नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। केंद्र सरकार ने शनिवार को घरेलू कच्चे तेल के उत्पादन और डीजल के निर्यात पर लगने वाले विंडफाल टैक्स को कम करने एलान किया। यह फैसला ऐसे समय पर जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्था मंदी की आहट के चलते कच्चे तेल की कीमत में बड़ी गिरावट आ रही है और यह अपने छह महीनों के निचले स्तर के आसपास बना हुआ है।

विंडफाल टैक्स पर हुई छठवीं समीक्षा बैठक में सरकार ने घरेलू कच्चे तेल के उत्पादन पर विंडफाल टैक्स 10,500 रुपये से घटाकर 8,000 रुपये प्रति टन कर दिया है। वहीं, डीजल के निर्यात पर अब निर्यात शुल्क को 10 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 5 रुपये प्रति लीटर कर दिया है। विमानों में उपयोग होने वाले ईंधन एयर टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर टैक्स 5 रुपये प्रति लीटर से घटाकर शून्य कर दिया है।

इन कंपनियों को मिलेगा फायदा

सरकार की ओर से विंडफाल टैक्स में कमी का फायदा घरेलू कच्चे तेल उत्पादन करने वाली कंपनियों जैसे ओएनजीसी एवं वेदांता लिमिटेड और पेट्रोल-डीजल निर्यात करने वाली कंपनियां जैसे रिलायंस इंडस्ट्रीज और नायरा एनर्जी को मिलेगा।

क्यों लगा था विंडफाल टैक्स?

केंद्र सरकार ने इस साल 1 जुलाई को तेल उत्पादक और रिफाइनिंग कंपनियों पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ी हुई कीमतों के कारण हो रहे अनुचित लाभ को कम करने के लिए विंडफाल टैक्स लगाया था। उस समय सरकार ने पेट्रोल और एटीएफ के निर्यात पर 6 रुपये प्रति लीटर और डीजल के निर्यात पर 13 रुपये प्रति लीटर निर्यात शुल्क लगाया था। इसके साथ ही सरकार ने घरेलू कच्चे तेल के उत्पादन पर 23,250 रुपये प्रति टन विंडफाल टैक्स लगाने का फैसला किया था।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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Edited By: Abhinav Shalya

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