नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। कोरोना संकट की वजह से बैंकिंग क्रेडिट यानी बैंको द्वारा वितरण की रफ्तार सुस्त पड़ी है। लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़े बताते हैं कि कोरोना महामारी की शुरुआत से पहले ही देश में आर्थिक गतिविधियों के कम होने का असर बैंकों द्वारा कर्ज वितरण की रफ्तार पर दिखने लगा था।

आंकड़े एक दिलचस्प तथ्य यह भी बताते हैं कि एक तरफ कोरोना की वजह से बेरोजगारी बढ़ने और लोगों की आय पर असर की बात हो रही है। दूसरी तरफ बैंकों में जमा राशि बढ़ रही है। कोविड काल में यानी मार्च, 2020 के बाद जैसे-जैसे देश में कोविड-19 महामारी का प्रसार बढ़ा है वैसे वैसे बैंकों की जमा राशि भी बढ़ती गई है और कर्ज की रफ्तार सुस्त होती गई है।

मार्च, 2019 में बैंकिंग सेक्टर की कर्ज की वृद्धि दर 13.1 फीसद थी, जो मार्च, 2020 में 6.4 फीसद और मार्च, 2021 में 5.6 फीसद रह गई। बैंकिंग कर्ज की रफ्तार घटने को सीधे तौर पर आर्थिक गतिविधियों के सुस्त होने से जोड़ा जाता है।

यह भी उल्लेखनीय है कि मार्च, 2019 के बाद से भारत की आर्थिक और औद्योगिक विकास की दर सुस्त पड़ी है। यह भी चिंता की बात है कि बैंकों की कर्ज वितरण रफ्तार ऐसे दौर में सुस्त पड़ी है, जब सरकार व आरबीआइ ब्याज दरों को पिछले एक दशक के न्यूनतम स्तर पर लाने में सफल रहे हैं।

मतलब साफ है कि दरें सस्ती होने के बावजूद लोग कर्ज नहीं ले रहे हैं। दूसरी तरफ, बैंकों में जमा राशि की रफ्तार पूरे कोरोना कोल के दौरान बढ़ती रही है। मार्च, 2020 में जमा राशि 9.5 फीसद थी, जो सितंबर, 2020 में बढ़कर 11 फीसद हो गई।

शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक मार्च, 2021 में यह रफ्तार 12.3 फीसद की रही है। यह जून, 2017 के बाद बैंकों में जमा राशि की सबसे बड़ी वृद्धि दर है। इससे लगता है कि कोरोना संकट के दौरान लोगों में मुश्किल वक्त के लिए रकम बचाने की प्रवृत्ति बढ़ी है।

Edited By: Pawan Jayaswal