नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। रिजर्व बैंक [आरबीआइ] ने भले ही लोन सस्ता करने के कदम उठाने से अभी इन्कार कर दिया हो, लेकिन बैंकिंग क्षेत्र से पुख्ता संकेत मिल रहे हैं कि निकट भविष्य में कर्ज दरें घट सकती हैं। शुक्रवार को सार्वजनिक क्षेत्र के भारतीय स्टेट बैंक [एसबीआइ] ने जमा दरों में 0.25 फीसद की कटौती करने का फैसला किया है। पिछले कुछ दिनों के भीतर फिक्स्ड डिपॉजिट [एफडी] की दरों को घटाने वाला वह चौथा बैंक है। निजी क्षेत्र के दिग्गज बैंक- आइसीआइसीआइ और एचडीएफसी बैंक पहले ही जमा दरों को घटा चुके हैं।

दरअसल, अभी तक का ट्रेंड बताता है कि बैंक कर्ज की दरों में गिरावट के पुख्ता अनुमान के बाद ही जमा दरों को घटाते हैं। एसबीआइ ने एक वर्ष से लेकर पांच वर्ष तक की अवधि की सावधि जमा स्कीमों यानी एफडी पर ब्याज दर को 8.75 से घटाकर 8.50 फीसद कर दिया है। पांच वर्ष से ज्यादा अवधि के लिए नई दर 8.25 फीसद होंगी। अब तक यह दर 8.50 फीसद थी। ब्याज की उक्त दरें एक करोड़ रुपये तक की जमा स्कीमों पर लागू होंगी।

सरकारी क्षेत्र के आइडीबीआइ बैंक ने भी एक दिन पहले एफडी स्कीमों पर ब्याज दरों को कम किया था। आइडीबीआइ ने छह महीने से लेकर 20 वर्ष तक की एफडी पर ब्याज 0.50 फीसद घटाया है। आइसीआइसीआइ बैंक और एचडीएफसी बैंक ने भी दरों इतनी ही कटौती की है। एक साथ इतने बैंकों की तरफ से जमा दरों को घटाने को कर्ज के सस्ता होने का संकेत माना जा रहा है।

इस महीने की शुरुआत में मौद्रिक नीति की समीक्षा करते हुए आरबीआइ गवर्नर रघुराम राजन ने इस बात के संकेत दिए थे कि अगले वर्ष की शुरुआत से कर्ज को सस्ता करने के लिए कदम उठाए जा सकते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा था कि बैंक चाहे तो अब भी ग्राहकों को सस्ता कर्ज दे सकते हैं, क्योंकि सभी बैंकों के पास बहुत सारा फंड है, जबकि कर्ज लेने वालों की काफी कमी है। एचडीएफसी बैंक के एमडी आदित्य पुरी ने शुक्रवार को कहा भी है कि उनका बैंक अगले साल मार्च से कर्ज पर अपनी ब्याज दरों में कटौती करेगा।

Posted By: Murari sharan

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