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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 27, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 2.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर की गिरावट, यहां जानें डिटेल

By Agency Edited By: Ankita Pandey
Published: Sat, 27 Jan 2024 10:53 AM (GMT+05:30)

19 जनवरी 2023 को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 2.795 बिलियन अमेरिकी डॉलर घटकर 616.143 बिलियन अमेरिकी ...और पढ़ें

विदेशी मुद्रा भंडार में 2.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर की गिरावट, जानें डिटेल
विदेशी मुद्रा भंडार में 2.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर की गिरावट, जानें डिटेल

HighLights

  1. विदेशी मुद्रा भंडार 2.795 बिलियन अमेरिकी डॉलर की गिरावट आई है।
  2. सोने का भंडार 34 मिलियन अमेरिकी डॉलर घटकर 47.212 बिलियन डॉलर रह गया।
  3. RBI ने अपनी विदेशी मुद्रा निधि में लगभग 58 बिलियन अमेरिकी डॉलर जोड़े।

एएनआई, नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी लेटेस्ट आंकड़ों से पता चलता है कि 19 जनवरी, 2023 को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 2.795 बिलियन अमेरिकी डॉलर घटकर 616.143 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया।

केंद्रीय बैंक के साप्ताहिक सांख्यिकीय आंकड़ों से पता चलता है कि सप्ताह के दौरान, भारत की विदेशी मुद्रा संपत्ति (FCA), विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा घटक, 2.653 बिलियन अमेरिकी डॉलर घटकर 545.855 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गई।

सप्ताह के दौरान सोने का भंडार 34 मिलियन अमेरिकी डॉलर घटकर 47.212 बिलियन अमेरिकी डॉलर रह गया।

विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट

कैलेंडर वर्ष 2023 में, RBI ने अपनी विदेशी मुद्रा निधि में लगभग 58 बिलियन अमेरिकी डॉलर जोड़े। 2022 में, भारत की विदेशी मुद्रा निधि में संचयी रूप से 71 बिलियन अमेरिकी डॉलर की गिरावट आई।

विदेशी मुद्रा भंडार या विदेशी मुद्रा भंडार (एफएक्स रिजर्व), ऐसी संपत्तियां हैं जो किसी देश के केंद्रीय बैंक या मौद्रिक प्राधिकरण के पास होती हैं।

इसे आमतौर पर आरक्षित मुद्राओं में रखा जाता है, जिसमें आमतौर पर अमेरिकी डॉलर और, कुछ हद तक, यूरो, जापानी येन और पाउंड स्टर्लिंग शामिल है।

अक्टूबर 2021 में, देश का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 645 बिलियन अमेरिकी डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। तब से अधिकांश गिरावट को 2022 में आयातित वस्तुओं की लागत में वृद्धि के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।

आरबीआई करता है निगरानी

इसके अलावा, विदेशी मुद्रा भंडार में सापेक्ष गिरावट को बढ़ते अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में असमान मूल्यह्रास का बचाव करने के लिए समय-समय पर बाजार में आरबीआई के हस्तक्षेप से जोड़ा जा सकता है।

आमतौर पर, आरबीआई समय-समय पर रुपये में भारी गिरावट को रोकने के लिए डॉलर की बिक्री सहित तरलता प्रबंधन के माध्यम से बाजार में हस्तक्षेप करता है।

आरबीआई विदेशी मुद्रा बाजारों की बारीकी से निगरानी करता है और किसी पूर्व-निर्धारित लक्ष्य स्तर या बैंड के संदर्भ के बिना, विनिमय दर में अत्यधिक अस्थिरता को नियंत्रित करके केवल व्यवस्थित बाजार स्थितियों को बनाए रखने के लिए हस्तक्षेप करता है। 

 

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