कभी कहलाए थे भगौड़े, आज अफ्रीका में चलता है सिक्का; इस देश की नौसेना भी करती है इन भारतीय भाइयों पर भरोसा
भारतीय तेल कारोबारी नितिन और चेतन संदेसरा की नाइजीरियाई कंपनी नाइजीरियाई नौसेना के लिए 10 सुरक्षा जहाज बना रही है, ...और पढ़ें

कभी लगा था भगौड़े का आरोप (AI फोटो)
HighLights
संदेसरा बंधुओं की नाइजीरियाई कंपनी बना रही नौसेना के जहाज
'काली 3' नामक पहला सुरक्षा जहाज नौसेना में शामिल
भारत में धोखाधड़ी के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट का समझौता
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय तेल कारोबारी नितिन और चेतन संदेसरा से जुड़ी नाइजीरिया की एक तेल कंपनी, नाइजर डेल्टा में अपने शिपयार्ड में नाइजीरियाई नौसेना के लिए 10 सुरक्षा जहाज बना रही है। यह देश के तेल और गैस इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा के लिए निजी तौर पर फंड की गई पहल का हिस्सा है।
इन जहाजों में से पहला, 40 मीटर लंबा 'काली 3', डेल्टा राज्य के ओकपाई HM शिपयार्ड में स्टर्लिंग ऑयल एक्सप्लोरेशन एंड एनर्जी प्रोडक्शन कंपनी (SEEPCO) ने नाइजीरियाई नौसेना के साथ मिलकर बनाया है। कंपनी के अनुसार, इस जहाज को बनाने में लगभग 200 नाइजीरियाई लोगों ने काम किया, जिनमें नाइजर डेल्टा के इंजीनियर और टेक्नीशियन, नेवल आर्किटेक्ट, वेल्डर और रिटायर्ड मिलिट्री अधिकारी शामिल थे।
काली 3 हुआ सेवा में शामिल
नौसेना ने 18 अगस्त को डेल्टा राज्य की असेमोकु जेटी पर एक समारोह में 'काली 3' को आधिकारिक तौर पर सेवा में शामिल किया। इस समारोह की अध्यक्षता नौसेना प्रमुख वाइस एडमिरल इदी अब्बास ने की। अब्बास ने कहा कि आर्थिक गतिविधियों को बनाए रखने के लिए नाइजीरिया के समुद्री पर्यावरण और महत्वपूर्ण ऊर्जा संपत्तियों की सुरक्षा बहुत ज़रूरी है।
'काली 3' का ड्राफ्ट 2.5 मीटर है, जिससे यह डेल्टा की उथली खाड़ियों और तटीय इलाकों में चल सकता है। यह 10 से 12 दिनों तक समुद्र में रह सकता है, इसमें बोर्डिंग ऑपरेशन के लिए दो रिजिड-हल इन्फ्लेटेबल बोट (RHIB) हैं और इसे ब्यूरो वेरिटास के मानकों के अनुसार बनाया गया है।
सैंडेसरा बंधुओं को मिली पहचान
इस प्रोजेक्ट से सैंडेसरा बंधुओं को नाइजीरिया में एक नई पहचान मिली है, जहाँ उन्होंने 2017 में भारत छोड़ने के बाद तेल का कारोबार शुरू किया था। दवा बनाने वाली कंपनी स्टर्लिंग बायोटेक के पूर्व डायरेक्टर रहे इन दोनों भाइयों पर भारतीय जांचकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि उन्होंने बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए टर्नओवर, फर्जी लेन-देन और शेल कंपनियों के जरिए आंध्र बैंक के नेतृत्व वाले सरकारी बैंकों के समूह के साथ धोखाधड़ी की।
भारत छोड़ने के बाद उन्होंने अल्बानिया की नागरिकता ले ली और उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर दिया गया। उन्होंने कर्ज देने वालों के साथ धोखाधड़ी करने के आरोपों से इनकार किया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नाइजीरिया ने 2019 में उन्हें गिरफ्तार करने से इनकार कर दिया और भारत के आरोपों को राजनीतिक बताया।
सुप्रीम कोर्ट की समझौते को हरी झंडी
अब यह मामला काफी हद तक सुलझ चुका है। 19 नवंबर, 2025 को भारत के सुप्रीम कोर्ट ने एक समझौते को मंजूरी दी, जिसके तहत दोनों भाई अपने खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को खत्म करने के बदले 51 अरब रुपये (लगभग 527 मिलियन डॉलर) जमा करने पर सहमत हुए। उन्होंने दिसंबर में भुगतान कर दिया और परिवार का कहना है कि इस भुगतान से उनके और उनकी कंपनियों के खिलाफ चल रहे "सभी मामले खत्म" हो गए हैं।
सेबी में क्या हुआ?
अप्रैल में, सुप्रीम कोर्ट ने सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) से कहा कि वह स्टर्लिंग बायोटेक और इन भाइयों के खिलाफ अपनी कार्यवाही बंद करे, वरना उसे कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। कर्ज देने वालों ने कोर्ट को बताया है कि समूह की कंपनियों से उनकी कुल बकाया राशि लगभग 192.8 अरब रुपये या करीब 2 अरब डॉलर है।
नाइजीरिया में कैसे की शुरुआत?
ये दोनों भाई लगभग दो दशक पहले नाइजीरिया के तेल उद्योग में आए थे। उन्होंने डेल्टा क्षेत्र में दो ऑनशोर लाइसेंस हासिल किए और बाद में अपने कारोबार का केंद्र लागोस में ट्रांसफर कर लिया। रिपोर्ट्स के अनुसार, 2023 में नाइजीरियन नेशनल पेट्रोलियम कंपनी के साथ हुए कॉन्ट्रैक्ट के तहत उनकी कंपनियाँ प्रतिदिन लगभग 50,000 बैरल कच्चा तेल निकाल रही थीं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय बड़ी कंपनियों के बाद यह समूह नाइजीरिया में तेल का सबसे बड़ा निर्यातक था।
2019 में, नितिन संदेसरा ने कहा था कि उनके परिवार की कंपनियों द्वारा चुकाए गए टैक्स, नाइजीरियाई सरकार के कुल रेवेन्यू का लगभग 2% हिस्सा थे।
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