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केन्या सरकार ने टाटा की जिस कंपनी को दिया था कारोबार समेटने का आदेश, अब भारत में उसे मिल गई बड़ी राहत

Published: Tue, 06 Oct 2026 03:59 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने कच्छ की खाड़ी में समुद्री नुकसान के आरोपों को लेकर टाटा केमिकल्स को सख्त कार्रवाई से राहत ...और पढ़ें

सुप्रीम कोर्ट ने टाटा केमिकल्स को कठोर कार्रवाई से राहत दी।

सुप्रीम कोर्ट ने टाटा केमिकल्स को कठोर कार्रवाई से राहत दी।

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट ने टाटा केमिकल्स को कठोर कार्रवाई से राहत दी।

  2. कच्छ की खाड़ी में समुद्री पर्यावरण नुकसान का आरोप है।

  3. गुजरात हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती मिली।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। सितंबर की शुरुआत में केन्या के राष्ट्रपति विलियम रूटो ने टाटा ग्रुप की टाटा केमिकल्स की सब्सिडियरी टाटा केमिकल्स मगाडी को कारोबार समेटने का आदेश दिया था। राष्ट्रपति ने आरोप लगाया था कि टाटा केमिकल्स ने उनके देश में विकास के नाम पर कुछ नहीं किया। अब टाटा केमिकल्स पर ही खबर है वो भी भारत से है।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने कच्छ की खाड़ी (Gulf of Kutch) में समुद्री नुकसान के आरोपों को लेकर टाटा केमिकल्स को सख्त कार्रवाई से राहत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को निर्देश दिया कि टाटा केमिकल्स के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई न की जाए, जब तक कि कोर्ट कच्छ की खाड़ी में एक समुद्री अभयारण्य को कथित पर्यावरणीय नुकसान से जुड़े गुजरात हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली कंपनी की याचिका पर विचार कर रहा है।

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने हाई कोर्ट के 25 मई के फैसले के खिलाफ टाटा केमिकल्स की याचिका पर नोटिस जारी किया। बेंच ने गुजरात सरकार से 2 नवंबर तक जवाब देने को कहा।

क्या है पूरा मामला

25 मई को हाई कोर्ट ने कंपनी की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उसने डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर के 2006 के आदेश को चुनौती दी थी। इस आदेश में समुद्र में गंदा पानी बहाने वाले खुले नालों के लिए इस्तेमाल होने वाली जमीन पर कंपनी के दावे को खारिज कर दिया गया था।

गुजरात हाई कोर्ट ने गुजरात पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (GPCB) से कहा है कि वह तीन महीने के अंदर ऐसे एक्सपर्ट्स को नियुक्त करे जो उस इलाके पर पर्यावरण पर पड़े असर का आकलन करें और सुधार के सही उपाय व मुआवजा तय करें।

इसने कंपनी के उस दावे को खारिज कर दिया जिसमें उसने अपनी मीठापुर फैसिलिटी में मौजूद पुराने खुले गंदे पानी के नालों पर पहले से अधिकार होने की बात कही थी, और पाया कि मरीन सैंक्चुअरी की सरकारी ज़मीन पर कब्जा किया गया है।

अब इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की और मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने गुजरात हाई कोर्ट के 25 मई के फैसले को चुनौती देने वाली कंपनी की याचिका पर नोटिस जारी किया।

कंपनी ने फाइलिंग में क्या कहा?

टाटा केमिकल्स ने अपनी फाइलिंग में कहा- "माननीय सुप्रीम कोर्ट ने 5 अक्टूबर, 2026 के अपने आदेश के जरिए गुजरात सरकार और अन्य लोगों को इस मामले में कंपनी के खिलाफ कोई भी सख्त कार्रवाई करने से रोक दिया है और गुजरात सरकार को नोटिस जारी करके उनसे जवाब मांगा है।"

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि कच्छ की खाड़ी में एक समुद्री अभयारण्य को कथित तौर पर हुए पर्यावरणीय नुकसान को लेकर टाटा केमिकल्स के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई न की जाए।

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