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    Union Budget 2026: कहां छपते हैं बजट के गोपनीय दस्तावेज? सुरक्षा ऐसी कि प्रिंटिंग स्टाफ को परिवार से भी रहना पड़ता है दूर

    Updated: Sat, 03 Jan 2026 03:58 PM (IST)

    केंद्रीय बजट के गोपनीय दस्तावेजों की छपाई नॉर्थ ब्लॉक स्थित विशेष सरकारी प्रेस में होती है। सुरक्षा कारणों से प्रिंटिंग स्टाफ को दो हफ्ते तक परिवार से ...और पढ़ें

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    Union Budget 2026: 1 फरवरी को लोकसभा में बजट पेश होने वाला है। पारंपरिक ‘हलवा समारोह’ के बाद बजट प्रक्रिया के ‘लॉक-इन पीरियड’ की औपचारिक शुरुआत का संकेत माना जाता है। हलवा समारोह एक पुरानी परंपरा है, जिसमें बजट तैयार करने से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों को मिठाई परोसी जाती है। इसका आयोजन नई दिल्ली स्थित नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में होता है, जहां वित्त मंत्रालय का मुख्यालय स्थित है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बजट के बेहद गोपनीय दस्तावेज आखिर कहां और कैसे छापे जाते हैं?

    कहां होती है बजट दस्तावेजों की छपाई?

    केंद्रीय बजट से जुड़े सभी दस्तावेज नॉर्थ ब्लॉक परिसर में मौजूद एक विशेष सरकारी प्रिंटिंग प्रेस में ही छापे जाते हैं। पहले ये दस्तावेज राष्ट्रपति भवन में छापे जाते थे, लेकिन वर्ष 1950 में बजट से जुड़ी जानकारी लीक होने की घटना के बाद इस व्यवस्था में बदलाव किया गया। इसके बाद छपाई का काम मिंटो रोड स्थित सरकारी प्रेस में शिफ्ट किया गया और अंततः 1980 में इसे नॉर्थ ब्लॉक के भीतर स्थानांतरित कर दिया गया।

    सैकड़ों प्रतियां, बेहद सख्त गोपनीयता

    बजट की सैकड़ों प्रतियों की छपाई एक अत्यंत संवेदनशील प्रक्रिया होती है। सुरक्षा कारणों से प्रिंटिंग प्रेस में काम करने वाले कर्मचारियों को करीब दो हफ्ते तक पूरी तरह आइसोलेशन में रखा जाता है। इस दौरान वे न सिर्फ बाहरी दुनिया से कटे रहते हैं, बल्कि अपने परिवार से भी संपर्क नहीं कर पाते।
    इस सख्ती का मकसद सिर्फ एक होता है। बजट से जुड़ी किसी भी जानकारी का समय से पहले बाहर न जाना।

    मोदी सरकार में बदलीं कई परंपराएं

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2014 में सत्ता में आने के बाद बजट से जुड़ी कई पुरानी परंपराओं में बदलाव किया गया। 2017 में रेल बजट को आम बजट में मिला दिया गया। बजट पेश करने की तारीख भी बदली गई और इसे महीने के अंत के बजाय 1 फरवरी को पेश किया जाने लगा। इसके अलावा 2021 से बजट को डिजिटल फॉर्मेट में प्रस्तुत किया जा रहा है।
    हालांकि, इन तमाम बदलावों के बावजूद ‘हलवा समारोह’ की परंपरा आज भी कायम है, जो बजट प्रक्रिया की गोपनीयता और सामूहिक मेहनत का प्रतीक मानी जाती है।