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    रक्षा मंत्री बोले- ऑपरेशन सिंदूर के बाद दुनिया में बढ़ी भारतीय उपकरणों की मांग; वैश्विक सैन्य खर्च $2.7 ट्रिलियन हुआ

    Updated: Mon, 07 Jul 2025 11:24 PM (IST)

    Indian defense equipment रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत में बने स्वदेशी उपकरणों और प्लेटफार्मों के प्रदर्शन ने भारत निर्मित सैन्य उत्पादों की वैश्विक मांग को बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा कि भारत को सापेक्ष शांति के समय में भी अनिश्चितता के लिए तैयार रहना चाहिए क्योंकि शांति काल केवल एक भ्रम है।

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    राजनाथ बोले- भारत का रक्षा बजट कुछ देशों की जीडीपी से भी अधिक है।

    नई दिल्ली| रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सशस्त्र बलों द्वारा प्रदर्शित साहस की सराहना करते हुए कहा कि इस सैन्य कार्रवाई के बाद से भारत में बने स्वदेशी उपकरणों और प्लेटफार्मों के प्रदर्शन ने भारत निर्मित सैन्य उत्पादों की वैश्विक मांग को बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा कि भारत को सापेक्ष शांति के समय में भी अनिश्चितता के लिए तैयार रहना चाहिए, क्योंकि शांति काल केवल एक ''भ्रम'' है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा लेखा विभाग (डीएडी) के नियंत्रकों के सम्मेलन में सोमवार को कहा कि आपरेशन सिंदूर के बाद से दुनिया हमारे रक्षा क्षेत्र को नए सम्मान के साथ देख रही है। अब आप हमारे रक्षा बजट को देखिये तो यह कुछ देशों के जीडीपी से भी अधिक है। 

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    पूंजीगत निवेश में छाप छोड़ चुका है भारत 

    राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत अब दुनिया के अन्य हिस्सों के साथ एक नए पुन: शस्त्रीकरण के चरण में प्रवेश कर रहा है, जो रक्षा क्षेत्र में पूंजीगत निवेश से अपनी छाप छोड़ चुका है। वित्तीय प्रक्रियाओं में एकल देरी या त्रुटि सीधे परिचालन तत्परता को प्रभावित कर सकती है। ज्यादातर उपकरण जो हम पहले आयात करते थे, अब भारत में बनाए जा रहे हैं। हमारे सुधार सफल हो रहे हैं। उन्होंने डीएडी से आग्रह किया कि वह रक्षा में निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी के साथ समन्वय में ''नियंत्रक'' से ''सुविधाकर्ता'' के रूप में विकसित हो। 

    2.7 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचा सैन्य व्यय

    राजनाथ ने स्टाक होम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) द्वारा किए गए एक विश्लेषण का उल्लेख किया। इसमें कहा गया है कि वैश्विक सैन्य व्यय 2024 में 2.7 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया और यह दरवाजे अब भारतीय रक्षा उद्योग के लिए पलक-पावड़े बिछाने लगे हैं। रक्षा मंत्री ने डीएडी के नए नारे ''चेतन, चुस्त, अनुकूल'' की प्रशंसा की और कहा कि ये केवल शब्द नहीं, बल्कि आज के तेजी से विकसित हो रहे रक्षा वातावरण में आवश्यक कार्य संस्कृति का प्रतिबिंब है। 

    उपकरणों के प्रोडक्शन पर क्या बोले रक्षा मंत्री?

    राजनाथ सिंह ने कहा कि 'शांति काल केवल एक भ्रम है। सापेक्ष शांति के समय में भी, हमें अनिश्चितता के लिए तैयार रहना चाहिए। अचानक घटनाएं हमारी वित्तीय और परिचालन स्थिति में बदलाव ला सकती हैं। चाहे उपकरण उत्पादन बढ़ाना हो या वित्तीय प्रक्रियाओं को अनुकूलित करना हो, हमें हमेशा नवोन्मेषी तकनीकों और प्रतिक्रियाशील प्रणालियों के साथ तैयार रहना चाहिए।'