नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। बैंकर्स को अब बढ़े हुए वेतन का फायदा मिलेगा। इंडियन बैंक एसोसिएशन (IBA) 2017 से 2022 के बीच पांच साल की अवधि के लिए 15 फीसद वेतन बिल वृद्धि पर सहमत हो गया है। मुंबई में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के मुख्यालय में एक बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया।

वेतन लागत में 15 फीसद की बढ़ोतरी से बैंकिंग उद्योग के लिए सालाना 7,900 करोड़ रुपये का बोझ बढ़ेगा। UFBU संयोजक सी एच वेंकटाचलम के नेतृत्व में राज किरण राय और बैंक कर्मचारी यूनियन प्रतिनिधियों की अगुवाई वाले आईबीए प्रतिनिधियों के बीच बैठक हुई। वेंकटचलम ने कहा कि वेतन में संशोधन से 35 बैंकों के कर्मचारी इसका फायदा ले सकेंगे।

IBA और ट्रेड यूनियन के बीच प्रत्येक पांच वर्षों में एक बार सदस्य बैंकों में 8 लाख से अधिक बैंक कर्मचारियों के वेतन पर बातचीत होती है। दोनों के बीच लंबे समय तक देरी के बाद मूल रूप से 2017 के नवंबर में होने वाले संशोधन पर आम सहमति बनी। 2012 में आईबीए ने कर्मचारियों के वेतन में 15 फीसद की बढ़ोतरी की थी। इस बार (2017-2022), यूनियनों ने मूल रूप से 20 फीसद बढ़ोतरी की मांग की थी जबकि IBA ने शुरू में 12.25 फीसद की पेशकश की थी।

बता दें कि सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंक कर्मचारियों के बीच वेतन असमानता एक दीर्घकालिक समस्या है, इससे शीर्ष केंद्रीय बैंकरों के बीच बहस शुरू हो गई है। लेकिन, सरकार ने मामूली बदलावों को छोड़कर अब तक वेतन संरचना में सुधार के लिए काम नहीं किया है। अगस्त 2016 में RBI के पूर्व गवर्नर, रघुराम राजन ने इस विषय पर एक बहस छेड़ी थी, जब उन्होंने कहा था कि RBI सहित PSB के शीर्ष स्तर के कर्मचारियों का वेतन वैश्विक मानकों से कम है। 

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