नई दिल्ली (पीटीआई)। बाजार नियामक सेबी ने क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों (सीआरए) व उनके प्रमोटरों के वित्तीय मामलों और कामकाज को लेकर कड़े नियमों का प्रस्ताव किया है। इनमें रेटिंग एजेंसियों में क्रॉस शेयरहोल्डिंग पर अधिकतम 10 फीसद की सीमा लगाना शामिल है। यानी कोई भी सीआरए किसी अन्य रेटिंग एजेंसी में इस सीमा से ज्यादा की हिस्सेदारी नहीं रख सकेगी। इसके अलावा नियामक ने सीआरए और उनकी सेवाएं लेने वाली कंपनियों के लिए डिस्क्लोजर संबंधी अपेक्षाएं भी बढ़ाने का सुझाव दिया है।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के प्रस्तावित नियमों के तहत नियामक की मंजूरी के बिना कोई भी फर्म क्रेडिट रेटिंग एजेंसी में नियंत्रक हिस्सेदारी नहीं खरीद सकेगी। प्रस्तावित नियमों से घरेलू रेटिंग एजेंसियां खासतौर पर प्रभावित होंगी। नए नियमों का स्टैंडर्ड एंड पुअर्स (एसएंडपी), मूडीज और फिच जैसी ग्लोबल रेटिंग एजेंसियों पर भी असर पड़ेगा। इसकी वजह यह है कि इन एजेंसियों की भारत में भी अच्छी-खासी मौजूदगी है। यही नहीं, इनकी घरेलू क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों में भी हिस्सेदारी है।

सेबी ने दिया फॉरेंसिक ऑडिट का आदेश

सेबी ने काले धन की हेराफेरी करने वाली मुखौटा कंपनियों पर कार्रवाई के दायरे में आई हिट किट ग्लोबल सॉल्यूशंस के खिलाफ फॉरेंसिक ऑडिट कराने का आदेश दिया है। हालांकि इसके शेयर बाजार में कारोबार पर लगे प्रतिबंध को हटा लिया गया है। नियामक पिछले हफ्ते भी दो कंपनियों- कावित इंडस्ट्रीज और जीवी फिल्म्स की फॉरेंसिक ऑडिट कराने का आदेश दे चुका है। ये सभी फर्मे उन 331 संदिग्ध मुखौटा कंपनियों में शामिल हैं, जिनके खिलाफ नियामक जांच कर रहा है।

Posted By: Praveen Dwivedi

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