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    Rediff Infibeam Deal: कभी इंटरनेट की दुनिया में रेडिफ का था जलवा, अब बिकने की आई खबर

    Updated: Sat, 03 Aug 2024 01:08 PM (IST)

    Rediff acquired by Infibeam Avenues रेडिफ को Infibeam Avenues ने खरीदा है जिसकी शुरुआत 2007 में विशाल मेहता ने की थी। इंफीबीम ने देश की सबसे पुरानी इंटरनेट फर्मों में से एक रेडिफ में 54 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने पर सहमति जताई है। इंफीबीम ने एक रेगुलेटरी फाइलिंग में बताया कि उसने रेडिफ में करीब 50 करोड़ रुपये का निवेश किया है जो इक्विटी और डेट में बराबर तब्दील होंगे।

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    रेडिफ अमेरिकी शेयर बाजार में लिस्ट भी थी।

    बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। भारत की सबसे पुरानी इंटरनेट फर्म है, रेडिफ (Rediff)। इसके साथ लाखों लोगों की यादें जुड़ी हैं। इसकी नींव में अजीत बालकृष्णन (Ajit Balakrishnan) ने रखी थी। रेडिफ ने काफी कम वक्त में अच्छे-खासे यूजर बना लिए। यह न्यूज, ईमेल और ऑनलाइन शॉपिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने वाले देश के शुरुआती पोर्टल में एक है। लेकिन, अब रेडिफ के बिकने की खबर आ रही है। गुजरात की फिनटेक कंपनी इन्फीबीम एवेन्यूज ने रेडिफ (Rediff acquired by Infibeam Avenues) में 54 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी है।

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    रेडिफ का शुरुआती सफर

    जब 1996 में रेडिफ की शुरुआत हुई, तो उस वक्त देश में गिने-चुने लोगों के पास ही इंटरनेट एक्सेस था। रेडिफ ने अच्छी क्वॉलिटी की सर्विस देकर जल्द ही यूजर्स के बीच अपनी पहचान बना ली। इसके Rediffmail और Rediff Shopping का इस्तेमाल काफी ज्यादा होता था। उस वक्त रेडिफ शॉपिंग पर इलेक्ट्रॉनिक्स और दूसरे उपकरण बिकते थे।

    कायम नहीं रहा दबदबा

    रेडिफ.कॉम ने अप्रैल 2001 में इंडिया अब्रॉड अखबार को खरीदा। फिर 2010 में मोबाइल प्लेटफॉर्म के लिए ईमेल सेवा रेडिफमेल एनजी लॉन्च की। इसके दो साल बाद रेडिफ न्यूज के लिए एंड्रॉइड ऐप भी लॉन्च किया। उस वक्त रेडिफ में 300 से ज्यादा लोग काम करते थे। इसके मुख्यालय मुंबई में था और दूसरी शाखाएं बेंगलुरु, नई दिल्ली और न्यूयॉर्क तक में फैली हुई थी।

    रेडिफ अमेरिकी शेयर बाजार में लिस्ट भी थी। लेकिन, अप्रैल 2016 में कंपनी ने डीलिस्ट होने का फैसला किया। उसका कारोबार अच्छा नहीं चल रहा था। आमदनी के मुकाबले उसकी लागत भी काफी बढ़ गई थी। कुल मिलाकर कंपनी की वित्तीय हालत काफी खस्ताहाल थी।

    कैसे बिका रेडिफ

    रेडिफ को Infibeam Avenues ने खरीदा है, जिसकी शुरुआत 2007 में विशाल मेहता ने की थी। इंफीबीम ने देश की सबसे पुरानी इंटरनेट फर्मों में से एक रेडिफ में 54 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने पर सहमति जताई है। इंफीबीम ने एक रेगुलेटरी फाइलिंग में बताया कि उसने रेडिफ में करीब 50 करोड़ रुपये का निवेश किया है, जो इक्विटी और डेट में बराबर तब्दील होंगे। इंफीबीम को इन्वेस्टमेंट के बदले 54 फीसदी शेयरहोल्डिंग मिलेगी। इन्फीबीम का कहना है कि वह सौदे को 90 दिन के भीतर खत्म करना चाहती है।

    इन्फीबीम ने क्यों की डील

    इन्फीबीम का कहना है कि इस सौदे के जरिए वह पेमेंट, ई-कॉमर्स और क्लाउड सर्विसेज के लिए एक साझा इकोसिस्टम बनाना चाहती है। उसका इरादा यूजर्स को क्रेडिट, बीमा और निवेश उत्पाद बेचने के लिए रेडिफमनी प्लेटफॉर्म का लाभ उठाना है। रेडिफ को फिलहाल हर महीने लगभग 38 मिलियन ऑनलाइन विजिटर मिलते हैं। रेडिफ ने वित्त वर्ष 2023-24 में 36 करोड़ रुपये का सालाना कारोबार किया।

    इस सौदे से निवेशकों में भी जोश दिखा। शुक्रवार (2 अगस्त) को बीएसई पर 4.87 फीसदी बढ़कर 32.49 रुपये पर बंद हुए, जबकि सेंसेक्स में लगभग 1.1 फीसदी की गिरावट आई थी। इन्फीबीम ने पिछले एक साल में 120 फीसदी का बंपर रिटर्न दिया है। हालांकि, पिछले 6 महीने के दौरान इसके स्टॉक में 11 फीसदी गिरावट आई है।

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