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टाटा संस की लिस्टिंग पर विवाद बढ़ा, वरिष्ठ ट्रस्टियों ने वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह पर लगाए गंभीर आरोप

By IANSEdited By: Gyanendra Tiwari
Published: Tue, 06 Oct 2026 02:57 PM (IST)

टाटा संस की संभावित लिस्टिंग को लेकर टाटा ट्रस्ट्स के भीतर मतभेद गहरा गए हैं। वरिष्ठ ट्रस्टियों ने वेणु श्रीनिवासन ...और पढ़ें

टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर ट्रस्ट्स में मतभेद।

टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर ट्रस्ट्स में मतभेद।

HighLights

  1. टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर ट्रस्ट्स में मतभेद।

  2. वरिष्ठ ट्रस्टियों ने दो साथी ट्रस्टियों पर आरोप लगाए।

  3. सार्वजनिक रूप से लिस्टिंग का समर्थन करने पर आपत्ति।

आईएएनएस, नई दिल्ली। टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस की संभावित लिस्टिंग को लेकर टाटा ट्रस्ट्स के भीतर मतभेद और गहरे होते दिखाई दे रहे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (एसडीटीटी) के वरिष्ठ ट्रस्टियों ने साथी ट्रस्टियों वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह पर बोर्ड के प्रस्तावों को कमजोर करने और अपने न्यासी दायित्वों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है।

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यह आरोप एक पत्र के माध्यम से सामने आया है, जिस पर नोएल एन. टाटा, डेरियस जे. खंबाटा, नेविल एन. टाटा और भास्कर भट्ट के हस्ताक्षर बताए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, यह घटनाक्रम टाटा ट्रस्ट्स के भीतर टाटा संस की स्वामित्व संरचना और उसकी लिस्टिंग की स्थिति को लेकर बढ़ते मतभेदों को दर्शाता है।

पत्र में कहा गया है कि टाटा संस को अनलिस्टेड बनाए रखना लंबे समय से टाटा ट्रस्ट्स और कंपनी दोनों की स्थापित और सहमति वाली नीति रही है। रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2024 में टाटा संस के बोर्ड ने सर्वसम्मति से कंपनी को अनलिस्टेड बनाए रखने का निर्णय लिया था।

इसके बाद जुलाई 2025 में सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टियों ने भी सर्वसम्मति से इस रुख को दोहराया था और इस मुद्दे पर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के साथ संवाद जारी रखने पर सहमति जताई थी।

वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह पर लगा ये आरोप

रिपोर्ट के अनुसार, वरिष्ठ ट्रस्टियों ने कहा है कि जुलाई 2025 के प्रस्तावों को कभी वापस नहीं लिया गया। उनका आरोप है कि वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह ने अपनी बदली हुई राय को ट्रस्टियों के समक्ष सामूहिक चर्चा के लिए रखने या पूर्व निर्णयों की पुनर्समीक्षा की मांग करने के बजाय सार्वजनिक रूप से लिस्टिंग का समर्थन किया।

पत्र में कहा गया है कि इस तरह के सार्वजनिक बयान न केवल ट्रस्ट्स के आधिकारिक निर्णयों को कमजोर करते हैं, बल्कि टाटा संस की आरबीआई के समक्ष लंबित प्रक्रियाओं और आवेदनों को भी प्रभावित कर सकते हैं।

वरिष्ठ ट्रस्टियों ने 28 सितंबर को दिए गए एक प्रस्ताव का भी उल्लेख किया है, जिसमें टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम्स सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स के टाटा संस में विलय का सुझाव दिया गया था।

रिपोर्ट के अनुसार, इसे उन संभावित विकल्पों में से एक माना गया जो कंपनी को आरबीआई के गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) संबंधी मानदंडों को पूरा करने में मदद कर सकते हैं, बिना सार्वजनिक लिस्टिंग का रास्ता अपनाए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि टाटा संस के बोर्ड ने ट्रस्ट्स से केवल लिस्टिंग विकल्प पर विचार करने के बजाय उपलब्ध सभी विकल्पों की जांच करने को कहा था।

पत्र में ट्रस्टियों ने कहा कि उन्होंने वही किया जिसकी अपेक्षा टाटा संस के बोर्ड ने उनसे की थी और उन्होंने सार्वजनिक लिस्टिंग के विकल्पों के अलावा अन्य संभावित रास्तों की तलाश की। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब टाटा संस के सामने आरबीआई से जुड़े नियामकीय मुद्दों के समाधान का प्रश्न बना हुआ है। इसी संदर्भ में यह बहस तेज हुई है कि कंपनी को अनलिस्टेड ही रखा जाए या फिर सार्वजनिक लिस्टिंग की दिशा में कदम बढ़ाया जाए।

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