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जब बजट में शादीशुदा लोगों को सिंगल्स के मुकाबले मिली टैक्स में दोगुनी राहत, ₹1000 कमाने वालों से भी होती थी वसूली

Published: Thu, 22 Jan 2026 10:50 AM (IST)

1955 के बजट (Budget) में सी.डी. देशमुख ने विवाहित और अविवाहित व्यक्तियों के लिए आयकर नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए। ...और पढ़ें

1955 में सिंगल लोगों के लिए घटाई गई थी टैक्स फ्री आय सीमा

1955 में सिंगल लोगों के लिए घटाई गई थी टैक्स फ्री आय सीमा

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नई दिल्ली। हर साल बजट में टैक्स की घोषणाओं पर सबकी नजरें रहती हैं। हर टैक्सपेयर चाहता है कि टैक्स के मोर्च पर राहत मिले। मगर ऐसा नहीं होता कि सरकार हर बार राहत दे। कई बार टैक्स का बोझ बढ़ा भी दिया जाता है। ऐसा ही सन 1955 के बजट में भी किया गया था। आइए जानते हैं क्या था वो मामला।

किसने पेश किया था 1955 का बजट?

1955-56 का बजट सी.डी. देशमुख ने पेश किया था, जो उस समय केंद्रीय वित्त मंत्री थे। यह पहली बार था जब बजट के दस्तावेज अंग्रेजी के साथ-साथ हिंदी में भी उपलब्ध कराए गए, जिससे नागरिकों के लिए बजट को समझना आसान हुआ।
उसे एक बुनियादी बजट माना गया, जिसने औद्योगीकरण पर जोर दिया, कृषि को बढ़ावा दिया और इनकम टैक्स सिस्टम को रिस्ट्रक्चर किया गया।

शादीशुदा लोगों को टैक्स में अधिक राहत

अपनी बजट स्पीच में देशमुख ने कहा था कि, "मौजूदा टैक्स छूट की सीमा 1,500 रुपये से बढ़ाकर शादीशुदा लोगों के लिए 2,000 रुपये और अविवाहित लोगों के लिए घटाकर 1,000 रुपये की जा रही है। यह फैमिली अलाउंस की एक सही स्कीम बनाने की दिशा में पहला कदम है, जिसे कमीशन ने लागू करने का सुझाव दिया है। रेवेन्यू में कुल नुकसान का अनुमान 90 लाख रुपये है।"

सिंगल लोगों पर बढ़ा बोझ

तब तक सभी टैक्सपेयर के लिए सालाना 1500 रुपये तक की आय टैक्स फ्री थी, जिसे बजट 1955 में बदला गया। शादीशुदा लोगों के लिए टैक्स फ्री इनकम लिमिट को जहां बढ़ाकर 2000 रुपये कर दिया गया, वहीं सिंगल लोगों के लिए इसे घटाकर 1000 रुपये कर दिया गया।

ये थी आयकर स्लैब

  • ₹0 - ₹1,000: कोई इनकम टैक्स नहीं
  • ₹1,001 - ₹5,000: 9 पैसे प्रति रुपया
  • ₹5,001 - ₹7,500: 1 आना और 9 पैसे प्रति रुपया
  • ₹7,501 - ₹10,000: 2 आना और 3 पैसे प्रति रुपया
  • ₹10,001 - ₹15,000: 3 आना और 3 पैसे प्रति रुपया
  • ₹15,000 और उससे ज्यादा: 4 आना प्रति रुपया

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