सर्च करे
Home
फोकस
विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

मिडिल ईस्ट में टेंशन? कोई बात नहीं, अंबानी ने अफ्रीका-यूरोप से ऑस्ट्रेलिया तक भेजना शुरू किया फ्यूल; मोड़े जहाजों के रुख

Published: Sun, 01 Nov 2026 11:04 AM (IST)

रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) ने पश्चिमी एशिया में चल रहे संघर्षों का लाभ उठाते हुए अपने ईंधन निर्यात को पूर्वी अफ्रीका, ...और पढ़ें

रिलायंस का नया प्लान (AI फोटो)

रिलायंस का नया प्लान (AI फोटो)

HighLights

  1. रिलायंस ने संघर्षों का लाभ उठाकर ईंधन निर्यात बढ़ाया

  2. कंपनी की बाजार हिस्सेदारी में लगभग 50% की वृद्धि

  3. O2C कारोबार ने रिकॉर्ड 25,203 करोड़ रुपये EBITDA दर्ज किया

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) ने पश्चिमी एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण सप्लाई में आई रुकावटों से पैदा हुए मौकों का काफी फायदा उठाया है। इसके लिए, कंपनी ने अपने फ्यूल एक्सपोर्ट को पूर्वी और दक्षिणी अफ्रीका, भूमध्यसागरीय क्षेत्र और अन्य यूरोपीय बाजारों की ओर मोड़ दिया।
कंपनी की सितंबर तिमाही के नतीजों के अनुसार, इससे रिलायंस को इन बाजारों में अपनी हिस्सेदारी (मार्केट शेयर) लगभग 50% तक बढ़ाने में मदद मिली। RIL ने ऑस्ट्रेलिया, केन्या और तंजानिया में प्रीमियम गैसोलीन ग्रेड के लिए भी नए मौके तलाशे, जबकि भूमध्यसागरीय क्षेत्र में डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की सप्लाई बढ़ाई।

'भूमध्यसागरीय बाजार में अच्छे मौके'

RIL में सप्लाई और ट्रेडिंग के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर श्रीनिवासन टुट्टागुंटा ने कहा, "डीजल और जेट फ्यूल के मामले में, सप्लाई में कमी आने की वजह से हमें भूमध्यसागरीय बाजार में अच्छे मौके मिले।"
RIL का 'ऑयल-टू-केमिकल्स' (O2C) कारोबार, कंपनी की दूसरी तिमाही की कमाई में सबसे बड़ा योगदान देने वाला रहा। इसमें EBITDA (ईबीआईटीडीए) 68% बढ़कर रिकॉर्ड 25,203 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। ऊर्जा की ऊंची कीमतों के चलते, O2C से होने वाला रेवेन्यू 44% बढ़कर 231,601 करोड़ रुपये हो गया।

क्रूड ऑयल के दाम कितने बढ़े?

पश्चिमी एशिया के संघर्ष ने एनर्जी सप्लाई चेन को बाधित कर दिया, जिसके कारण कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में सालाना आधार पर 41% की बढ़ोतरी हुई है, और ट्रांसपोर्टेशन ईंधन की कीमतों में 50% से 78% तक का उछाल आया है।

RIL इसने पहली बार दक्षिण अफ्रीका को 'लो-सल्फर' (कम सल्फर वाला) ATF भी सप्लाई किया, जिससे निर्यात के नए अवसर खुल सकते हैं। कंपनी की यह निर्यात रणनीति ऐसे समय पर पेश की गयी है जब वैश्विक स्तर पर रिफाइनिंग मार्जिन में भारी तेजी देखी जा रही है। ऐसा भू-राजनीतिक तनावों, रिफाइनरियों के बंद होने और ईंधन के स्टॉक में कमी आने के कारण हुआ है, जिससे उत्पादों की सप्लाई तंग हो गई है।

रिफाइनिंग क्षमता प्रभावित हुई

रूस और पश्चिमी एशिया में चल रहे संघर्षों के कारण रिफाइनिंग क्षमता प्रभावित हुई है, जिससे गैसोलीन, डीजल और एविएशन फ्यूल की कीमतें बढ़ गई हैं। 'गैसोलीन क्रैक्स' (जो रिफाइंड उत्पाद और कच्चे तेल की कीमतों के बीच का अंतर बताते हैं) सितंबर तिमाही में बढ़कर लगभग 25 डॉलर प्रति बैरल हो गए, जबकि एक साल पहले यह 8.4 डॉलर प्रति बैरल थे।

कच्चे तेल (क्रूड) की खरीद के मामले में, RIL ने पिछली तिमाही में अमेरिका, खाड़ी देशों और अन्य क्षेत्रों से होने वाले आयात के मिश्रण (इंपोर्ट बास्केट) में बदलाव किया, ताकि उपलब्ध सप्लाई और कीमतों के मौकों का फायदा उठाया जा सके। इस लचीलेपन ने शिपिंग में रुकावटों के बावजूद कंपनी को रिकॉर्ड स्तर पर कच्चे तेल की प्रोसेसिंग बनाए रखने में मदद की।

25 जहाज काम पर

RIL ने बताया कि माल ढुलाई की ऊंची दरों के असर को कम करने के लिए उसने 20 से अधिक जहाजों को काम पर लगाया है, जिससे कच्चे तेल और उत्पादों को ढोने वाले जहाजों की कुल संख्या लगभग 25 हो गई है। कंपनी ने घरेलू मांग को पूरा करने के लिए LPG के सामान्य उत्पादन को लगभग दोगुना कर दिया, जबकि अन्य उत्पादों - जैसे एल्काइलेट और पेट्रोल के कुछ घटकों - के उत्पादन में कटौती की।

ये भी पढ़ें - Upcoming IPO: अगले हफ्ते आ रहा एक नया आईपीओ, 6 और इश्यू में पैसा लगाने का मौका बाकी; ₹70 तक है GMP

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।