सिंगापुर, पीटीआइ। भारत भले ही घरेलू व्यापार को ध्यान में रखते हुए आरसेप में शामिल नहीं हुआ हो, लेकिन इसके सदस्य देशों को उम्मीद है कि एशिया का यह दूसरा सबसे बड़ा बाजार मतभेद सुलझाकर भविष्य में क्षेत्रीय समझौते का हिस्सा बन सकता है। सिंगापुर के गृह मंत्री टियो ची हीन ने उम्मीद जताई है कि भारत सदस्य देशों के साथ विवादित मुद्दों का हल निकाल लेगा और दक्षिण एशिया के विशाल मार्केट में भागीदारी के लिए रीजनल कंप्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप (आरसेप) में शामिल हो जाएगा।

हीन ने कहा, ‘हमें उम्मीद है कि आरसेप के 15 देश भारत के साथ मिल-बैठकर विवादित मुद्दों का हल खोज लेंगे। हम क्षेत्रीय विकास में भारत के साथ मिलकर आगे बढ़ना चाहते हैं।’ दक्षिण एशिया प्रवासी सम्मेलन के चौथे संस्करण को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि भारत इस क्षेत्र में प्रमुख भागीदार है। भारत और आशियान देशों के व्यापारिक संबंधों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि हमारे पास आसियान-इंडिया फ्री टेड एरिया जैसा समझौता 2010 से मौजूद है। लेकिन क्षेत्रीय व्यापार में अभी काफी संभावनाएं बाकी हैं।

भारत और सिंगापुर के बीच व्यापारिक साझेदारी पर प्रकाश डालते हुए हीन ने कहा कि हमारा नेशनल सिंगल विंडो प्लेटफॉर्म दोनों देशों के बीच व्यापार सूचनाओं का डिजिटल तरीके से आदान-प्रदान कर रहा है। इसके अलावा भारत के रुपे और सिंगापुर के नेट्स के बीच सीमापार लेनदेन के लिए पिछले वर्ष समझौता हो चुका है। दोनों देशों के बीच व्यापारिक साङोदारी का ताजा उदाहरण पेश करते हुए उन्होंने कहा कि हाल में सिंगापुर के सेंबकॉर्प मरीन रिग्स एंड फ्लोटर्स, भारत के सपूरजी पालोनजी और मलेशिया के बमी अर्माडा के बीच एक समझौता हुआ है। इसके तहत क्रूड ऑयल ढोने वाले एक विशाल मालवाहक जहाज को तैरती प्रोडक्शन, स्टोरेज और ऑफलोंिडंग यूनिट में तब्दील किया जाएगा। भारत के पूर्वी तट पर स्थापित होने के बाद यह प्रतिदिन 90 हजार बैरल ऑयल का उत्पादन करेगा। यह भारत की ऊर्जा जरूरतों को हासिल करने में सहायक होगा।

गौरतलब है कि बैंकाक में हुई आसियान देशों की बैठक में कई दौर की बातचीत के बाद भारत और अन्य देशों के बीच आरसेप को लेकर बात नहीं बन पाई थी। भारत को चिंता है कि चीन के प्रभुत्व वाला आरसेप भारत के किसानों और एमएसएमई सेक्टर को नुकसान पहुंचा सकता है। फिलहाल भारत के बिना आसियान और अन्य देश इस समझौते पर आगे बढ़ चुके हैं। इस बहुपक्षीय मुक्त व्यापार समझौते में कुल 15 देश शामिल हैं। इसमें आसियान देशों के अलावा चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया हैं। 

Posted By: Nitesh

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