Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    सेबी ने निवेश सलाहकार सेवाओं के लिए नियमों को किया और कड़ा

    By NiteshEdited By:
    Updated: Mon, 17 Feb 2020 07:23 PM (IST)

    सेबी निवेश योग्यता के रूप में रजिस्ट्रेशन के लिए बढ़ी हुई पात्रता मानदंड भी लागू करेगा जिसमें नेटवर्थ योग्यता और अनुभव शामिल हैं।

    सेबी ने निवेश सलाहकार सेवाओं के लिए नियमों को किया और कड़ा

    नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने वित्तीय बाजारों को रेगुलेट करने के लिए सोमवार को कई कदम उठाने की घोषणा की। इनमें निवेश सलाहकारों और वित्तीय उत्पादों के वितरकों से उनकी सेवाओं को अलग करने के लिए कहा गया है।

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    सेबी ने उस कानून में बदलावों को मंजूरी दी जिसके तहत निवेश सलाहकार फर्में, जो ग्राहकों को स्टॉक या म्यूचुअल फंड जैसे विभिन्न वित्तीय उत्पादों को खरीदने और बेचने की सलाह देती हैं, उन्हें वितरण से अपनी सेवाओं को अलग करना होगा। ऐसी सेवाओं के लिए शुल्क भी तय की जाएगी। सेबी निवेश योग्यता के रूप में रजिस्ट्रेशन के लिए बढ़ी हुई पात्रता मानदंड भी लागू करेगा, जिसमें नेटवर्थ योग्यता और अनुभव शामिल हैं।

    प्योर-प्ले डिस्ट्रीब्यूटर्स जैसे कि बैंक रिलेशनशिप मैनेजर आदि जिनका काम ट्रांजैक्शंस को पूरा करने में मदद करना है, जब तक कि वे सेबी के साथ इन्वेस्टमेंट एडवाइजर के रूप में रजिस्टर्ड न हों तब तक उन्हें खुद को 'फाइनेंशियल एडवाइजर' या 'वेल्थ मैनेजर' कहने की अनुमति नहीं होगी।

    सेबी ने कहा कि नए नियम चार सलाह पत्रों और सार्वजनिक टिप्पणियों पर विचार करने के बाद बनाए गए हैं, जिनका उद्देश्य फीस के भुगतान में स्पष्टता लाना और निवेशकों को दी जाने वाली फीस पर ऊपरी सीमा की शुरूआत करना है। अंतिम सलाह पत्र जनवरी में सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए मंगाई गई थी।

    सेबी ने एक 'रेगुलेटरी सैंडबॉक्स' को भी मंजूरी दी है जिसके जरिये नियंत्रित माहौल में फर्मों के लिए इनोवेटिव प्रोडक्ट को लॉन्च किया जा सकता है। अन्य घोषणाओं में सेबी ने कहा कि यह गैर-बैंक संरक्षकों को गोल्ड से संबंधित उपकरणों को रखने की अनुमति देगा।

    सैंड बॉक्स का मकसद

    प्रस्तावित नियामकीय सैंड बॉक्स का मकसद नए कारोबारी मॉडल और प्रौद्योगिकी के लिए परीक्षण आधार उपलब्ध कराना है जिससे निवेशकों, भारतीय बाजार और कुल मिलाकर अर्थव्यवस्था को लाभ है। इस व्यवस्था में पात्र इकाइयों को वित्तीय प्रौद्योगिका का वास्तविक परिवेश में कुछ ग्राहकों के साथ प्रयोग की अनुमति होती है। साथ ही इसमें सुनिश्चित किया जाता है कि निवेशकों की सुरक्षा और जोखिम बचाव को लेकर जरूरी सुरक्षा उपाय किए गए हों।