मुकेश अंबानी की रिलायंस को चाहिए 15000 करोड़ रुपये, मुनाफा 41% बढ़ने के बावजूद क्यों पड़ी जरूरत?
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCDs) के जरिए 15,000 करोड़ रुपये तक जुटाने की घोषणा की है। कंपनी का सितंबर ...और पढ़ें

रिलायंस जारी करेगी डिबेंचर
HighLights
रिलायंस 15,000 करोड़ रुपये के NCDs जारी करेगी
सितंबर तिमाही में नेट प्रॉफिट 41% बढ़कर 25,548 करोड़
मुकेश अंबानी ने मुश्किल माहौल में बेहतर प्रदर्शन बताया
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) ने शुक्रवार को नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCDs) के जरिए 15,000 करोड़ रुपये तक जुटाने का एलान किया है। यह एलान कंपनी के वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही (Q2FY27) के वित्तीय नतीजों के साथ किया गया।
नतीजों के अनुसार, सितंबर तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर (YoY) 41% बढ़कर 25,548 करोड़ रुपये हो गया। एक्सचेंज फाइलिंग में, मुकेश अंबानी की कंपनी ने बताया कि इसके बोर्ड ने 15,000 करोड़ रुपये तक के लिस्टेड, सिक्योर्ड या अनसिक्योर्ड, रिडीमेबल नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
यह फंड जुटाने की प्रोसेस प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए एक या अधिक किश्तों में पूरी की जाएगी।
39,389 करोड़ रुपये के डिबेंचर बकाया
रिलायंस के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने अपनी बैठक में एक प्रस्ताव पास किया, जिसके तहत 15,000 करोड़ रुपये तक के लिस्टेड, सिक्योर्ड/अनसिक्योर्ड, रिडीमेबल नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर को प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए एक या अधिक किश्तों में जारी करने की मंजूरी दी गई है।
30 सितंबर 2026 तक, कंपनी के बकाया नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर लगभग 39,389 करोड़ रुपये थे। इसमें से लगभग 20,000 करोड़ रुपये के सिक्योर्ड NCDs थे।
नतीजों पर क्या बोले अंबानी?
सितंबर तिमाही के दौरान, रिलायंस ने प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए लगभग 12,000 करोड़ रुपये (PPD सीरीज Q) के लिस्टेड, अनसिक्योर्ड, रिडीमेबल नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर भी जारी किए थे। तिमाही प्रदर्शन पर मुकेश अंबानी ने कहा कि मुश्किल कारोबारी माहौल के बावजूद कंपनी के बिजनेसों ने शानदार प्रदर्शन किया है।
अंबानी ने कहा, "दूसरी तिमाही के दौरान, मुश्किल कारोबारी माहौल के बावजूद हमारे व्यवसायों ने शानदार प्रदर्शन किया। कमोडिटी बाजारों में उतार-चढ़ाव बना रहा, जबकि भू-राजनीतिक तनावों का वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव जारी रहा। ऐसे हालात में, हमारे पोर्टफोलियो का घरेलू झुकाव, साथ ही हमारे एकीकृत व्यवसायों का अनुशासित संचालन और लचीलापन, रिलायंस को बाहरी उतार-चढ़ाव से प्रभावी ढंग से निपटने में मददगार साबित हुआ।"
रिलायंस का प्रॉफिट कितना बढ़ा?
RIL के दूसरी तिमाही के नतीजों के अनुसार, रिलायंस इंडस्ट्रीज का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सितंबर तिमाही में सालाना आधार पर 41% बढ़कर 25,548 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले साल की इसी अवधि में यह 18,165 करोड़ रुपये था।
ऑपरेशंस से होने वाला रेवेन्यू 29% बढ़कर 3.32 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो एक साल पहले 2.58 लाख करोड़ रुपये था। इसमें कंपनी के 'ऑयल-टू-केमिकल्स' (O2C) और जियो बिजनेस की ग्रोथ का बड़ा योगदान रहा। पिछली तिमाही (जून तिमाही) के मुकाबले, कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 27% (23,196 करोड़ रुपये से) बढ़ा, जबकि रेवेन्यू 6% (3.11 लाख करोड़ रुपये से) बढ़ा।
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