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    प्राकृतिक गैस को जीएसटी के दायरे में लाने की तैयारी, 2030 तक 15 प्रतिशत करने का लक्ष्य

    By Agency Edited By: Ankita Pandey
    Updated: Wed, 12 Jun 2024 07:58 PM (IST)

    पेट्रोलियम मंत्री प्राकृतिक गैस को जीएसटी के दायरे में लाने के लिए काम करेंगे। फिलहाल पेट्रोलियम प्रोडक्ट शराब और तंबाकू जीएसटी के दायरे से बाहर हैं। प्राकृतिक गैस भी पेट्रोलियम उत्पाद होने के कारण जीएसटी के दायरे से बाहर है और इस पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क और केंद्रीय बिक्री कर के अलावा प्रदेश सरकार वैट लगाती है। वित्त वर्ष 2022-23 में प्राकृतिक गैस पर कुल वैट 200 अरब रुपये था।

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    जीएसटी के दायरे में आ सकता है प्राकृतिक गैस , यहां जानें डिटेल

    एएनआई, नई दिल्ली। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि वे प्राकृतिक गैस को जीएसटी के दायरे में लाने के लिए काम करेंगे। वर्तमान में सभी तरह के पेट्रोलियम उत्पाद, शराब और तंबाकू जीएसटी के दायरे से बाहर हैं। प्राकृतिक गैस भी पेट्रोलियम उत्पाद होने के कारण जीएसटी के दायरे से बाहर है और इस पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क और केंद्रीय बिक्री कर के अलावा प्रदेश सरकार वैट लगाती है।

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    अर्थव्यवस्था में प्राकृतिक गैस के उपयोग

    विशेषज्ञों का मानना है कि अर्थव्यवस्था में प्राकृतिक गैस के उपयोग को बढ़ाने के लिए इस पर तर्कसंगत कर लगाना जरूरी है। सरकार ने देश के एनर्जी बास्केट में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी को वर्तमान के 6.7 प्रतिशत से बढ़ाकर 2030 तक 15 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा है।

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    जीएसटी परिषद के फैसले को प्रभावित करने वाले चार प्रमुख राज्यों गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में अब या तो भाजपा या एनडीए की सरकार है। ये चारों राज्य प्राकृतिक गैस पर लगने वाले वैट के सबसे बड़े लाभार्थी हैं। ऐसे में अगर प्राकृतिक गैस को जीएसटी के तहत लाने का कोई प्रस्ताव आता है तो उसके पारित होने की संभावना अधिक है।

    जेफरीज की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, अगर प्राकृतिक गैस को जीएसटी के दायरे में लाया जाता है, तो इसकी कीमत में 0.8-0.9 डालर प्रति एमएमबीटीयू (ऊर्जा मूल्य मापने की एक इकाई) की कमी आ सकती है। वित्त वर्ष 2022-23 में प्राकृतिक गैस पर कुल वैट 200 अरब रुपये था।

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