नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। नया निवेशक तलाशने के लिए वित्तीय बोली की अंतिम तिथि नजदीक आने के साथ ही जेट एयरवेज को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। जहां एक तरफ ब्रिटिश स्टार्ट-अप एयरलाइन के मालिक जेसन उन्सवर्थ के कंसोर्टियम में भागीदार होने से नरेश गोयल ने इन्कार किया है। वहीं दूसरी तरफ कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय ने जेट के प्रमोटरों द्वारा 5,000 करोड़ रुपये का फंड डायवर्ट करने के आरोपों की जांच शुरू कर दी है। इससे नया निवेशक मिलने की कंपनी के कर्जदाताओं की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है।

कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के तहत आने वाले रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (आरओसी) ने जेट एयरवेज के खातों की जांच में एयरलाइन द्वारा कंपनी कानून के उल्लंघन के कुछ मामले पाए हैं। कंपनी रजिस्ट्रार ने बुधवार को अपनी जांच रिपोर्ट मंत्रालय को सौंपी है। सूत्रों के मुताबिक रिपोर्ट के अध्ययन के बाद मंत्रालय तय करेगा कि इन मामलों की आगे और जांच कराने की आवश्यकता है अथवा नहीं। यदि उसे लगा कि जेट एयरवेज के प्रमोटरों ने एयरलाइन का पैसा दूसरी कंपनियों में डायवर्ट किया है तो फिर इस पूरे मामले की जांच सीरियस फ्रॉड ऑफिस (एसएफआइओ) को सौंपी जा सकती है।

कंपनी रजिस्ट्रार ने जेट के खातों की जांच अरविंद गुप्ता नामक व्यक्ति की शिकायत पर की है। गुप्ता वही हैं जिन्होंने आइसीआइसीआइ-वीडियाकॉन मामले की शिकायत की भी थी। जेट के विरुद्ध शिकायत में गुप्ता ने आरोप लगाया है कि प्रमोटरों ने एयरलाइन की 5125 करोड़ रुपये की रकम को खाड़ी देशों में स्थित कुछ कंपनियों में डायवर्ट करने का प्रयास किया था। इससे पहले फरवरी में आयकर विभाग ने भी अपनी जांच में जेट एयरवेज पर 600 करोड़ रुपये की कर चोरी के सबूत पाए थे।

इस बीच ब्रिटेन की एक स्टार्ट-अप एयरलाइन के मालिक जेसन उन्सवर्थ के दावे पर नरेश गोयल के आपत्ति जताने से जेट के लिए नए निवेशक की तलाश की कोशिशों को एक और झटका लगा है। उन्सवर्थ ने पिछले दिनों एसबीआइ की अगुआई वाले बैंकों के समूह के समक्ष देर से पेश एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट बोली में दावा किया था कि उसके कंसोर्टियम में जेट के पूर्व चेयरमैन नरेश गोयल भी शामिल हैं। अपने ट्वीट में उन्सवर्थ ने लिखा कि मेरे कंसोर्टिसम में माई वर्ल्ड वेंचर के अक्षय उत्तम, फ्यूचर ट्रेंड कैपिटल के ललित वर्मा, रेडक्लिफ कैपिटल के धीरज और मल्हार हॉस्पिटैलिटी के सचिन नलवाडे के अलावा जेट एयरवेज के प्रमोटर नरेश गोयल भी शामिल हैं। भारत और ब्रिटेन के बीच उड़ाने शुरू करने के लिए 2005 में एटमॉस्फियर इंटरकांटिनेंटल एयरलाइंस की स्थापना करने वाले उन्सवर्थ लगातार जेट एयरवेज में निवेश की इच्छा जता रहे हैं।

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Posted By: Praveen Dwivedi

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