सर्च करे
Home
फोकस
विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

अमेरिका-ईरान तनाव का असर: US फेड ने नहीं किया ब्याज दरों में बदलाव, तेल की ऊंची कीमतों ने बढ़ाई चिंता

Published: Thu, 30 Apr 2026 07:48 AM (IST)

यूएस फेडरल रिजर्व ने अप्रैल की बैठक में ब्याज दरों को 3.5% से 3.75% पर अपरिवर्तित रखा, जिसका मुख्य कारण ...और पढ़ें

यूएस फेड ने ब्याज दरों में नहीं किया बदलाव

यूएस फेड ने ब्याज दरों में नहीं किया बदलाव

HighLights

  1. यूएस फेड ने अप्रैल में ब्याज दरें स्थिर रखीं

  2. बढ़ती वैश्विक ऊर्जा कीमतें मुद्रास्फीति का मुख्य कारण

  3. जेरोम पॉवेल का चेयरमैन के रूप में अंतिम निर्णय

नई दिल्ली। यूएस फेडरल रिजर्व के पॉलिसी मेकर्स ने अप्रैल मीटिंग में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया। उन्होंने बेंचमार्क दर को 3.5% से 3.75% की रेंज में बनाए रखने का विकल्प चुना। इसके पीछे बढ़ती वैश्विक ऊर्जा कीमतों को देखते हुए महंगाई बढ़ने के जोखिमों का हवाला दिया गया। माना जा रहा है कि ये जेरोम पॉवेल की लीडरशिप में लिया गया आखिरी फैसला है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस बार दरों में कोई बदलाव न करने का फैसला फेड अधिकारियों के बीच कुछ गहमागहमी के साथ लिया गया, जिसमें चार असहमति वाले वोट पड़े। ऐसा 1992 के बाद पहली बार हुआ है।

मिडिल ईस्ट को लेकर चिंता

US Fed की फेडरल ओपन मार्केट कमिटी (FOMC) ने कहा, "मध्य पूर्व में हो रहे घटनाक्रम इकोनॉमिक आउटलुक को लेकर काफी ज्यादा अनिश्चितता पैदा कर रहे हैं। अपने लक्ष्यों को पूरा करने के लिए, कमिटी ने फेडरल फंड रेट की टार्गेट रेंज को 3.5 से 3.75 प्रतिशत पर ही बनाए रखने का फ़ैसला किया है"।
मीटिंग के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में पॉवेल ने कहा कि 15 मई को उनका चेयरमैनशिप का कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी, वे फेड बोर्ड में बने रहेंगे और सेंट्रल बैंक के गवर्नर के तौर पर काम करेंगे। पॉवेल ने कहा कि वे फेड में इसलिए बने रहेंगे, क्योंकि उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई है।

रोजगार में बढ़ोतरी हुई कम

यूएस फेड के अनुसार "हाल के संकेत बताते हैं कि आर्थिक गतिविधियाँ एक मजबूत गति से बढ़ रही हैं। औसतन, रोजगार में बढ़ोतरी कम रही है, और हाल के महीनों में बेरोजगारी दर में बहुत कम बदलाव आया है। महँगाई बढ़ी हुई है, जो कुछ हद तक वैश्विक ऊर्जा कीमतों में हालिया बढ़ोतरी को दर्शाती है।"

और बढ़ सकती हैं दरें

अमेरिका-ईरान युद्ध की वजह से तेल की बढ़ती कीमतों ने यूएस फेड की पॉलिसी के नजरिए में एक नई मुश्किल खड़ी कर दी है। दो दिन की मीटिंग से पहले, अधिकारियों ने इस बात पर चिंता जताई थी कि एनर्जी की ऊंची कीमतें शायद सिर्फ एक कुछ समय का झटका न रहें, बल्कि इसकी जगह वे बड़े पैमाने पर महंगाई को और बढ़ा सकती हैं।
अगर ऐसा होता है, तो ब्याज दरें पहले के अनुमान से ज्यादा समय तक ऊँची बनी रह सकती हैं - या, और भी बुरे हालात में, वे और भी ज्यादा बढ़ सकती हैं।

ये भी पढ़ें - OPEC को छोड़ने वाला UAE कच्चे तेल का कितना बड़ा उत्पादक, कहां-कहां बेचता है तेल; भारत दूसरा सबसे बड़ा खरीदार

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।