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आ गया FICCI का प्री-बजट सर्वे, इस रफ्तार से ग्रोथ करेगा भारत; FY27 को लेकर बड़ी भविष्यवाणी

Published: Thu, 22 Jan 2026 03:39 PM (IST)

FICCI ने 2026-27 के लिए अपना प्री-बजट सर्वे (FICCI Pre-Budget Survey) जारी किया है, जिसमें भारतीय उद्योग जगत ने देश ...और पढ़ें

आ गया FICCI का प्री-बजट सर्वे

आ गया FICCI का प्री-बजट सर्वे

HighLights

  1. FICCI का प्री-बजट सर्वे आया

  2. 7-8% विकास दर की उम्मीद

  3. रोजगार, इंफ्रास्ट्रक्चर, निर्यात पर बजट से मुख्य मांगें

आईएएनएस, नई दिल्ली। फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) ने अपना प्री-बजट सर्वे 2026-27 जारी किया है। इस सर्वे में भारत के उद्योग जगत (इंडिया इंक) ने केंद्रीय बजट 2026-27 से पहले देश की आर्थिक संभावनाओं को लेकर काफी आशावादी रुख दिखाया है। सर्वे में शामिल अधिकांश लोगों ने भारत की विकास यात्रा पर मजबूत विश्वास जताया है। सर्वे के अनुसार, लगभग 80 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने भारत की आर्थिक संभावनाओं में भरोसा व्यक्त किया। करीब 50 प्रतिशत लोगों को उम्मीद है कि अगले वित्तीय वर्ष 2026-27 में विकास दर 7 से 8 प्रतिशत के बीच रहेगी। यह वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत के मजबूत आर्थिक आधार पर भरोसा दर्शाता है।

राजकोषीय घाटे को लेकर अनुमान क्या?

लगभग 42 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना है कि वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025-26 में राजकोषीय घाटे का लक्ष्य जीडीपी के 4.4 प्रतिशत पर हासिल किया जाएगा, जो सरकार की राजकोषीय अनुशासन की नीति पर विश्वास को मजबूत करता है।
उद्योग ने बजट से तीन मुख्य प्राथमिकताओं की मांग की है। पहली, रोजगार सृजन पर जोर, दूसरी, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को जारी रखना और तीसरी, निर्यात को मजबूत समर्थन देना।

मैन्युफैक्चरिंग और पूंजीगत व्यय पर फोकस

सर्वे में इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग, रक्षा क्षेत्र और एमएसएमई को प्रमुख क्षेत्रों के रूप में चिह्नित किया गया है। उद्योग का कहना है कि सरकार को मैन्युफैक्चरिंग और पूंजीगत व्यय पर फोकस बनाए रखना चाहिए।
इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में बड़े पैमाने पर विकास के लिए एक मेगा क्लस्टर बनाना जरूरी है, जिसमें ओईएम, ईएमएस फर्म और कंपोनेंट सप्लायर्स को एक साथ लाया जाए। रक्षा मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए पूंजीगत व्यय का हिस्सा 30 प्रतिशत तक बढ़ाना चाहिए।

ड्रोन क्षेत्र के लिए पीएलआई योजना का विस्तार

फ्रंटलाइन संपत्तियों, यूएवी, काउंटर-यूएवी सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और एआई आधारित क्षमताओं के आधुनिकीकरण पर ध्यान देना चाहिए। ड्रोन क्षेत्र के लिए पीएलआई योजना को 1,000 करोड़ रुपए तक बढ़ाना और 1,000 करोड़ रुपए का एक अलग आरएंडडी फंड बनाना सुझाया गया है।
निर्यात को लेकर उद्योग ने वैश्विक व्यापार तनाव, टैरिफ अनिश्चितता और सीबीएएम जैसे गैर-टैरिफ बाधाओं का जिक्र किया। बजट में निर्यात को मजबूत बनाने के लिए ट्रेड फैसिलिटेशन, कस्टम्स प्रक्रियाओं को आसान करना, लॉजिस्टिक्स और पोर्ट संबंधी बाधाएं कम करना, निर्यात प्रोत्साहन और रिफंड व्यवस्था को मजबूत करने की मांग की गई है।

संतुलित फैसले की उम्मीद

डायरेक्ट टैक्स में मुख्य मांगें कंप्लायंस को सरल बनाना, डिजिटलीकरण बढ़ाना, टैक्स निश्चितता देना, विवाद समाधान तेज करना और मुकदमेबाजी कम करना हैं। साथ ही, कॉर्पोरेट पुनर्गठन और निवेशकों के लिए सुविधाएं बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
कुल मिलाकर, फिक्की का यह सर्वे बताता है कि उद्योग बजट से विकास, रोजगार और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने वाले संतुलित फैसले की उम्मीद कर रहा है। यह बजट भारत को वैश्विक मूल्य शृंखला में मजबूत स्थान दिलाने और संरचनात्मक सुधारों को तेज करने का मौका होगा, जबकि राजकोषीय समझदारी भी बरती जाए।

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