Budget History: आजादी से पहले इस अंग्रेज ने बनाया पहला इनकम टैक्स सिस्टम? कम आय वालों को मिली थी ये टैक्स छूट
यह लेख आगामी केंद्रीय बजट के संदर्भ में भारत के पहले बजट के इतिहास पर प्रकाश डालता है। 7 अप्रैल 1860 को जेम्स विल्सन ने इसे पेश किया था, जब भारत आजाद ...और पढ़ें

नई दिल्ली। केंद्रीय बजट 1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में पेश कर सकती हैं। बजट से पहले की औपचारिक प्रक्रिया के तहत पारंपरिक ‘हलवा समारोह’ के साथ लॉक-इन अवधि शुरू हो चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में यह उनका दूसरा पूर्ण बजट होगा, जबकि कुल मिलाकर संसद में पेश किया जाने वाला उनका आठवां बजट है।
लेकिन बजट की चर्चा के बीच एक सवाल अक्सर सामने आता है कि भारत का पहला बजट आखिर किसने पेश किया था, जब देश आजाद भी नहीं हुआ था?
भारत का पहला बजट किसने पेश किया था?
भारत का पहला केंद्रीय बजट 7 अप्रैल 1860 को जेम्स विल्सन ने पेश किया था। जेम्स विल्सन इंडियन काउंसिल के सदस्य थे और अखबार द इकोनॉमिस्ट के फाउंडर भी रहे। यह बजट 1857 के विद्रोह के बाद भारत की बिगड़ चुकी वित्तीय व्यवस्था को सुधारने के उद्देश्य से लाया गया था।
विल्सन को भारत क्यों भेजा गया था?
ब्रिटिश शासन के दौरान महारानी विक्टोरिया ने जेम्स विल्सन को भारत भेजा था, ताकि यहां एक सशक्त कर प्रणाली तैयार की जा सके और काग़ज़ी मुद्रा (पेपर करेंसी) को लागू किया जा सके। भारत में आयकर की अवधारणा को औपचारिक रूप से शुरू करने का श्रेय भी जेम्स विल्सन को ही जाता है।
पहले बजट में क्या थे अहम फैसले?
इतिहासकारों के अनुसार, भारत में पहले लाइसेंस टैक्स लागू करने का प्रयास असफल रहा था और प्रत्यक्ष कर (डायरेक्ट टैक्स) को लेकर व्यापक असमंजस था। ऐसे में विल्सन ने पुराने और अप्रभावी लाइसेंस टैक्स को समाप्त कर आयकर का अधिक व्यावहारिक ढांचा पेश किया।
अपने पहले बजट में उन्होंने यह व्यवस्था की कि जिन लोगों की वार्षिक आय 200 रुपये से कम है, उन्हें टैक्स नहीं देना होगा। इसके अलावा, सरकारी खर्च पर निगरानी रखने के लिए उन्होंने ब्रिटिश प्रणाली पर आधारित एक ऑडिट व्यवस्था भी शुरू की।
अल्पकालिक कार्यकाल, लेकिन स्थायी प्रभाव
पहला बजट पेश करने के कुछ ही महीनों बाद अगस्त 1860 में कोलकाता में पेचिश के कारण जेम्स विल्सन का निधन हो गया। हालांकि उनका कार्यकाल बहुत छोटा रहा, लेकिन भारत की कर व्यवस्था और बजट प्रणाली की नींव रखने में उनकी भूमिका ऐतिहासिक मानी जाती है।

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