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    ये शख्स है भारत का क्रेन किंग, हुनर ऐसा कि कहीं भी बना कर खड़ा कर देता है विशालकाय मशीन

    Updated: Mon, 05 Jan 2026 08:00 PM (IST)

    विजय अग्रवाल ने 47 साल की उम्र में बिना पूंजी के ACE की स्थापना कर भारत को क्रेन निर्माण में आत्मनिर्भर बनाया। उनकी पत्नी मोना अग्रवाल के समर्थन और का ...और पढ़ें

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    नई दिल्ली। भारत के औद्योगिक इतिहास में कुछ नाम ऐसे होते हैं जो सिर्फ कंपनियां नहीं बनाते, बल्कि पूरी इंडस्ट्री की दिशा बदल देते हैं। उन्हीं में से एक विजय अग्रवाल हैं। जिन्होंने भारत को क्रेन निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया।
    करीब 30 साल पहले, 47 वर्ष की उम्र में, जब ज्यादातर लोग सुरक्षित भविष्य की ओर देख रहे होते हैं तब विजय अग्रवाल ने जीवन का सबसे बड़ा जोखिम उठाया। उनके पास तब न पूंजी थी, न सुविधाएं थी। जो था वह सिर्फ अनुभव, आत्मविश्वास और मशीनों से अटूट प्रेम था। एक उजाड़ जमीन, खुले आसमान के नीचे, उन्होंने अपनी पहली क्रेन बनानी शुरू की।

    लगभग 600 छोटे-बड़े पार्ट्स को जोड़कर, महीनों की मेहनत के बाद पहली क्रेन तैयार हुई। यही वह क्षण था, जब भारत की सबसे बड़ी क्रेन कंपनी एक्शन कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट (ACE) की नींव पड़ी।

    विजय अग्रवाल हमेशा कहते हैं कि ''मैं सड़क के बीच में भी क्रेन बना सकता हूं।'' यह वह किसी घमंड में नहीं, बल्कि अपने कौशल पर भरोसा करते हुए बोलते हैं। उनके लिए हाथों से काम करना ही असली शिक्षा थी। उन्होंने दिन-रात काम करते हुए जो हुनर विकसित किया, वही समय के साथ उनके लिए कला में बदल गया।

    इस साहसिक सफर में उनकी सबसे बड़ी ताकत उनकी जीवनसाथी मोना अग्रवाल बनीं। जब आर्थिक हालात कठिन थे, बच्चों की पढ़ाई और बूढ़े माता-पिता की जिम्मेदारी थी, तब मोना ने बिना किसी शर्त उनका साथ दिया। मोना अग्रवाल ने कहा था कि, ''छह महीने तक मैं पैसे नहीं मांगूंगी, परिवार संभाल लूंगी तुम अपना सपना पूरा करो।'' इस तरह इस सफलता में उनकी पत्नी ने भी साथ दिया।

    कैसे कानूनी लड़ाइयों से नहीं मानी हार?

    ACE की शुरुआत आसान नहीं थी। बड़ी कंपनियों ने कानूनी लड़ाइयां लड़ीं, दबाव बनाया, लेकिन विजय अग्रवाल झुके नहीं। यही जज्बा ACE को लगातार आगे ले जाता रहा। कानूनी लड़ाइयों के बीच भी उत्पादन नहीं रुका और यहीं से ACE ने बाजार में बढ़त बनानी शुरू की।

    टावर क्रेन क्रांति

    जब भारत टावर क्रेन आयात करने पर करोड़ों खर्च कर रहा था, ACE ने आयात की आधी कीमत पर देश में ही टावर क्रेन बनाई। इससे निर्माण उद्योग में क्रांति आ गई। आज ACE टावर क्रेन सेगमेंट में देश की सबसे बड़ी कंपनी है और 37 देशों में उसके उत्पाद इस्तेमाल हो रहे हैं। विजय अग्रवाल ने बैंकों और NBFCs को प्रेरित कर उन्होंने क्रेन ऑपरेटर्स को लोन दिलवाया।

    विजय अग्रवाल की कितनी है नेटवर्थ

    एक्शन कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट के फाउंडर विजय अग्रवाल की नेटवर्थ 1 बिलियन डॉलर (करीब 9031 करोड़ रुपये) है। वह इस कंपनी के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक हैं, जो हाइड्रोलिक मोबाइल क्रेन, टावर क्रेन, लोडर, ट्रैक्टर और कृषि हार्वेस्टर बनाती है। उनकी पत्नी मोना और बेटे सोराब उनके साथ काम करते हैं और बोर्ड में सदस्य हैं।
    एक्शन के ग्राहकों की लिस्ट में टाटा समूह, इंजीनियरिंग क्षेत्र की दिग्गज कंपनी लार्सन एंड टुब्रो और अरबपति आनंद महिंद्रा का महिंद्रा समूह शामिल हैं।

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