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दीवाली पर कपड़ा उद्योग को बड़ा तोहफा! अब 31 दिसंबर तक बिना ड्यूटी विदेशों से आएगा कपास

Published: Sat, 31 Oct 2026 10:36 AM (IST)

केंद्र सरकार ने कपड़ा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कपास आयात पर सीमा शुल्क छूट की अवधि 31 दिसंबर ...और पढ़ें

कॉटन आयात पर मिली छूट (AI फोटो)

कॉटन आयात पर मिली छूट (AI फोटो)

HighLights

  1. कपास आयात पर सीमा शुल्क छूट 2026 तक बढ़ी

  2. कपड़ा उद्योग को सस्ती कपास आपूर्ति सुनिश्चित होगी

  3. घरेलू उत्पादन में कमी और सूखे की चिंताएं

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने कपास के आयात पर एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने कपास के आयात पर कस्टम ड्यूटी यानी सीमा शुल्क में छूट की अवधि को दो महीने बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 तक कर दिया है। इस कदम का मकसद कपड़ा उद्योग के लिए कपास की आपूर्ति को बढ़ाना है।
शुक्रवार को जारी की गयी एक सरकारी अधिसूचना के जरिए वित्त मंत्रालय ने कस्टम ड्यूटी में छूट की समय-सीमा को 31 अक्टूबर से बढ़ाकर दिसंबर के अंत तक कर दिया है। इससे पहले, 1 जून से 31 अक्टूबर तक 11 प्रतिशत की कस्टम ड्यूटी हटा दी गई थी।

कपास की आपूर्ति कम

ड्यूटी में यह छूट ऐसे समय में दी गई है जब घरेलू स्तर पर कपास की आपूर्ति कम होने की चिंताएं हैं। 2026-27 के सीजन में कपास के उत्पादन में गिरावट आने की आशंका है, जिसका कारण खेती के रकबे में कमी और महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों के कुछ हिस्सों में पड़ा सूखा है, जिससे फसल की पैदावार पर बुरा असर पड़ सकता है।

विभिन्न बाजारों में नई फसल आनी शुरू हो गई है, लेकिन आवक कम होने के कारण कीमतें अभी भी ऊंची बनी हुई हैं। इसके पीछे मुख्य कारण पैदावार में संभावित कमी और किसानों द्वारा बेहतर कीमतों की उम्मीद में अपनी उपज को रोक कर रखना है।

कच्चे कपास की दैनिक आवक

कच्चे कपास की दैनिक आवक 70,000 से 80,000 गांठों (प्रत्येक 170 किलोग्राम की) के बीच है, जो बाजार की उम्मीदों से कम है। उम्मीद है कि दिवाली के बाद आवक में तेजी आ सकती है। 23 अक्टूबर तक कुल आवक 15 लाख गांठों (प्रत्येक 170 किलोग्राम) तक पहुंच गई है, जबकि एक अनुमान के अनुसार, खपत 23 लाख गांठों के आसपास रहने की संभावना है।

किफायती कीमतों पर कपास

इस ड्यूटी छूट से कपड़ा मिलों को विदेशों से किफायती कीमतों पर कपास खरीदने में मदद मिलेगी, जिससे उनकी लागत कम होगी और भारतीय कपड़ा और परिधान निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी। हालांकि, इस छूट के कारण घरेलू कपास की कीमतों पर दबाव पड़ सकता है, जो हाल के हफ्तों में फिर से बढ़ गई थीं।

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