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    Digital Payment नहीं लेने वाले दुकानदारों पर सरकार सख्त, फरवरी से देना होगा 5,000 रुपये प्रतिदिन का जुर्माना

    By Ankit KumarEdited By:
    Updated: Tue, 31 Dec 2019 01:30 PM (IST)

    Digital Payment को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने हाल में चुनिंदा माध्यमों से लेनदेन पर MDR शुल्क को खत्म करने का निर्णय किया है। ...और पढ़ें

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    Digital Payment नहीं लेने वाले दुकानदारों पर सरकार सख्त, फरवरी से देना होगा 5,000 रुपये प्रतिदिन का जुर्माना

    नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। नरेंद्र मोदी सरकार ने डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए बहुत महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने ग्राहकों को Digital Payment की सुविधा उपलब्ध नहीं कराने वाले दुकानदारों, कारोबारियों एवं कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाने का निर्णय किया है। हालांकि, यह नियम 50 करोड़ रुपये या उससे अधिक का सालाना कारोबार करने वाले दुकानदारों पर लागू होगा। इन कारोबारियों को अपने प्रतिष्ठान में डिजिटल पेमेंट सिस्टम लगाने के लिए 31 जनवरी तक का समय दिया गया है। इन दुकानदारों या कारोबारियों को तय डिजिटल पेमेंट की सुविधा नहीं उपलब्ध कराने पर एक फरवरी, 2020 से 5,000 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माने का भुगतान करना होगा।

    5,000 रुपये प्रतिदिन का आर्थिक दंड 

    समाचार एजेंसी आइएएनएस की एक रिपोर्ट के मुताबिक CBDT ने कहा है कि कारोबारियों को इलेक्ट्रॉनिक मोड में पेमेंट की सुविधा शुरू करने के लिए पर्याप्त समय दिया गया है। सीबीडीटी ने एक सर्कुलर जारी कर कहा है कि संबंधित दुकानदार या कारोबारी अगर 31 जनवरी, 2020 तक Digital Payment System लगवा लेता है और उससे पेमेंट लेना शुरू कर देता है तो उसे जुर्माना नहीं देना पड़ेगा। सर्कुलर के मुताबिक तय समयसीमा तक ऐसा नहीं करने पर संबंधित दुकानदार या कारोबारी को पांच हजार रुपये प्रतिदिन के हिसाब से आर्थिक दंड देना होगा। 

    MDR Fees होगा खत्म 

    उल्लेखनीय है कि देश में Dgital Transactions को बढ़ावा देने के लिए आयकर अधिनियम में एक नए प्रावधान को शामिल किया गया था। इस प्रावधान के मुताबिक 50 करोड़ रुपये से अधिक के सालाना टर्नओवर वाले कारोबारियों के लिए चुनिंदा इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से पेमेंट लेना अनिवार्य होगा। रुपे डेबिट कार्ड और यूपीआई के जरिए भुगतान अनिवार्य पेमेंट सिस्टम में शामिल हैं। हाल में सरकार ने इन दोनों माध्यमों से पेमेंट पर MDR शुल्क को खत्म करने की घोषणा की है। इसका मतलब है कि 50 करोड़ रुपये से अधिक की वार्षिक आय वाले कारोबारियों को एमडीआर शुल्क नहीं देना होगा।