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    भारत में बेरोजगारी पर सामने आया नया सर्वे, जानें क्या कहते हैं आंकड़े

    By Lakshya KumarEdited By:
    Updated: Wed, 23 Mar 2022 12:27 PM (IST)

    राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने जुलाई-सितंबर 2021 का आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण जारी किया है। इसके अनुसार अवधि के दौरान शहरी क्षेत्रों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों की बेरोजगारी दर घटकर 9.8 प्रतिशत हो गई।

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    भारत में बेरोजगारी पर सामने आया नया सर्वे, जानें क्या कहते हैं आंकड़े

    नई दिल्ली, पीटीआइ। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा किए गए आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण के अनुसार, भारत में शहरी क्षेत्रों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों के लिए बेरोजगारी दर जुलाई-सितंबर 2021 के दौरान घटकर 9.8 प्रतिशत हो गई, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 13.2 प्रतिशत थी। जुलाई-सितंबर 2020 में मुख्य रूप से देश में लॉकडाउन प्रतिबंधों के चौंका देने वाले प्रभाव के कारण बेरोजगारी अधिक थी, जिन्हें घातक कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए लगाया गया था। बेरोजगारी या बेरोजगारी दर को श्रम बल में बेरोजगार व्यक्तियों के प्रतिशत के रूप में परिभाषित किया गया है।

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    12वें पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) के अनुसार, अप्रैल-जून 2021 में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों की बेरोजगारी दर शहरी क्षेत्रों में 12.6 प्रतिशत थी। सर्वे के मुताबिक, शहरी क्षेत्रों में महिलाओं (15 वर्ष और उससे अधिक आयु) की बेरोजगारी दर भी जुलाई-सितंबर 2021 में घटकर 11.6 प्रतिशत हो गई, जो एक साल पहले 15.8 प्रतिशत थी। अप्रैल-जून 2021 में यह 14.3 फीसदी थी। शहरी क्षेत्र में पुरुषों की बेरोजगारी दर भी जुलाई-सितंबर 2021 में घटकर 9.3 प्रतिशत हो गई, जो एक साल पहले 12.6 प्रतिशत थी। अप्रैल-जून 2021 में यह 12.2 फीसदी थी।

    शहरी क्षेत्रों में सीडब्ल्यूएस (वर्तमान साप्ताहिक स्थिति) में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए श्रम बल भागीदारी दर 2021 की जुलाई-सितंबर तिमाही में घटकर 46.9 प्रतिशत हो गई, जो एक साल पहले इसी अवधि में 47.2 प्रतिशत थी। अप्रैल-जून 2021 में यह 46.8 फीसदी था। बता दें कि एनएसओ ने अप्रैल 2017 में पीएलएफएस लॉन्च किया था। 

    पीएलएफएस के आधार पर श्रम बल संकेतकों, जैसे- बेरोजगारी दर, श्रमिक जनसंख्या अनुपात (WPR), श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) और वर्तमान साप्ताहिक स्थिति (सीडब्ल्यूएस) में रोजगार तथा उद्योग में व्यापक स्थिति के आधार पर श्रमिकों के वितरण का अनुमान देते हुए एक त्रैमासिक बुलेटिन जारी किया जाता है।