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    बैंक कब तक घटाएंगे ब्याज? EMI कम कराएं या लोन अवधि? लोन ट्रांसफर कब करना सही? सब बता रहे हैं एक्सपर्ट

    Updated: Fri, 06 Jun 2025 10:16 PM (IST)

    आरबीआई ने पिछले चार महीनों में रेपो रेट में 100 आधार अंकों की कटौती (Repo rate reduction) की है जो 6.5% से घटकर 5.5% हो गया है। यह एक बड़ा कदम है जो आपकी ईएमआई को हजारों रुपये कम कर सकता है या आपके लोन की अवधि को कई साल तक घटा सकता है। लेकिन यह तभी संभव है जब आप समझदारी से कदम उठाएं।

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    बैंक कब तक घटाएंगे ब्याज? EMI कम कराएं या लोन अवधि? लोन ट्रांसफर कब करना सही होता है?

    रेपो रेट कम होते ही जरूरी नहीं की आपकी ईएमआई (Repo rate cut impact on EMI) भी साथ के साथ कम हाे जाए। सच्चाई ये है कि रेपो रेट में कटौती का सभी कर्जधारकों को समान लाभ नहीं मिलता है और न ही सभी फायदे स्वतः मिल जाते हैं। फिनटेक फर्म बैंकबाजार डॉट कॉम के सीईओ आदिल शेट्टी आपको वह उपाय (How to reduce home loan EMI) बता रहे हैं, जिससे आप ब्याज दरों में कमी का अधिकतम फायदा उठा सकते हैं।

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    1. रेट कटौती का अधिकतम फायदा कैसे होगा?

    अगर आपका होम लोन रेपो-लिंक्ड है, तो आप पहले से ही एक कदम आगे हैं। ये लोन आरबीआई की नीतिगत दर यानी रेपो रेट के साथ समन्वय में चलते हैं। इसलिए, जब रेपो रेट घटता है, तो आपका लोन रेट भी घटना चाहिए। बैंक आमतौर पर कटौती को पास करने में एक से तीन महीने का समय लेते हैं। लेकिन अगर आप अभी भी एमसीएलआर या पुरानी बेस रेट पर हैं, तो लाभ धीमा या कम हो सकता है। ये बेंचमार्क धीरे-धीरे प्रतिक्रिया करते हैं।

    पहले कदम के रूप में, अपने लोन के प्रकार की जांच करें। अपने लोन एग्रीमेंट को देखें या अपने बैंक से पूछें। अगर आपका लोन रेपो-लिंक्ड नहीं है, तो शायद अब इसे बदलने का समय आ गया है।

    2. लोन की अवधि कम करें या ईएमआई?

    जब आपका ब्याज घटता है, तो आपके पास दो विकल्प होते हैं, ईएमआई कम करें या लोन की अवधि (टेन्योर) कम करें। अधिकांश बैंक डिफॉल्ट रूप से ईएमआई घटाते हैं, लेकिन यह हमेशा सबसे अच्छा विकल्प नहीं होता।

    कम अवधि का मतलब है कुल मिलाकर कम ब्याज देना। मान लीजिए आपके पास ₹50 लाख का लोन 8.5% पर 20 साल के लिए है और आपका रेट घटकर 7.5% हो जाता है। आप अपनी ईएमआई को अपरिवर्तित रखकर और अवधि को घटाकर लगभग ₹7.5 लाख ब्याज बचा सकते हैं और अपना लोन 3 साल पहले खत्म कर सकते हैं।

    हालांकि, आप अपनी ईएमआई भी कम कर सकते हैं और बचत को इक्विटी फंड्स में एसआईपी के माध्यम से निवेश कर सकते हैं। अगर आपका अनुमानित कर-मुक्त रिटर्न लोन के ब्याज से 2-3% अधिक है, तो यह बेहतर हो सकता है। लेकिन पहले कैलकुलेट कर लें और फिर निर्णय लें।

    3. अपने लोन को कब रिफाइनेंस करना चाहिए?

    आपके लेंडर को तीन महीने के भीतर रेट कटौती पास करनी चाहिए। हालांकि, लोन को परिभाषित करने वाले अन्य घटक भी होते हैं, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण है स्प्रेड। स्प्रेड वह अतिरिक्त मार्जिन है जो आपका लेंडर रेपो रेट में जोड़ता है। कुछ बैंक सिर्फ 1.75% स्प्रेड चार्ज करते हैं, जबकि कुछ 3% तक लेते हैं।

    अगर आपके लोन पर 2.5% का स्प्रेड है और वह 8.5% पर है, तो आपका संशोधित रेट घटकर 8% हो जाएगा। हालांकि, अगर आप 2% स्प्रेड पर रिफाइनेंस करते हैं, तो आपको 7.5% का प्रभावी ब्याज मिल सकता है। अगर आपका स्प्रेड पहले से ही कम है जैसे 2%, तो रिफाइनेंसिंग से कोई फायदा नहीं होगा। इसलिए, अपने प्रभावी दर की तुलना मौजूदा ऑफर से करें। रिफाइनेंस तभी करें जब आप कम से कम 50 आधार अंक अधिक भुगतान कर रहे हों। आप रिफाइनेंसिंग तभी कराएं जब आपकी रेट कटौती प्रभावी हो जाए।

    4. क्या आपको लोन का प्रीपेमेंट करना चाहिए?

    उच्च ब्याज दर के मामले में प्रीपेमेंट एक अच्छा विकल्प होता है। यह ब्याज के बोझ को तेजी से कम करता है। खासकर शुरुआती वर्षों में जब आपकी अधिकांश ईएमआई ब्याज में जाती है, तब यह काफी कारगर होता है। सालाना सिर्फ ₹1 लाख का प्रीपेमेंट भी कई ईएमआई को कम कर सकता है और आपके लिए लाखों रुपये बचा सकता है।

    हालांकि, जब दरें गिरती हैं, तो समीकरण बदल जाता है। अगर आपका लोन 9-9.5% पर है, तो प्रीपेमेंट करना समझदारी है, क्योंकि लंबी अवधि का इक्विटी निवेश कर-मुक्त 10-12% रिटर्न देता है। लेकिन अगर आपका लोन 7.5% पर आ जाता है और इक्विटी निवेश से कर-मुक्त ~11% रिटर्न मिल सकता है, तो प्रीपेमेंट के लिए रखे गए पैसों को निवेश करना बेहतर हो सकता है और लोन को अपनी अवधि तक चलने देना चाहिए।

    कुल मिलाकर, 100 आधार अंकों की रेट कटौती एक अच्छा अवसर है, लेकिन तभी जब आप इसे सही से भुना सकें। इसलिए आज ही अपने लोन की समीक्षा करें। अपने रेट की जांच करें। अगर आपका लोन रेट अधिक है, तो रेपो-लिंक्ड लोन में शिफ्ट करने का अनुरोध करें। इस पर छोटा सा शुल्क लग सकता है, लेकिन यह आपको 50-100 आधार अंक बचा सकता है। अगर कुछ भी काम नहीं करता, तो बैंक बदलने पर विचार करें।