जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआइ) कर्मचारियों के विरोध को देखते हुए लखनऊ, कोलकाता समेत छह प्रमुख हवाई अड्डों के निजीकरण के सरकार के मंसूबे को झटका लग सकता है। सरकार का इरादा लोकसभा चुनाव से पहले निजीकरण प्रक्रिया को पूरा करने का था। मगर कर्मचारियों की देशव्यापी भूख हड़ताल और आंदालन तेज करने की धमकी के बाद यह प्रक्रिया लटक सकती है।

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सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के नाम पर लखनऊ, कोलकाता, जयपुर, गुवाहाटी, चेन्नई और अहमदाबाद एयरपोर्ट के निजीकरण की सरकार की मुहिम का एयरपोर्ट अथॉरिटी के कर्मचारी ही नहीं, एयरलाइनों ने भी विरोध किया है। एयरलाइनों की अंतरराष्ट्रीय संस्था इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (आइटा) ने भी निजीकरण के बाद इन हवाई अड्डों पर एयरपोर्ट शुल्क बढ़ने की आशंका जताई है।

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पीपीपी पर दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट के निजीकरण के बाद ऐसा ही हुआ है। यही वजह है कि लखनऊ और चेन्नई एयरपोर्ट के आधुनिकीकरण एवं प्रबंधन के लिए निजी कंपनियों को आरएफपी एवं आरएफक्यू डाक्यूमेंट्स की बिक्री को कई हफ्तों के लिए टाल दिया गया है। आवेदन की इच्छुक कंपनियों ने विमानन मंत्रालय से भविष्य में एएआइ के कर्मचारियों और रिटर्न को लेकर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।

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नागरिक उड्डयन सचिव केएन श्रीवास्तव ने माना कि ऐसी मांग उठी है। हमें दस्तावेजों में संशोधन करने पड़ सकते हैं। इन हालात में कुछ यही हाल जयपुर, गुवाहाटी और अहमदाबाद से संबंधित निविदा पूर्व प्रक्रिया का हो सकता है। सूत्रों के अनुसार मंत्रालय को आशंका है कि यदि इस मामले ने तूल पकड़ लिया और किसी पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में इसके खिलाफ याचिका दायर कर दी तो मुश्किल खड़ी हो सकती है। पहले ही एयर एशिया को विदेशी निवेश की अनुमति को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर सुनवाई चल रही है। इस बीच, बुधवार दूसरे दिन भी एयरपोर्ट अथॉरिटी के कर्मचारियों ने देश भर में अपने कार्यालयों के बाहर भूख हड़ताल के साथ धरना-प्रदर्शनों का आयोजन किया।

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