1 जनवरी से कॉलिंग और इंटरनेट की क्वालिटी होगी सुपरफास्ट! TRAI ने बदले दूरसंचार इंटरकनेक्शन नियम; क्या-क्या बदलेगा?
TRAI telecom rules: भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने 'दूरसंचार इंटरकनेक्शन (तीसरा संशोधन) विनियम, 2026' जारी किए हैं, जो 1 ...और पढ़ें
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TRAI के नए नियम: 1 जनवरी 2027 से कॉलिंग और इंटरनेट होगा सुपरफास्ट, जानें क्या बदलेगा
HighLights
1 जनवरी 2027 से लागू होंगे नए इंटरकनेक्शन नियम।
कॉलिंग और इंटरनेट की गुणवत्ता में होगा सुधार।
आईपी-आधारित नेटवर्क और एलएसए स्तर पर शिफ्ट होगा ट्रैफिक।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| कॉलिंग और इंटरनेट यूजर्स के लिए बड़ी खबर है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने देश की टेलीकॉम व्यवस्था को और अधिक आधुनिक, पारदर्शी और तेज बनाने के लिए 'दूरसंचार इंटरकनेक्शन (तीसरा संशोधन) विनियम, 2026' आधिकारिक रूप से जारी कर दिए हैं। ट्राई के ये नए और संशोधित नियम आने वाली 1 जनवरी 2027 से पूरे देश में लागू हो जाएंगे।
क्या होता है इंटरकनेक्शन और क्यों पड़े बदलाव की जरूरत?
टेलीकॉम की भाषा में इंटरकनेक्शन का मतलब उन तकनीकी और कमर्शियल व्यवस्थाओं से होता है, जिनकी मदद से दो या दो से अधिक अलग-अलग दूरसंचार नेटवर्क आपस में जुड़ते हैं। इसी व्यवस्था के कारण अलग-अलग कंपनियों या सेवा प्रदाताओं (जैसे जियो, एयरटेल, Vi आदि) के ग्राहक आपस में बिना किसी रुकावट के बातचीत और डेटा का आदान-प्रदान कर पाते हैं।
ट्राई के इस नए संशोधन का मुख्य उद्देश्य देश के मौजूदा इंटरकनेक्शन ढांचे को आधुनिक नेटवर्क तकनीकों के अनुकूल बनाना है।
नए नियमों की 5 मुख्य बातें और बड़े बदलाव
1. एलएसए स्तर पर शिफ्ट होगा ट्रैफिक: अभी तक कॉलिंग और डेटा का ट्रैफिक लॉन्ग डिस्टेंस चार्जिंग एरिया (LDCA) और शॉर्ट डिस्टेंस चार्जिंग एरिया (SDCA) स्तर के पॉइंट्स ऑफ इंटरकनेक्शन (POI) पर होता था। अब इसे बदलकर लाइसेंस प्राप्त सेवा क्षेत्र (LSA) स्तर के पीओआई पर स्थानांतरित किया जाएगा।
इस बदलाव से रूटिंग प्रक्रिया काफी सरल हो जाएगी, नेटवर्क पर लोड घटेगा, कॉल लेटेंसी (देरी) कम होगी और उपभोक्ताओं को बेहतर व विश्वसनीय सेवा मिलेगी। मौजूदा एलडीसीए/एसडीसीए ट्रैफिक को अगले तीन वर्षों के भीतर चरणबद्ध तरीके से एलएसए स्तर पर पूरी तरह शिफ्ट कर दिया जाएगा।
2. पारंपरिक तकनीक से आईपी (IP) आधारित नेटवर्क की ओर कदम: ट्राई के इन नए नियमों के तहत भविष्य में स्थापित होने वाले सभी नए इंटरकनेक्शन पूरी तरह से इंटरनेट प्रोटोकॉल (IP) आधारित होंगे। जो पुराने पीओआई ई1/टीडीएम (E1/TDM) तकनीक पर काम कर रहे हैं, उन्हें भी अगले तीन साल के भीतर चरणबद्ध तरीके से आईपी आधारित तकनीक में बदल दिया जाएगा।
आईपी आधारित होने से बैंडविड्थ का इस्तेमाल बेहतर तरीके से होगा और कॉल की क्वालिटी शुरू से अंत तक क्रिस्टल क्लियर व शानदार मिलेगी।
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3. पीओआई सरेंडर करने का नया और आसान नियम: नियमों में पहली बार ऑपरेटरों के लिए स्वेच्छा से पीओआई 'सरेंडर' करने का एक स्पष्ट ढांचा तैयार किया गया है। पहले केवल 'डिस्कनेक्ट' (आपसी विवाद या ट्रैफिक बंद होने पर) करने का ही प्रावधान था। अब ट्रैफिक घटने, किसी क्षेत्र से बिजनेस समेटने या रूटिंग बदलने की स्थिति में कंपनियां कानूनी और वित्तीय रूप से आसानी से पीओआई सरेंडर कर सकेंगी।
4. ब्याज और बैंक गारंटी के कड़े प्रावधान: यदि कोई ऑपरेटर इंटरकनेक्शन उपयोग शुल्क (IUC) के भुगतान में देरी करता है, तो उसके लिए भी नियम तय कर दिए गए हैं। आपसी सहमति से तय होने वाली ब्याज दर किसी भी स्थिति में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की एक वर्षीय एमसीएलआर (MCLR) से 2 प्रतिशत अधिक की सीमा को पार नहीं कर सकेगी। इसके अलावा बैंक गारंटी के पुनर्मूल्यांकन की अवधि को 6 महीने से बढ़ाकर 12 महीने कर दिया गया है।
5. उल्लंघन पर सख्त वित्तीय दंड: नियमों का पालन सख्ती से हो, इसके लिए ट्राई ने रिपोर्टिंग आवश्यकताओं के साथ-साथ उल्लंघनों की गंभीरता के आधार पर एक चरणबद्ध वित्तीय जुर्माने (Financial Penalty) का कड़ा ढांचा भी तय किया है।
इन तमाम बदलावों का सीधा फायदा आने वाले समय में टेलीकॉम उपभोक्ताओं को बेहतर कॉल ड्रॉप-फ्री और हाई-स्पीड कनेक्टिविटी के रूप में मिलने की उम्मीद है।
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