नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। आम भारतीयों के पसंदीदा बिजनेस लीडर रतन टाटा आज अपना 82वां जन्मदिन मना रहे हैं। टाटा समूह आज देश का दूसरा सबसे बड़ा बिजनेस ग्रुप है और इसे यहां तक पहुंचाने में रतन टाटा का योगदान सबसे ज्यादा है। यह संयोग ही है कि देश के सबसे बड़े कारोबारी समूह यानी रिलायंस इंडस्ट्रीज की स्थापना करने वाले धीरूभाई अंबानी का जन्म भी आज ही के दिन ही हुआ था। देश के उद्योग जगत को नई दिशा देने वाले इन दोनों बिजनेस लीडर्स की कहानी हरेक भारतीयों को कुछ नया और बड़ा करने की प्रेरणा देता है।

आज के समय जीवित किंवदंती बन चुके रतन टाटा का कुत्तों से लगाव जगजाहिर है। वहीं, 500 रुपये से अपने बिजनेस की शुरुआत करने वाले धीरूभाई अंबानी ने कामयाबी के ऐसे झंडे गाड़े कि आज हर कोई उनकी कहानी पढ़ना चाहता है। आइए दोनों के जीवन से जुड़ी तमाम कही-अनकही कहानियों को जानते हैं:

रतन टाटाः सफल उद्यमी, परोपकारी, ट्रेंड पायलट और बहुत कुछ

आज के समय में बेदाग तरीके से लंबे समय तक किसी कारोबारी समूह को शीर्ष पर बनाये रखना अविश्वसनीय सा लगता है। लेकिन यह कर दिखाया रतन टाटा ने। साल 1991 में टाटा समूह के चेयरमैन बनने के बाद रतन टाटा ने कर दिखाया कि इस संसार में कुछ भी असंभव नहीं है। टाटा समूह के संस्थापक जमशेद जी टाटा के परिवार में 1937 में आज ही के दिन जन्में रतन टाटा ने कॉरनेल यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ आर्किटेक्चर से शिक्षा ग्रहण की। वह 1961 में टाटा समूह से जुड़े और 1991 में जेआरडी टाटा के रिटायरमेंट के बाद समूह की बागडोर रतन टाटा के पास आ गई। रतन टाटा के चेयरमैन रहते हुए समूह के रेवेन्यू और लाभ में कई गुना तक की वृद्धि हुई। रतन टाटा को वर्ष 2008 में देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। 

स्टार्टअप कंपनियों में निवेश

रिटायरमेंट के बाद भी रतन टाटा लगातार सक्रिय बने रहे। अपने अनुभव का फायदा उठाते हुए उन्होंने कैब प्रोवाइडर Ola, Paytm की पैरेंट कंपनी One97 Communications, Urbanclap, Firstcry और कारदेखो सहित कई कंपनियों में निवेश किया। 

धीरूभाई अंबानी: क्लर्क से बिजनेस टायकून तक का सफर

आप सभी ने रिलायंस समूह, मुकेश अंबानी एवं अनिल अंबानी का नाम तो सुना ही होगा। रिलायंस देश का सबसे बड़ा कारोबारी समूह है तो मुकेश अंबानी एशिया के सबसे अमीर शख्सियत हैं। हालांकि, इन दोनों की कहानी शुरू होती है धीरूभाई अंबानी की कामयाबी की कहानी के साथ। धीरूभाई अंबानी का पूरा नाम था धीरजलाल हीराचंद अंबानी। इनका जन्म 28 दिसंबर, 1932 को गुजरात में हुआ था। एक कंपनी में क्लर्क के रूप में अपने करियर की शुरुआत करने वाले अंबानी ने पेट्रोकेमिकल, कम्युनिकेशन, पावर और टेक्सटाइल समेत कई क्षेत्रों में कारोबार करने वाली रिलायंस समूह की नींव डाली। 

गांव के स्कूल टीचर के बेटे

अंबानी के बारे में ऐसे ही नहीं कहा जाता है कि उन्होंने देश के निम्न मध्यमवर्गीय परिवारों को बड़े सपने देखने की प्रेरणा दी। अंबानी का जन्म एक ग्रामीण स्कूल टीचर के परिवार में हुआ था। वह भाई-बहनों में तीसरे नंबर पर आते थे। ब्रिटानिका के मुताबिक 17 साल की आयु में अंबानी अदन चले गए और एक बड़ी कंपनी में क्लर्क का शुरू कर दिया। यहीं उन्हें ट्रेडिंग, अकाउंटिंग और बिजनेस में काम आने वाली अन्य चीजों की तालीम मिली।

मसालों से शुरू किया कारोबार

अंबानी ने 1950 के दशक में मसालों से कारोबार की शुरूआत की। धीरे-धीरे उन्होंने अपनी नई कारोबारी नीतियों से सबको चौंकाते हुए कई चीजों का कारोबार शुरू कर दिया। उनका बिजनेस तेजी से बढ़ा और आज रिलायंस समूह का जो कद देख रहे हैं, उसका श्रेय अंबानी की दूरदृष्टि एवं मेहनत को जाता है।

 

Posted By: Ankit Kumar

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