नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के साथ देश के कई राज्यों में लॉकडाउन जैसी स्थिति को देखते हुए सूक्ष्म, लघु व मझोले उद्यम (एमएसएमई) एक बार फिर से लोन मोरेटोरियम देने की मांग करने लगे हैं। एमएसएमई से जुड़े कई एसोसिएशन इस संबंध में वित्त मंत्रालय को पत्र लिखने जा रहे हैं। एमएसएमई की दलील है कि देश के 10 राज्यों में लॉकडाउन जैसी स्थिति से उन्हें बिके हुए माल का भुगतान नहीं मिल पा रहा है। आने वाले समय में मांग की अनिश्चितता को देखते हुए उन्होंने उत्पादन कम कर दिया है। वे कच्चे माल की खरीदारी भी काफी सीमित मात्रा में कर रहे हैं।  

भुगतान फंसने से उनके पास वर्किंग कैपिटल (कार्यशील पूंजी) की किल्लत हो गई है। ऐसी स्थिति में उन्हें बैंकों के कर्ज चुकाने के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता होगी। फेडरेशन ऑफ इंडियन स्मॉल मीडियम इंटरप्राइजेज (फिस्मे) के महासचिव अनिल भारद्वाज ने बताया कि जो हालात बन रहे हैं उसे देखते हुए एमएसएमई को हर हाल में लोन मोरेटोरियम दिए जाने की जरूरत है। 

ऐसा नहीं करने पर अधिकतर एमएसएमई के सामने एनपीए श्रेणी में आ जाने का खतरा है। इसकी वजह यह है कि लोन की किस्त 90 दिनों तक नहीं जमा नहीं करने पर वह खाता एनपीए हो जाता है। एनपीए घोषित होने के बाद एमएसएमई को आगे के लिए लोन लेना मुश्किल हो जाएगा और उनकी साख खराब हो जाती है। भारद्वाज ने बताया कि जल्द ही फिस्मे वित्त मंत्री को इस संबंध में पत्र लिखेगा। 

वैसे, वित्त मंत्री मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी फिस्मे से एमएसएमई को होने वाली दिक्कतों की जानकारी मांगी है। सरकार ने रिटेल लोन लेने वालों समेत एमएसएमई को पिछले वर्ष कोरोना काल में छह माह (मार्च से अगस्त) के लिए लोन मोरेटोरियम दिया था। विशेषज्ञों के मुताबिक कम से कम 30 फीसद एमएसएमई ने इस लोन मोरेटोरियम का फायदा उठाया। हालांकि अब भी अधिकतर एमएसएमई के पास लोन चुकता करने के लिए पैसे नहीं है। बैंक मोरेटोरियम को और बढ़ाने के पक्ष में नहीं थे। पिछले वर्ष बैंकों ने आरबीआइ बैंक से कहा था कि मोरेटोरियम बढ़ाए जाने से एनपीए और बढ़ सकता है।

Edited By: Ankit Kumar