दशकों पहले से, जब टेक्नोलॉजी कंपनियां दुनिया को अपनी आगोश में ले रही और वास्तविक रूप से हर उद्योग में बदलाव का वाहक बन रही थीं, तब दुनिया के सबसे मशहूर निवेशकों ने उनकी अनदेखी की। वारेन बफेट और चार्ली मंगर (बर्कशायर हैथवे के चेयरमैन और वाइस चेयरमैन) जैसे निवेशक बेहद जमीनी कारणों से टेक्नोलॉजी स्टॉक्स से दूर रहे। दशकों बाद जाकर अब उन्होंने एपल और आइबीएम जैसी टेक्नोलॉजी कंपनियों में निवेश शुरू किया है, वह भी तब जब एपल ने कंज्यूमर ड्यूरेबल कंपनी और आइबीएम ने बिजनेस सर्विसेज कंपनी का रूप लिया। आखिर वे इतने वषों तक टेक्नोलॉजी कंपनियों के स्टॉक्स से दूर क्यों रहे? उससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि क्या इसमें हमारे लिए सीखने की कोई बात है?

वषों पहले से बफेट और मंगर यह कहते आए हैं कि वे ऐसे किसी भी सेक्टर की कंपनियों में निवेश नहीं करते हैं, जिनके कारोबार की उन्हें समझ नहीं है। सामान्य भाषा में यह कहा जा सकता है कि इसी सोच की वजह से वे कई बेहद महत्वपूर्ण निवेश मौकों से चूक गए। किसी भी वक्त निवेश के लिए अरबों डॉलर की रकम हाथ में रखने के बावजूद उन्होंने गूगल या अमेजन जैसी कंपनियों में कभी निवेश नहीं किया, जबकि इन कंपनियों ने अपने निवेशकों को वषों तक 20-20 गुना रिटर्न दिया। इसके बावजूद इस निवेशक जोड़ी को उन चूक गए अवसरों का कोई मलाल नहीं है।

इसकी वजह यह है कि इन चूक गए अवसरों के बावजूद वे दुनिया के सबसे सफल निवेशकों में एक थे। और वे सपफल इसलिए थे क्योंकि उन्होंने उन कारोबारों में निवेश किया जिनकी उन्हें समझ थी। यह कहना बहुत आसान है कि वे अमेजन या गूगल में निवेश से चूक गए। लेकिन इसका फायदा यह हुआ कि वे पेट्स डॉट कॉम, वेबवैन, मायस्पेस तथा ऐसी अन्य कंपनियों में भी निवेश से चूक गए, जो आगे चलकर बहुत बड़ी विफल कंपनियों में बदल गईं। चूंकि उन्हें टेक्नोलॉजी कंपनियों के कारोबार की समझ नहीं थी, इसलिए वे इन कंपनियों में निवेश को लेकर उतने ही उदासीन रहे, जितने गूगल या अमेजन में निवेश को लेकर थे। आखिर, मीडिया दिग्गज रूपर्ट मडरेक ने 58 करोड़ डॉलर में मायस्पेस को खरीदा ही था। लेकिन चार वषों बाद उन्हें इसे महज 3.5 करोड़ डॉलर में बेचना पड़ा। मडरेक को इस 94 फीसद के नुकसान से बचने के लिए सिर्फ इतना करना था कि बफेट या मंगर से सबक लेनी थी और ऐसे किसी सेक्टर में निवेश नहीं करना था जिसकी उन्हें समझ नहीं थी।और यही हमें भी बिल्कुल नहीं करना चाहिए।

