नई दिल्ली, पीटीआइ। आदित्य बिड़ला ग्रुप के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला ने वोडाफोन आइडिया को चलाने में अक्षमता जाहिर की है। उन्होंने वोडाफोन आइडिया लिमिटेड में अपनी हिस्सेदारी सरकार को सौंपने की पेशकश के साथ इस वर्ष जून में कैबिनेट सचिव राजीव गौबा को पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने कहा कि वोडाफोन आइडिया के परिचालन में बने रहने के लिए जरूरी है कि उसमें आदित्य बिड़ला ग्रुप की हिस्सेदारी सरकार ले ले। उनके अनुसार सरकार चाहे तो हिस्सेदारी लेने के लिए किसी ऐसी कंपनी का नाम सुझा सकती है जो कंपनी को चलाने में सक्षम हो। सात जून को लिखे इस पत्र में उन्होंने स्पष्ट किया है कि वर्तमान माहौल में अगर सरकार ने तत्काल सक्रिय मदद मुहैया नहीं कराई, तो कंपनी के बंद होने का अंदेशा है।

वीआइएल में करीब 27 फीसद हिस्सेदारी रखने वाले और कंपनी के चेयरमैन बिड़ला ने पत्र में कहा कि एजीआर देनदारी पर स्पष्टता के अभाव में निवेशक इस कंपनी में निवेश को इच्छुक नहीं हैं। निवेशक कंपनी से इसलिए भी दूर होते दिख रहे हैं क्योंकि देनदारी के भुगतान के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि स्पेक्ट्रम की फ्लोर प्राइसिंग कंपनी द्वारा मुहैया कराई जा रही सेवाओं के मुकाबले अधिक है। पत्र में उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने इन मुद्दों का जुलाई तक तत्काल सक्रिय रूप से समाधान नहीं किया तो कंपनी ऐसे मोड़ पर आ खड़ी होगा जहां से इसे बंद होने से कोई नहीं रोक सकता है।

बिड़ला ने पत्र में सरकार से कहा, 'वोडाफोन आइडिया के 27 करोड़ भारतीय ग्राहकों की ओर से पूरी जिम्मेदारी के साथ मैं कहना चाहता हूं कि मैं वोडा आइडिया में अपनी हिस्सेदारी सरकार, सरकारी कंपनी, घरेलू वित्तीय कंपनी या ऐसी किसी भी इकाई के हाथ में दे देना चाहता हूं, जिसके बारे में सरकार को लगता है कि वह कंपनी को परिचालन में रख सकती है।'

हालांकि, इस बारे में आदित्य बिड़ला ग्रुप या वीआइएल की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।

यह है कंपनी की कसक

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार वोडाफोन आइडिया पर एडजस्टेड ग्रास रेवेन्यू (एजीआर) मद में 58,254 करोड़ रुपये बकाया था। कंपनी ने इसमें से 7,854.37 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। उसे इस मद में अभी भी सरकार को 50,399.63 करोड़ रुपये देने हैं। पिछले दिनों वोडाफोन आइडिया लिमिटेड (वीआइएल) और भारती एयरटेल ने एजीआर गणना में सरकार की कथित त्रुटियों के सुधार के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। लेकिन कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी।

पिछले वर्ष कंपनी के निदेशक बोर्ड ने 25,000 करोड़ रुपये जुटाने के प्रस्ताव को अनुमोदन दे दिया था। लेकिन कंपनी अभी तक रकम जुटा नहीं पाई है। पिछले दिनों दूरसंचार विभाग ने कहा था कि उसे कंपनी में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ) प्रस्तावों को मंजूरी देने में कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन वह कंपनी की तरफ से इस जानकारी का इंतजार कर रहा है कि ये निवेशक कौन हैं।

Edited By: Ankit Kumar