सर्च करे
Home
फोकस
विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

साउथ अफ्रीका में वेदांता का धमाका! अनिल अग्रवाल ने किया दशकों का सबसे बड़ा माइनिंग निवेश; डबल स्पीड से निकालेंगे जिंक

Published: Sun, 18 Oct 2026 03:21 PM (IST)

अरबपति अनिल अग्रवाल की वेदांता ने दक्षिण अफ्रीका के गैम्सबर्ग प्रोजेक्ट में 600 मिलियन डॉलर का निवेश कर अपनी सालाना ...और पढ़ें

अनिल अग्रवाल का नया कमाल (AI फोटो)

अनिल अग्रवाल का नया कमाल (AI फोटो)

HighLights

  1. वेदांता ने गैम्सबर्ग में 600 मिलियन डॉलर का निवेश किया

  2. दक्षिण अफ्रीका में जिंक उत्पादन क्षमता दोगुनी होकर 500,000 टन हुई

  3. यह वैश्विक 3 मिलियन टन जिंक लक्ष्य का हिस्सा है

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। अरबपति कारोबारी अनिल अग्रवाल (Anil Agarwal News) की वेदांता ने रविवार को बताया कि वेदांता लिमिटेड ने अपने गैम्सबर्ग प्रोजेक्ट के दूसरे फेज में लगभग 600 मिलियन डॉलर का निवेश करके दक्षिण अफ्रीका में अपनी सालाना जिंक उत्पादन क्षमता को दोगुना कर 500,000 टन कर दिया है।
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा और वेदांता की डायरेक्टर प्रिया अग्रवाल-हेब्बर ने नॉर्दर्न केप प्रांत के गैम्सबर्ग में इस बढ़ी हुई क्षमता का उद्घाटन किया। यह विस्तार वेदांता के उस बड़े प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जिसके तहत कंपनी भारत और दक्षिण अफ्रीका को मिलाकर सालाना 3 मिलियन टन जिंक का उत्पादन करना चाहती है।

सबसे बड़े माइनिंग निवेशों में से एक

वेदांता का लक्ष्य अपनी सब्सिडियरी कंपनी हिंदुस्तान जिंक (जो दुनिया की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड जिंक उत्पादक कंपनी है) के जरिए सालाना 2 मिलियन टन जिंक का उत्पादन करना है, जबकि वेदांता जिंक इंटरनेशनल का टारगेट सालाना 1 मिलियन टन का योगदान देना है।
गैम्सबर्ग, वेदांता जिंक इंटरनेशनल की प्रमुख जिंक खदान है, जो दक्षिण अफ्रीका के नॉर्दर्न केप प्रोविंस में है। वेदांता ने इस क्षमता विस्तार को इस दशक में दक्षिण अफ्रीका में किए गए सबसे बड़े माइनिंग निवेशों में से एक बताया है।

क्या बोले साउथ अफ्रीकी राष्ट्रपति?

वेदांता का ये निवेश उस 21 बिलियन दक्षिण अफ्रीकी रैंड (लगभग 1.5 बिलियन डॉलर) के वादे का हिस्सा है, जो वेदांता ने 2018 के 'दक्षिण अफ्रीका निवेश सम्मेलन' (South Africa Investment Conference) में किया था।
राष्ट्रपति रामफोसा ने कहा, "हम एक ऐसे निवेश का जश्न मनाने आए हैं, जो वादे से निर्माण तक और निर्माण से उत्पादन तक पहुंचा है। हम नॉर्दर्न केप में जिंक स्मेल्टिंग क्षमता स्थापित करने की वेदांता की महत्वाकांक्षा का स्वागत करते हैं। सरकार को वेदांता और अन्य साझेदारों के साथ मिलकर काम करना चाहिए ताकि उनकी जरूरतों को पूरा किया जा सके।"

जिंक का इस्तेमाल

जिंक का इस्तेमाल गैल्वनाइजेशन में किया जाता है, जिससे स्टील को जंग लगने से बचाया जा सकता है। इसका उपयोग निर्माण, ऑटोमोटिव और विनिर्माण उद्योगों में होता है। वेदांता ने कहा कि इस विस्तार से वैश्विक स्तर पर जिंक की बढ़ती मांग को पूरा करने की उसकी क्षमता और मजबूत होगी।

प्रिया अग्रवाल-हेब्बार ने कहा, "वेदांता के लिए, गैम्सबर्ग फेज़ II सिर्फ उसके जिंक कारोबार का विस्तार नहीं है, बल्कि यह दक्षिण अफ्रीका के भविष्य के प्रति एक प्रतिबद्धता है। मेरे पिता, वेदांता के संस्थापक और चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने यह प्रतिबद्धता इस विश्वास के साथ की थी कि देश की खनिज संपदा औद्योगिक विकास, रोज़गार और अवसरों का आधार बन सकती है। आज, मुझे यह देखकर गर्व हो रहा है कि वह विज़न साकार हो रहा है। हमारा लक्ष्य इस क्षेत्र में एक ऐसा जिंक और औद्योगिक हब बनाना है, जो वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण हो और जिससे देश और यहाँ के लोगों के लिए दीर्घकालिक मूल्य पैदा हो सके। हमारी सफलता का असली पैमाना सिर्फ यह नहीं है कि हम क्या उत्पादन करते हैं, बल्कि यह है कि हम आने वाली पीढ़ियों के लिए कितनी समृद्धि लाने में मदद करते हैं।"

2 करोड़ डॉलर का निवेश

वेदांता ने यह भी बताया कि 2011 में 'वेदांता जिंक इंटरनेशनल' का अधिग्रहण करने के बाद से, उसने दक्षिण अफ्रीका में सामुदायिक पहलों पर लगभग 2 करोड़ डॉलर (20 मिलियन डॉलर) का निवेश किया है। इन पहलों में स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, खेल, आजीविका, बुनियादी ढांचा और सामाजिक कल्याण शामिल हैं, जिनसे हर साल 32,000 से ज़्यादा लोगों को लाभ मिलता है। कंपनी ने बताया कि 'वेदांता जिंक इंटरनेशनल' ने इस साल की शुरुआत में नामाक्वा में एक ऑन्कोलॉजी (कैंसर उपचार) केंद्र खोला है।

ये भी पढ़ें - कैशियर से उद्योगपति बनने का अनोखा सफर: ऐसे गूजरमल मोदी ने बसाया ऐतिहासिक मोदीपुरम! मोदीनगर जैसा है रोचक इतिहास