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    महंगाई का लक्ष्य तय करने का जिम्मा अगली सरकार पर छोड़ा

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    Updated: Sat, 08 Mar 2014 09:04 AM (IST)

    आम चुनाव बाद गठित होने वाली केंद्र की नई सरकार सालाना महंगाई दर का लक्ष्य तय कर सकती है। यह लक्ष्य संसद के जरिये तय होगा और रिजर्व बैंक (आरबीआइ) की यह जिम्मेदारी होगी कि इसे हासिल करने के लिए वह उचित मौद्रिक नीति अख्तियार करे। आरबीआइ गवर्नर रघुराम राजन ने इसके संकेत दिए। वित्त मंत्री पी चिदंबर

    जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। आम चुनाव बाद गठित होने वाली केंद्र की नई सरकार सालाना महंगाई दर का लक्ष्य तय कर सकती है। यह लक्ष्य संसद के जरिये तय होगा और रिजर्व बैंक (आरबीआइ) की यह जिम्मेदारी होगी कि इसे हासिल करने के लिए वह उचित मौद्रिक नीति अख्तियार करे।

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    आरबीआइ गवर्नर रघुराम राजन ने इसके संकेत दिए। वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने भी कहा है कि सरकार को यह हक है कि वह संसदीय व्यवस्था के जरिये महंगाई का एक लक्ष्य तय करे। फिर केंद्रीय बैंक इसे हासिल करने की कोशिश करे। शुक्रवार को रिजर्व बैंक बोर्ड की बैठक के बाद आयोजित संवाददाता सम्मेलन में चिदंबरम ने कहा, 'राजन ने इस बात को स्वीकार किया है कि सरकार संसद के जरिये महंगाई लक्ष्य तय कर सकती है। इसे कैसे हासिल करना है यह रिजर्व बैंक पर छोड़ देना चाहिए। यह एक सही कदम है। इससे कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी और विकास दर को भी फायदा होगा। सरकार और आरबीआइ मिलकर यह काम कर सकते हैं।'

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    महंगाई लक्ष्य को तय करने का मामला हाल ही में रिजर्व बैंक की तरफ से गठित उर्जित पटेल समिति ने उठाया था। समिति ने कहा था कि सरकार को जनवरी, 2015 तक आठ और फरवरी, 2016 तक छह फीसद की खुदरा महंगाई दर लक्ष्य तय करना चाहिए। इससे यह भी पता रहेगा कि देश में ब्याज दर की क्या स्थिति है।

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    इस समिति की रिपोर्ट इस साल जनवरी में आई थी। आरबीआइ ने इसे पूरी तरह से स्वीकार कर लिया है। अब यह अगली सरकार पर निर्भर करता है कि वह इसके मुताबिक महंगाई का लक्ष्य तय करती है या नहीं। अभी सरकार और रिजर्व बैंक की तरफ से महंगाई का लक्ष्य तय किया जाता है, लेकिन यह बाध्यकारी नहीं होता। जब संसद के जरिये तय होगा तो सरकार व आरबीआइ दोनों को इसे हासिल करने के लिए हरसंभव कोशिश करनी होगी।

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