रहे और अलग-अलग मात्रा में मुनाफा मिलता रहे। यदि किसी एसेट क्लास में किया गया निवेश फेल होता है तो दूसरे निवेश अपना काम करते रहेंगे। इसीलिए कंपनी एफडी में निवेश करने से पहले जोखिम को समझें और अपनी आर्थिक जरूरतें नजर में रखते हुए फैसले करें।

(लेखक बैंकबाजार डॉट कॉम के सीईओ हैं। प्रकाशित विचार उनके निजी हैं।)

Posted By: Manish Mishra

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