TATA के 'जगुआर' ने दिखाई राह: यूरोप में कार बनाना होगा मुश्किल, अब सबको भाएगा अपना भारत!
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यूरोप के अव्यावहारिक नियमों के कारण वहां वाहन विनिर्माण प्रतिस्पर्धी नहीं रहेगा, जिससे ...और पढ़ें

अब सबको भाएगा अपना भारत! (AI फोटो)
HighLights
यूरोपीय नियमों से भारत में वाहन विनिर्माण होगा अधिक प्रतिस्पर्धी
भारत जल्द ही वैश्विक कार विनिर्माण का केंद्र बनेगा
चालू वित्त वर्ष में $1 ट्रिलियन निर्यात का लक्ष्य निर्धारित
एजेंसी, नई दिल्ली। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि यूरोप के नियमों के कारण वहां वाहनों का विनिर्माण प्रतिस्पर्धी नहीं रह जाएगा और ऐसे में यूरोप की सभी कार कंपनियां भारत में विनिर्माण करना पसंद करेंगी। गोयल ने कहा कि भारत वैश्विक कार विनिर्माण केंद्र बनने जा रहा है।
यहां ‘द डिल्ली डायलॉग’ कार्यक्रम में उन्होंने कहा, ‘‘आखिरकार भारत कार विनिर्माण का वैश्विक केंद्र बनने जा रहा है। सभी कंपनियां भारत आएंगी और यहां विनिर्माण करेंगी। यूरोप में इतने अव्यावहारिक नियम हैं कि वहां प्रतिस्पर्धी बने रहना असंभव हो जाएगा। सभी यूरोपीय विनिर्माता भारत आएंगे।’’
भारत ने शुल्क रियायतें दी
भारत ने मुक्त व्यापार समझौतों के तहत ब्रिटेन और यूरोपीय संघ (ईयू) को कोटा आधारित शुल्क रियायतें दी हैं। ब्रिटेन के साथ समझौता 15 जुलाई से लागू हो गया था, जबकि यूरोपीय संघ के साथ समझौते पर इस साल के अंत तक हस्ताक्षर होने की संभावना है।
गोयल ने कहा, ‘‘मुझे नहीं पता कि आप इस बारे में जानते हैं या नहीं। टाटा को जगुआर खरीदने के बाद काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। टाटा मोटर्स खुद भी बंद होने की कगार पर पहुंच गई थी। इसके बाद कंपनी ने बड़े पैमाने पर इंजीनियरिंग में बदलाव किए और कुछ मॉडल भारत में बनाने शुरू किए... कई साल बाद आखिरकार वह मुनाफा कमाने में सफल हुई।’’
"किसी नियम का विस्तार से उल्लेख नहीं"
मंत्री ने यूरोपीय संघ के किसी नियम का विस्तार से उल्लेख नहीं किया। हालांकि, भारत और कुछ अन्य देशों ने ईयू की कार्बन सीमा समायोजन व्यवस्था (सीबीएएम) को लेकर चिंता जताई है। भारत के निर्यात के बारे में गोयल ने कहा कि मंत्रालय चालू वित्त वर्ष में वस्तुओं और सेवाओं का कुल एक लाख करोड़ डॉलर का निर्यात हासिल करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है।
"निर्यात और आयात, दोनों बढ़ रहे हैं"
गोयल ने कहा कि निर्यात और आयात, दोनों बढ़ रहे हैं। इससे घरेलू उद्योग और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को प्रोत्साहन मिलता है। चालू वित्त वर्ष 2026-27 में अप्रैल-अगस्त के दौरान निर्यात सालाना आधार पर 17.85 प्रतिशत बढ़कर 215.91 अरब डॉलर हो गया, जबकि आयात 18.21 प्रतिशत बढ़कर 363 अरब डॉलर रहा।
