नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। अगर आपको कोविड-19 के चलते अस्पताल में भर्ती होना पड़ रहा है, तो भले ही आपने कोविड के खिलाफ इंश्योरेंस पॉलिसी कवर क्यों ना ले रखा हो, आपको कुछ नकदी अपने पास जरूर रखनी चाहिए। कोविड-19 इस समय कई बड़े शहरों में सार्वजनिक स्वास्थ्य आपदा में बदल गया है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में तो पॉजिटिविटी रेट 33 फीसद पर पहुंच गई है। अन्य बड़े शहरों में भी हॉस्पिटल बेड्स से लेकर ऑक्सीजन सिलेंडर तक की कमी की खबरें सामने आ रही हैं। ऐसे परिदृश्य में आपके पास इश्योरेंस पॉलिसी के बावजूद नकदी होना आवश्यक है।

उदाहरण के लिए, आपका बीमा आपके क्लेम के सेटलमेंट के लिए कुछ समय लेता है और हॉस्पिटल आपसे इलाज शुरू करने के लिए कुछ पैसा जमा करने के लिए कहते हैं, तो आपके पास नकदी होनी चाहिए। आपको बिल के कुछ हिस्से का भुगतान स्वयं करना पड़ सकता है, क्योंकि बीमाकर्ता कुछ कोविड उपचार संबंधी लागतों को कवर नहीं करते हैं।

मान लीजिए अगर हॉस्पिटल मरीजों से भरा हो और आपको बेड ना मिले, तो आपको किसी नॉन-नेटवर्क हॉस्पिटल में भी भर्ती होना पड़ सकता है। ऑक्सीजन सप्लाई सुचारू नहीं होने पर भी आपको ऐसा करना पड़ सकता है। अगर आपके पास इस तरह के खर्चों को वहन करने के लिए नकदी नहीं है, तो आप कर्ज या उधार भी ले सकते हैं।

क्रेडिट कार्ड का उपयोग करें

आप क्रेडिट कार्ड का उपयोग करके भी हॉस्पिटल का बिल भर सकते हैं, क्योंकि अधिकांश हॉस्पिटल्स में प्लास्टिक मनी स्वीकार की जाती है। हालांकि, रिवाल्विंग क्रेडिट पर ब्याज 30-49 फीसद तक हो सकता है। भुगतान को आसान बनाने के लिए, कार्डधारक कर्जदाता से राशि को ईएमआई में बदलने के लिए भी कह सकते हैं।

पर्सनल लोन

क्रेडिट कार्ड से एक बड़े बिल के भुगतान करने की तुलना में पर्सनल लोन बेहतर है। आपका अकाउंट जिस बैंक में हैं, वहां से लोने लेना आसान होगा। प्री-अप्रूव्ड लिमिट इस प्रक्रिया को आसान और शीघ्र बना देगी। आप कुछ ही घंटों में यह लोन प्राप्त कर सकते हैं। इस तरह के लोन्स में ब्याज दर आमतौर पर 9 से 16 फीसद के बीच होती है।

सोना आ सकता है काम

गोल्ड लोन आमतौर पर आवेदन जमा करने के कुछ घंटों के भीतर मिल जाता है। इन लोन में सिक्योरिटी के रूप में सोना कर्जदाता के पास रखा जाता है। यह लोन उन लोगों को भी मिल जाता है, जिनकी क्रेडिट हिस्ट्री कमजोर होती है। साथ ही ब्याज दरें भी कम होती हैं।

लोन अगेंस्ट सिक्युरिटी

आप एफडी, म्युचुअल फंड्स, डीमैट शेयर्स या यूएलआईपी व टर्म इंश्योरेंस के अलावा इंश्योरेंस पॉलिसी जैसी सिक्युरिटीज के अगेंस्ट भी लोन ले सकते हो। इस तरह के लोन पर ब्याज दर पर्सनल लोन से कम होती है। एक इंश्योरेंस पॉलिसी की सरेंडर वैल्यू की 60 से 90 फीसद, एफडी की 80 से 95 फीसद और शेयर या म्युचुअल फंड्स की 50 से 60 फीसद राशि का लोन मिल सकता है।

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