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पिता कानपुर की गलियों में बेचते थे साबुन, बेटों ने 'घड़ी' से बदली किस्मत और खड़ा कर दिया 15 हजार करोड़ का साम्राज्य

Published: Tue, 13 Oct 2026 07:02 PM (IST)Updated: Tue, 13 Oct 2026 07:07 PM (IST)

कानपुर के ज्ञानचंदानी भाइयों ने अपने पिता के साबुन व्यवसाय को आगे बढ़ाते हुए 'घड़ी डिटर्जेंट' की स्थापना की। 'पहले ...और पढ़ें

'घड़ी डिटर्जेंट' 1988 में 'पहले इस्तेमाल करें, फिर विश्वास करें' स्लोगन के साथ लॉन्च हुआ था।

'घड़ी डिटर्जेंट' 1988 में 'पहले इस्तेमाल करें, फिर विश्वास करें' स्लोगन के साथ लॉन्च हुआ था।

HighLights

  1. ज्ञानचंदानी भाइयों ने पिता के साबुन व्यवसाय को बढ़ाया।

  2. 'घड़ी डिटर्जेंट' 1988 में 'पहले इस्तेमाल करें, फिर विश्वास करें' नारे से लॉन्च।

  3. रणनीतिक वितरण और कमीशन से बना 15,000 करोड़ का साम्राज्य।

बिजनेस डेस्क नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश का शहर कानपुर लेदर के लिए जाना जाता है। इस शहर ने देश को एक एस एक नामी बिजनेसमैन दिए हैं। गंगा नदी के तट पर बसा ये शहर आज भी उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान देता है। इसी शहर में एक ऐसा ग्रुप का है जिसकी शुरुआत दो भाइयों ने मिलकर की थी। और आज इनका पूरे भारत में बोलबाला है। कहानी है 'घड़ी' की। समय बताने वाली घड़ी नहीं, बल्कि दो भाइयों का समय बदलने वाली घड़ी की है।

अगर आप यूपी से हैं या फिर कानपुर के आसपास जिले से हैं तो अब तक आपने अंदाजा जरूर लगा लिया होगा कि हम किसी समूह की बात कर रहे हैं। अगर अब तक भी आप अंदाजा नहीं लगा पाए हैं तो एक स्लोगन पढ़कर आप जान जाएंगे कि हम किस समूह की बात कर रहे हैं। ये स्लोगन है- पहले इस्तेमाल करें, फिर विश्वास करें। जी हां यह स्लोगन है RSPL समूह के ब्रांड घड़ी डिटर्जेंट का।

आपने टीवी पर या फिर मोबाइल पर इसका एड जरूर देखा होगा। अमिताभ बच्चने ने भी इसका एड किया है। आइए विस्तार से जानते हैं कि आखिर कैसे कानपुर के दो भाइयों ने पिता के ग्लिसरीन वाले साबुन बिजनेस को आगे बढ़ाने के लिए घड़ी डिटर्जेंट खड़ा किया और 15 हजार करोड़ रुपये से अधिक का साम्राज्य खड़ा कर दिया।

1970 में पिता ने रखी थी नींव

घड़ी डिटर्जेंट बनाने वाली कंपनी RSPL ग्रुप की शुरुआत 1970 में ही हो चुकी थी। जब स्वर्गीय दयाल दास ने ऑयल सोप (तेल-आधारित साबुन) बनाने और बेचने का काम शुरू किया था। ग्लिसरीन से बने साबुन को बेचना आसान नहीं थी।

मार्केट में पहले से ही बड़े-बड़े खिलाड़ी थी और इन खिलाड़ियों के बीच ग्लिसरीन से बने साबुन को घर-घर में पहुंचाना आसान नहीं थी। दयाल दास अपने दोनों बेटों मुरलीधर ज्ञानचंदानी और बिमल ज्ञानचंदानी के साथ व्यापार करते रहे। साबुन की घर-घर डिलीवरी भी करते रहे। लेकिन मुनाफा नहीं हो पा रहा था।

1988 में आया- पहले इस्तेमाल करें फिर विश्वास करें

मुरलीधर ज्ञानचंदानी और बिमल ज्ञानचंदानी के सामने कई प्रकार की समस्याएं आ रही थी। लेकिन दोनों भाइयों ने हार नहीं मानी। देखते-देखते 1988 का साल आ गया और फिर दोनों भाइयों ने पिता के साथ मिलकर बाजार में नया डिटर्डेंट उतार दिया।

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मार्केट में अपना डिटर्जेंट उतारने के साथ मुरलीधर ज्ञानचंदानी और बिमल ज्ञानचंदानी ने एक ऐसी टैगलाइन दी, जो लोगों को भा गई। टैगलाइन थी- पहले इस्तेमाल करें, फिर विश्वास करें।

कमीशन ज्यााद देकर मार्केट में बनाई पैठ

मुरलीधर ज्ञानचंदानी और बिमल ज्ञानचंदानी जानते थे कि जब दुकानदार को ज्यादा कमीशन दिया जाएगा तभी वह उनके प्रोडक्ट को कस्टमर के सामने रखेगा और उसे बेचेगा। इसलिए उन्होंने बाकी डिटर्जेंट के मुकाबले उन्होंने दुकानदारों को ज्यादा कमीशन दिया। धीरे-धीरे समय के साथ उनकी टैगलाइन पढ़कर लोग घड़ी खरीदकर इस्तेमाल करने लगे।

लोगों को रिजल्ट अच्छा मिल रहा था, जिससे घड़ी का कारोबार चल पड़। और बाकी डिटर्जेंट के मुकाबले उन्होंने दुकानदारों को ज्यादा कमीशन ने हर 200 से 400 किलोमीटर के बीच एक छोटा सा डिपो बना दिया, ताकि लॉजिस्टिक का खर्च कम हो और दुकानदार तक जल्द से जल्द उनका प्रोडक्ट पहुंच जाए।

15 हजार करोड़ रुपये का साम्राज्य

जो सफर एक छोटे से कमरे से शुरू हुआ था वह आज 15 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया। RSPL ग्रुप की वैल्यूएशन 15 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा बताई जाती है।

कंपनी की वेबसाइट पर मौजूद डेटा के अनुसार RSPL ग्रुप ने फाइनेंशियल ईयर 2023–24 में ₹5,902 करोड़ का टर्नओवर दर्ज किया, जो फाइनेंशियल ईयर 2014–15 के ₹4,001 करोड़ के मुकाबले काफी ज्यादा है। यह परफॉर्मेंस इस दौरान लगभग 4.5% की स्थिर कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) को दिखाती है। यह बढ़त कॉम्पिटिटिव बिज़नेस माहौल में ग्रुप की लगातार अच्छी परफॉर्मेंस और रणनीतिक ग्रोथ को दर्शाती है।

कितनी है मुरलीधर ज्ञानचंदानी और बिमल ज्ञानचंदानी की नेटवर्थ

हाल ही में हुरुन ने इंडिया के अरबपतियों की लिस्ट जारी की थी। इस लिस्ट में कानपुर के मुरलीधर ज्ञानचंदानी और बिमल ज्ञानचंदानी का भी नाम था। मुरलीधर ज्ञानचंदानी की नेटवर्थ 8800 करोड़ रुपये बताई जाती है। उनके भाई बिमल ज्ञानचंदानी की भी नेटवर्थ 10,500 करोड़ है।

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