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    राजकोषीय घाटा जुलाई के अंत तक पूरे साल के लक्ष्य का 29.9%, जानिए क्यों पिछले साल से अधिक रहा घाटा

    Updated: Fri, 29 Aug 2025 06:49 PM (IST)

    India Fiscal Deficit 2025 सरकार ने आमदनी और खर्च के आंकड़े जारी किए हैं। ये आंकड़े अप्रैल-जुलाई के हैं। पिछले वित्त वर्ष के पहले चार महीने में राजकोषीय घाटा पूरे साल के लक्ष्य का 17.2 प्रतिशत था जो इस साल 29.9 प्रतिशत हो गया है। इसका एक कारण इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की समय सीमा 31 जुलाई से बढ़ाकर 15 सितंबर करना माना जा रहा है।

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    राजकोषीय घाटा जुलाई के अंत तक पूरे साल के लक्ष्य का 29.9%, जानिए क्यों पिछले साल से अधिक रहा घाटा

    केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा (India Fiscal Deficit 2025) जुलाई के अंत तक पूरे साल के लक्ष्य का 29.9 प्रतिशत हो गया। पिछले वित्त वर्ष 2024-25 के पहले चार महीनों में यह बजट अनुमान का 17.2 प्रतिशत था। लेखा महानियंत्रक (CGA) की तरफ से शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के अंत तक घाटा पूरे वर्ष के लक्ष्य का 17.9 प्रतिशत था।

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    सरकार के व्यय और राजस्व के बीच के अंतर को राजकोषीय घाटा कहा जाता है। रकम के लिहाज से देखें तो वित्त वर्ष 2025-26 की अप्रैल-जुलाई अवधि में यह 4,68,416 करोड़ रुपये था। केंद्र का अनुमान है कि पूरे 2025-26 के दौरान राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 4.4 प्रतिशत यानी 15.69 लाख करोड़ रुपये होगा।

    ब्याज चुकाने में गए 4.46 लाख करोड़ रुपये

    आंकड़ों से पता चलता है कि सरकार को जुलाई 2025 तक 10.95 लाख करोड़ रुपये (2025-26 के बजट अनुमान का 31.3 प्रतिशत) प्राप्त हुए। इसमें 6.61 लाख करोड़ रुपये का कर राजस्व (केंद्र को शुद्ध), 4.03 लाख करोड़ रुपये का गैर-कर राजस्व और 29,789 करोड़ रुपये की गैर-ऋण पूंजी प्राप्तियां शामिल थीं।

    इस अवधि में केंद्र ने करों के हिस्से के हस्तांतरण के रूप में राज्य सरकारों को 4.28 लाख करोड़ रुपये दिए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 61,914 करोड़ रुपये अधिक है। केंद्र द्वारा किया गया कुल व्यय 15.63 लाख करोड़ रुपये था, जो 2025-26 के बजट अनुमान का 30.9 प्रतिशत है। इसमें से 12.17 लाख करोड़ रुपये राजस्व व्यय में और 3.46 लाख करोड़ पूंजी व्यय में गए। राजस्व व्यय में से 4.46 लाख करोड़ रुपये ब्याज भुगतान के तौर पर और 1.13 लाख करोड़ रुपये सब्सिडी के मद में खर्च किए गए।

    एक्सपर्ट ने बताया घाटा बढ़ने का कारण

    रेटिंग एजेंसी इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि कर दाखिल करने की समयसीमा बढ़ाने और प्रतिकूल आधार के कारण जुलाई, 2025 में व्यक्तिगत आयकर संग्रह में कमी आई है। इससे सकल कर राजस्व का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा। दूसरी ओर, राज्यों को हस्तांतरण की गति मजबूत बनी रही, जिससे शुद्ध कर राजस्व का प्रदर्शन और कम हुआ है।