नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। निवेशकों का पैसा न लौटाए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह के खिलाफ सख्त रुख अपना लिया है। कोर्ट ने सहारा समूह के कर्ताधर्ता सुब्रत राय और तीन अन्य निदेशकों- वंदना भारद्वाज, रवि शंकर दुबे व अशोक राय चौधरी के देश छोड़ने पर रोक लगा दी है। इतना ही नहीं, सहारा समूह की कोई भी कंपनी अचल संपत्तिायों की बिक्री नहीं कर सकेगी। ये आदेश गुरुवार को न्यायमूर्ति केएस राधाकृष्णन और जेएस खेहर की खंडपीठ ने सेबी की शिकायत पर दिए हैं।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड ने सहारा पर शीर्ष अदालत के आदेश का पूरी तरह पालन नहीं करने का आरोप लगाया था। कोर्ट ने 28 अक्टूबर को निवेशकों के 20,000 करोड़ रुपये लौटाने के लिए समूह को इतनी ही कीमत की संपत्तिायों के मूल मालिकाना दस्तावेज सेबी के समक्ष जमा कराने के आदेश दिए थे।

सहारा ने आदेशों का उड़ाया मजाक, सेबी से बोला झूठ

सेबी के वकील अरविंद दत्तार ने कहा कि सहारा ने संपत्तिायों का बढ़ा-चढ़ा कर मूल्यांकन किया है। ंउसने संपत्तिायों के मूल कागजात भी नहीं जमा कराए हैं। समूह ने वर्सोवा की 106 एकड़ जमीन का मूल्य 19,000 करोड़ रुपये लगाया है, जबकि इसकी आधिकारिक कीमत मात्र 118.42 करोड़ है। इस जमीन का इस्तेमाल डेवलेपमेंट के लिए नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह हरित क्षेत्र में आती है। पीठ भी जमीन के मूल्यांकन के बारे में दत्तार की दलीलों से कुछ हद तक सहमत थी। पीठ ने दत्तार से कहा कि सेबी सहारा की ंउन संपत्तिायों का पता लगाए, जिन्हें 20,000 करोड़ की जमानत के लिए विचार किया जा सकता है।

हालांकि सहारा की ओर से पेश वकील सीए सुंदरम ने सेबी के आरोपों का जबरदस्त विरोध किया। सुंदरम ने कहा कि सहारा ने कोर्ट के आदेश का पालन किया है। लेकिन पीठ उनकी दलीलों से प्रभावित नहीं हुई। कोर्ट ने कहा कि आदेश पर पूरी तरह से अमल नहीं किया गया है। पीठ ने मामले में आगे सुनवाई के लिए 11 दिसंबर की तारीख तय की है। तब तक सुब्रत राय व तीन अन्य निदेशकों के देश से बाहर जाने पर रोक लगा दी है। साथ ही कोर्ट ने इस दौरान सहारा समूह की अचल संपत्तिायों को कोर्ट की अनुमति के बिना बेचने पर भी पाबंदी आयद कर दी है।