अमेरिका को बाइपास कर भारत-कनाडा के बीच बड़ी डील? ओटावा में बन रहा मास्टर प्लान, पीएम मोदी भी करेंगे दौरा!
भारत और कनाडा के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) पर पांचवें दौर की बातचीत 5 अक्टूबर से ओटावा में ...और पढ़ें

CEPA पर बातचीत!
HighLights
ओटावा में भारत-कनाडा CEPA की पांचवें दौर की वार्ता शुरू।
पीएम मोदी के कनाडा दौरे की संभावना, संबंध होंगे मजबूत।
CEPA से व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| ट्रंप टैरिफ के बाद अमेरिका और कनाडा के बीच रिश्तों में कड़वाहट देखने को मिली है। अमेरिका और कनाडा के बीच चल रहे इस ट्रेड वार और तनावपूर्ण रिश्तों से भारत को कई आर्थिक फायदे मिल सकते हैं। इस दौरान भारत और कनाडा के बीच प्रस्तावित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (Comprehensive Economic Partnership Agreement-CEPA) पर पांचवें दौर की बातचीत 5 अक्टूबर से कनाडा की राजधानी ओटावा में शुरू हो है। दोनों देशों का लक्ष्य वर्ष 2026 के अंत तक इस लंबे समय से इंतजार में रहे व्यापार समझौते को अंतिम रूप देना है।
यह बातचीत 9 अक्टूबर तक चलेगी। इससे पहले चौथे दौर की बातचीत नई दिल्ली में हुई थी, जो 18 सितंबर को समाप्त हुई थी। अधिकारियों के अनुसार, दोनों देशों ने हाल के महीनों में बातचीत की गति तेज कर दी है ताकि इस साल के भीतर समझौते को पूरा किया जा सके।
पीएम मोदी के कनाडा दौरे की संभावना
दोनों देशों के बीच 5वें दौर की ये बातचीत इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने पिछले महीने संकेत दिया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिसंबर में कनाडा का दौरा कर सकते हैं। इसके अलावा कनाडा के व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू भी इस महीने के अंत में करीब 300 सदस्यीय कारोबारी प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत आने वाले हैं। उन्होंने पिछले महीने मुंबई में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात कर बातचीत के प्रोग्रेस का रिव्यू भी किया था।
लंबे समय से अटकी है बातचीत
भारत और कनाडा ने इस समझौते पर बातचीत 2015 में शुरू की थी। 2015 से 2017 के बीच कई दौर की वार्ताएं हुईं, लेकिन बाद में प्रक्रिया ठंडे बस्ते में चली गई। मार्च 2022 में दोनों देशों ने अर्ली प्रोग्रेस ट्रेड एग्रीमेंट (EPTA) के जरिए बातचीत फिर शुरू की। हालांकि 2023 में कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो द्वारा खालिस्तानी समर्थक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत की संभावित भूमिका का आरोप लगाए जाने के बाद दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ गया और वार्ता एक बार फिर रोक दी गई। भारत ने इन आरोपों को "निराधार" और "बेतुका" बताया था।
नवंबर 2025 में दोनों देशों ने बातचीत फिर शुरू करने पर सहमति जताई, जिसके बाद औपचारिक वार्ताएं दोबारा शुरू हुईं। जून 2026 में कनानास्किस में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और मार्क कार्नी की मुलाकात के बाद द्विपक्षीय संबंधों में नई गति आई।
भारत-कनाडा व्यापार में गिरावट
फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में भारत और कनाडा के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार 8.23 प्रतिशत घटकर 7.95 अरब डॉलर रह गया, जो एक साल पहले 8.70 अरब डॉलर था। हालांकि भारत का कनाडा को निर्यात 10.63 प्रतिशत बढ़कर 4.67 अरब डॉलर पहुंच गया। वहीं कनाडा से आयात 26.14 प्रतिशत घटकर 3.28 अरब डॉलर रह गया।
बता दें कि कनाडा में भारतीय समुदाय की बड़ी मौजूदगी है, वहां करीब 29 लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं। इसके अलावा 4.27 लाख से अधिक भारतीय छात्र वहां पढ़ाई कर रहे हैं। यही वजह है कि व्यापार के साथ-साथ लोगों के बीच संबंध भी दोनों देशों के रिश्तों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
किन क्षेत्रों को होगा फायदा?
भारत कनाडा को मुख्य रूप से दवाइयां, लोहा-स्टील, समुद्री उत्पाद, कॉटन गारमेंट, इलेक्ट्रॉनिक सामान और केमिकल्स निर्यात करता है। दूसरी ओर कनाडा से भारत दालें, कोयला, उर्वरक, कागज, कच्चा पेट्रोलियम तथा कीमती व अर्द्ध-कीमती पत्थरों का आयात करता है।
सेवा क्षेत्र में भारत की ताकत दूरसंचार, कंप्यूटर एवं सूचना सेवाओं और अन्य व्यावसायिक सेवाओं में है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि CEPA पर सहमति बन जाती है तो दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
क्या है CEPA?
CEPA की बात करें तो एक प्रकार का मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement) होता है, जिसके तहत दोनों देश बड़ी संख्या में उत्पादों पर कस्टम ड्यूटी कम या समाप्त करते हैं। इसके साथ ही निवेश बढ़ाने, सर्विस के व्यापार को आसान बनाने और स्किल्ड प्रोफेशनल्स की आवाजाही को बढ़ावा देने का भी प्रावधान होता है।