हम कोई भी उत्पाद या सेवा खरीद रहे हों, उसकी खासियतों और जटिलताओं से ज्यादा हमें और कोई चीज प्रभावित नहीं करती। शायद आधुनिक तकनीकी दुनिया ने हमारे मनो-मस्तिष्क को जिस तरह से प्रशिक्षित किया है, उसमें हमें लगने लगा है नए जमाने की अद्भुत और बेहतरीन चीजें वही हैं, जिनकी जटिलताएं ज्यादातर लोगों की समझ से बाहर हों। इसलिए हम मान लेते हैं कि जो भी चीजें जटिल हों, वह निश्चित तौर पर अच्छी ही होंगी। जहां तक पर्सनल फाइनेंस की बात है, तो दुर्भाग्य से इस तरह की सोच घातक स्तर तक गलत है। पर्सनल फाइनेंस उत्पादों के मामले में सरलता केवल उपयोगी और कारगर ही नहीं, बल्कि नितांत जरूरी है। कारण बहुत सीधा है - अगर किसी निवेशक को किसी वित्तीय उत्पाद या सेवा की पूरी समझ नहीं है, तो वह उसकी थोड़ी भी उपयोगिता के बारे में किसी को बता नहीं सकता, भले ही उस उत्पाद का विक्रेता उसे कितना ही अच्छा क्यों नहीं बताता रहे।

सवाल यह है कि आप कैसे सुनिश्चित करेंगे कि आप सबकुछ जानते हैं? इसका सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप चीजों को सरल रखें। दुर्भाग्य से हमें जो बताया जाता है वह इसके बिल्कुल विपरीत है। आजकल जब मैं बाजार में बचत और निवेश के लिए उपलब्ध उत्पादों और इससे बने निवेश पोर्टफोलियो के आकार और विस्तार की ओर देखता हूं, तो साफ पता चलता है कि निवेशकों में स्वयं की जागरूकता और पोर्टफोलियो को सीमित करने की बेहद जरूरत है। मार्केटिंग से संबंधित संदेशों का बुनियादी मकसद ही इस विचार को बढ़ावा देना है कि आपकी निवेश संबंधी जरूरतें तभी पूरी हो सकती हैं जब आप अपनी छोटी बचत को भी बड़े आकार के पोर्टफोलियो में बांट दें, यानी ज्यादा से ज्यादा अलग-अलग सेक्टरों में निवेश करें। अगर आप थोड़े, लेकिन समझदार निवेशकों का हिस्सा होना चाहते हैं तो आपको उन समझदार निवेशकों वाला ही नजरिया अपनाना होगा।

सरलता आपके सिर्फ निवेश के प्रकार में नहीं, बल्कि पूरे पोर्टफोलियो में होनी चाहिए। अगर किसी के पास ऐसा पोर्टफोलियो है जिसमें 20 से ज्यादा प्रकार के निवेश हैं - जैसा कि अक्सर देखने में आता है - तो वे निवेश भले ही सरल हों, पोर्टफोलियो जटिल का जटिल रह जाएगा और आपकी समझ में कुछ नहीं आएगा।

सौ में से निन्यानवे बचतकर्ताओं को आपातकालीन बचत, एक टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी और एक टैक्स बचाने वाला समेत तीन-चार से ज्यादा म्यूचुअल फंड के अलावा और कुछ नहीं चाहिए। और यह बेहद सरल है। इसका रिकॉर्ड रखना भी सरल है, और जरूरत पड़ने पर इसमें थोड़ा-बहुत बदलाव भी।

वारेन बफेट और चार्ली मंगर दुनिया के सबसे सफल निवेशकों में शामिल हैं। लेकिन दशकों तक उन्होंने गूगल या अमेजन जैसी टेक्नोलॉजी कंपनियों में सिर्फ इसलिए निवेश नहीं किया, क्योंकि वे मानते थे कि इस सेक्टर की उनमें समझ नहीं है। हालांकि इस सोच के चलते वे बड़े निवेश से चूके, लेकिन कई बड़ी विफलताओं से बच भी गए। दुर्भाग्य से तकनीक की मौजूदा दुनिया में हम जटिल चीजों को ही बेहतर मानते हैं, इसलिए निवेश में भी जटिलता को ही बेहतर मान बैठते हैं, जो बिल्कुल गलत है। निवेश हमेशा सरल होना चाहिए। जिन क्षेत्रों में आपकी समझ नहीं है, उनमें निवेश करेंगे भी तो क्या समझ आएगा?

(लेखक धीरेन्द्र कुमार, वैल्यू रिसर्च के सीईओ हैं)

Posted By: Nitesh

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