नई दिल्ली, पीटीआइ (राजकुमार लेशेम्बा)। वर्ष 2022 में जब भारत में नया सूरज उदय होगा तब इंडियन हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री अपने अस्तित्व के लिए प्रार्थना कर रहा होगा। हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री देश में कोरोना वायरस महामारी के प्रभाव से पुनरुद्धार के रूप में सरकार से समर्थन की उम्मीद लगाए बैठा है। आने वाले दो वर्ष इस इंडस्ट्री के लिए कठिन यात्रा होगी। उद्योग को 2021 के अंत में एक टिमटिमाती रोशनी दिखाई देने लगी थी, लेकिन कोरोना वायरस के नए ओमिक्रॉन का प्रसार और बाद में 31 जनवरी, 2022 तक अंतरराष्ट्रीय यात्री उड़ानों के निलंबन का विस्तार आ गया है इससे यह उन लोगों को झटका लगा है जो सर्दियों के मौसम में कुछ व्यवसाय करना चाहते थे।

महामारी के बीच आने वाले पर्यटकों के आगमन की संभावना के साथ उद्योग चाहता है कि सरकार सीमित अवधि के लिए आयकर लाभ के साथ घरेलू यात्रा को प्रोत्साहित करे ताकि आतिथ्य और पर्यटन क्षेत्र को फिर से संभलने में मदद मिल सके। उद्योग निकाय फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FHRAI) के अनुसार, पहले से ही संगठित क्षेत्र में लगभग 60,000 होटल और 5 लाख रेस्तरां में 25 से 30 प्रतिशत प्रतिष्ठान पहले ही दुकान बंद कर चुके हैं।

FHRAI के उपाध्यक्ष गुरबख्श सिंह कोहली ने कहा फिलहाल, हम पुनरुद्धार के बारे में बात नहीं कर रहे हैं, क्योंकि मुझे नहीं लगता कि हमें ऐसा करना चाहिए। हम पुनर्जीवित नहीं हो सकते। पुनरुद्धार तब होता है जब आप किसी ऐसी चीज को वापस लाते हैं जो चली गई हो। हॉस्पिटैलिटी उद्योग ऐसा व्यवहार करता है जैसे अगर किसी होटल के कमरे या टेबल बुकिंग को किसी विशेष दिन नहीं बेचा जा सकता है, तो 'यह हमेशा के लिए चला गया है।'

कोहली ने कहा, इसलिए पुनरुद्धार का सवाल ही नहीं है। पहले आपको जीवित रहने की जरूरत है। हमारा खोया हुआ व्यवसाय हमेशा के लिए खो गया है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने आकस्मिक और कार्यशील पूंजी खर्चों को पूरा करने के लिए नकदी का विस्तार और विकास के लिए रखे अपने धन का उपयोग किया है और अब वह भी समाप्त हो रहा है। कोहली ने कहा कि नंबर एक प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि उद्योग को और नीचे जाने से कैसे बचाया जाए क्योंकि न तो सरकार और न ही सरकार बिरादरी इसे होने देने का जोखिम उठा सकती है।

Edited By: Nitesh