UPI पर MDR से खत्म होगा फ्री ब्रोकरेज? Zerodha वाले नितिन कामथ की बड़ी चेतावनी, फ्री डिलीवरी ट्रेड पर क्या बोले?
UPI MDR: नितिन कामथ ने 15 अक्टूबर से लागू होने वाले UPI MDR पर चिंता जताई है, खासकर ब्रोकिंग इंडस्ट्री ...और पढ़ें

UPI पर MDR से खत्म होगा फ्री ब्रोकरेज? Zerodha वाले नितिन कामथ की बड़ी चेतावनी! (AI Generated Image)
HighLights
15 अक्टूबर से ₹2000 से अधिक UPI लेनदेन पर 0.4% MDR लागू।
नितिन कामथ ने ब्रोकिंग इंडस्ट्री पर MDR के प्रभाव पर चिंता जताई।
ब्रोकिंग के लिए 0.02% MDR, ₹5-₹10 कैप का सुझाव।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। देशभर में 15 अक्टूबर से UPI Transaction पर MDR (Merchant Discount Rate) लागू होगा। जिसके बाद डिजिटल पेमेंट के तौर तरीके काफी हद तक बदल जाएंगे। ऐसे में अब MDR को लेकर बिजनेस और ब्रोकिंग इंडस्ट्री में चर्चाएं तेज हो गई हैं। जीरोधा के फाउंडर नितिन कामथ (Nitin Kamath, Zerodha) ने भी इस नए फैसले को लेकर लंबा चौड़ा पोस्ट किया है और जीरोधा पर ब्रोकिंग को लेकर भी चेतावनी जारी की है। आइए जानते हैं कि नितिन कामथ ने क्या कहा।
15 अक्टूबर से क्या बदलने जा रहा है?
15 अक्टूबर से अगर आप किसी मर्चेंट (दुकानदार या बिजनेस) को ₹2000 से ज्यादा का डायरेक्ट यूपीआई पेमेंट करते हैं, तो उस पर 0.4% का एमडीआर लगेगा। इसका असर ग्राहक पर नहीं होगा लेकिन मर्चेंट पर इसका पूरा-पूरा असर होगा।
क्या बोले नितिन कामथ?
नितिन कामथ ने सरकार के इस नियम का पहले स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यूपीआई के बढ़ते चलन को देखते हुए, ये कभी न कभी होना ही था। उन्होंने आगे कि कहा कुछ ऐसे मामले हैं, जैसे इन्वेस्टिंग और ब्रोकिंग, जहां प्रस्तावित MDR स्ट्रक्चर का कोई मतलब नहीं बनता। क्योंकि कई बार ऐसा होता है कि यूजर के द्वारा भेजा गया पैसा असल में ट्रांजैक्श न कह लाए।
ब्रोकिंग को लेकर जताई चिंता!
नितिन कामथ ने सरकार के इस नए नियम को लेकर उदाहरण दिया। उन्होंने लिखा कि-
उदाहरण के लिए, 10,000 कस्टमर हर महीने ₹2 लाख के 50 UPI ट्रांसफर कर सकते हैं, बिना एक भी ट्रेड किए। प्रस्तावित MDR के हिसाब से, इससे ब्रोकर को बिना किसी बिज़नेस के लगभग ₹2 करोड़ का खर्च पड़ सकता है। मुझे लगता है कि MDR होना ठीक है। इससे बिना ट्रांज़ैक्शन किए पैसे ट्रांसफर करने वाले कस्टमर्स की समस्या तो हल नहीं होती, लेकिन ब्रोकिंग के लिए ₹300 तक की कैप के बजाय, प्रति ट्रांज़ैक्शन ₹5 या ₹10 की कैप के साथ 0.02% जैसा कुछ ज़्यादा सही लगता है।
I think MDR on UPI was probably inevitable at some point, especially given how widespread UPI adoption has become. It could also lead to more competition, instead of just three apps accounting for more than 95% of the market.
— Nithin Kamath (@Nithin0dha) September 16, 2026
That being said, there are some use cases, like…
'हमेशा नहीं झेल सकते!'
नितिन कामथ ने इस पोस्ट में सेबी के उस नियम (Quarterly Settlement) का भी जिक्र किया, जिसके तहत ब्रोकर्स को हर महीने या क्वार्टर में क्लाइंट्स को बिना इस्तेमाल हुआ फंड वापस भेजना होता है। और फिर इसके बाद ग्राहक फिर उसी पैसे तो यूपीआई के जरिए अपने ब्रोकिंग अकाउंट ने ट्रांसफर कर लेते हैं। इसे लेकर नितिन ने कहा कि-
हम अभी इक्विटी डिलीवरी ट्रेड्स पर ब्रोकरेज चार्ज नहीं करते हैं क्योंकि इकोनॉमिक्स हमें उन्हें मुफ़्त में ऑफ़र करने की इजाज़त देती है। लेकिन अगर हर UPI ट्रांसफर पर अतिरिक्त खर्च लगने लगे, चाहे कस्टमर असल में ट्रेड करे या न करे, तो मुझे नहीं लगता कि हम इसे हमेशा के लिए झेल सकते हैं।
आखिर में नितिन कामथ ने कहा कि एमडीआर लागू होना ठीक है, लेकिन ब्रोकिंग सेक्टर के लिए मौजूदा स्ट्रक्चर व्यावहारिक नहीं है। 300 रुपये तक के ऊंचे कैप की बजाय अगर इसे 0.02% (5 या 10 रुपये के अधिकतम कैप के साथ) रखा जाए, तो ये ब्रोकिंग सेक्टर के लिए ज्यादा उचित और संतुलित हो सकता है।
ये भी पढ़ें: SSY vs SIP: ₹12,500 महीना बचाने पर बेटी के लिए कहां मिलेगा लाखों का रिटर्न? ये रहा पूरा कैलकुलेशन
