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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 28, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

लोन के लिए करना चाहते हैं अप्लाई? जानिए कितना सिबिल स्कोर बैंक कर्ज के लिए है सही?

Published: Mon, 28 Apr 2025 12:44 PM (IST)

Ideal Cibil Score For Loan एक बेहतर सिबिल स्कोर या क्रेडिट स्कोर (Credit Score or Cibil Score) आपको सस्ता लोन ...और पढ़ें

कितना सिबिल स्कोर माना जाता है सही?
कितना सिबिल स्कोर माना जाता है सही?

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। बैंक किसी भी व्यक्ति को उधार देने से पहले उसकी उधार लौटाने की क्षमता जांचते हैं। इसका सबसे आसान जरिया आवेदक का क्रेडिट स्कोर होता है। इसे बोलचाल की भाषा में सिबिल स्कोर भी कहा जाता है। ये स्कोर आपके लोन या उधार देने की क्षमता को दर्शाता है। अगर आपका सिबिल स्कोर अच्छा है, तो बैंक से लोन ब्याज दर पर मोल भाव कर सकते हैं।

वहीं कई बैंक सिबिल स्कोर बेहतर होने पर कई बेनिफिट देता है। इसके साथ ही क्रेडिट स्कोर के जरिए क्रेडिट कार्ड से जुड़े लाभ का फायदा भी उठाया जा सकता हैं।

कितना क्रेडिट स्कोर है सही?

सिबिल स्कोर से जुड़े आंकड़े IIFL Finance से लिए गए हैं।

आप सिबिल की वेबसाइट और यूपीआई ऐप के जरिए सिबिल स्कोर चेक कर सकते हैं। एक साल में कम से कम दो से तीन बार तक सिबिल स्कोर चेक करना सही रहता है।

300 से 549- अगर किसी व्यक्ति का सिबिल स्कोर 300 से 549 के बीच होता है। तो इसे लोन मिलने या क्रेडिट कार्ड लेने में दिक्कत आ सकती है। एक लो रेंज सिबिल स्कोर ये दर्शाता है कि आपने लोन का ईएमआई या क्रेडिट कार्ड बिल समय पर नहीं भरा है।

549 से 649- ये रेंज बैंक या वित्तीय संस्थान की नजर में ठीक मानी जाती है। हालांकि इस रेंज पर बैंक से ब्याज दर के लिए मोल भाव करना मुश्किल है। वहीं आपको फाइनेंशियल इंस्टीट्यूट से ज्यादा ब्याज दर पर लोन मिलता है। क्रेडिट कार्ड से जुड़े फायदे भी कम मिलते हैं।

650-749- इसे अच्छा क्रेडिट स्कोर माना जाता है। जो दिखता है कि आपने ईएमआई या क्रेडिट बिल समय पर भरा होगा। हालांकि 650 से 749 क्रेडिट स्कोर रखने वालो को इससे बेहतर करने पर जोर देना चाहिए।

750 से 900- इसे सबसे अच्छा क्रेडिट स्कोर माना जाता है। ऐसे व्यक्तियों को लोन मिलने में कोई परेशानी नहीं होती। वहीं क्रेडिट कार्ड से जुड़े कई फायदे मिल जाते हैं। आप बैंक से ब्याज दर मोल भाव कर सकते हैं। हालांकि ये बैंक या वित्तीय संस्थानों के नियम पर आधारित होगा कि वे कम ब्याज दर पर लोन देंगे या नहीं।

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