जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। चंडीगढ़ में 28-29 जून को आयोजित होने जा रही जीएसटी काउंसिल की बैठक में विपक्षी पार्टियों वाले राज्य क्षतिपूर्ति जारी रखने की मांग को लेकर हंगामा कर सकते हैं। पश्चिम बंगाल, केरल, छत्तीसगढ़ जैसे राज्य केंद्र सरकार से पहले ही अपनी क्षतिपूर्ति जारी रखने की मांग कर चुके हैं। इस साल 30 जून को राज्यों को दी जाने वाली क्षतिपूर्ति की अवधि समाप्त हो रही है। जून के बाद क्षतिपूर्ति नहीं दिए जाने का एलान इससे पहले की जीएसटी काउंसिल की बैठक में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कर चुकी हैं।

जीएसटी काउंसिल की बैठक में बड़ा फैसला संभव

सूत्रों के मुताबिक राज्यों को इस साल जुलाई माह से क्षतिपूर्ति मिलना जारी रहेगा या नहीं, इस पर अंतिम रूप से फैसला जीएसटी काउंसिल की बैठक में लिया जाएगा। हालांकि इतना तय है कि राज्य चाहेंगे कि अभी उन्हें क्षतिपूर्ति का भुगतान किया जाता रहे। इसकी मुख्य वजह यह भी है कि कोरोना काल में अतिरिक्त कर्ज लेने से कई राज्य चालू वित्त वर्ष 2022-23 में काफी सीमित मात्रा में कर्ज ले सकते हैं।

इसलिए लगाए थे अतिरिक्‍त सेस

वर्ष 2017 के जुलाई माह में जीएसटी प्रणाली लागू होने के दौरान यह फैसला किया गया था कि अगले पांच साल तक वैट समाप्त करने की वजह राज्यों को होने वाले नुकसान की भरपाई केंद्र सरकार क्षतिपूर्ति राशि के रूप में करेगी। इस क्षतिपूर्ति के लिए तंबाकू, सिगरेट, महंगी बाइक और कार जैसे कई आइटम पर अतिरिक्त सेस लगाए गए। हालांकि क्षतिपूर्ति के नाम पर लिए जाने वाले सेस 30 मार्च, 2026 तक जारी रहेंगे।

कर्ज लेकर राज्‍यों को किया भुगतान

राज्यों की क्षतिपूर्ति की भरपाई के हिसाब से सेस की वसूली नहीं होने और कोरोना की वजह से जीएसटी संग्रह में होने वाली भारी कमी की वजह से विगत दो वित्त वर्ष में केंद्र सरकार ने राज्यों के नाम पर कर्ज लेकर 1.1 लाख करोड़ और 1.59 लाख करोड़ रुपये का भुगतान राज्यों को किया। अब इस कर्ज की अदायगी के लिए केंद्र क्षतिपूर्ति सेस वसूलना जारी रखेगा। केंद्र का कहना है कि राज्यों को इस साल 31 मई तक के सभी बकाया क्षतिपूर्ति का भुगतान किया जा चुका है।

काउंसिल की बैठक में पेश की जाएगी जीओएम की रिपोर्ट

वित्त मंत्री की अध्यक्षता में छह माह के बाद होने जा रही जीएसटी काउंसिल की बैठक में मंत्रियों के समूह (जीओएम) की रिपोर्ट भी पेश की जाएगी। विभिन्न वस्तुओं की जीएसटी दरों को तार्किक बनाने के लिए मंत्रियों के समूह का गठन किया गया था। सूत्रों के मुताबिक काउंसिल की बैठक में कैसिनो, लाटरी, रेस कोर्स, आनलाइन गेमिंग जैसे आइटम पर 28 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगाने पर फैसला हो सकता है।

जीएसटी दरों में बढ़ोतरी होने की संभावना नहीं

जीएसटी के दायरे से बाहर कई सेवाओं पर भी जीएसटी लगाने पर फैसला हो सकता है। हाथ-पैर के आपरेशन के लिए इस्तेमाल होने वाले कई आइटम की जीएसटी दरों को कम किया जा सकता है। हालांकि इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर को तार्किक बनाने के लिए कई वस्तुओं पर लगने वाली जीएसटी दरों में बढ़ोतरी फिलहाल संभव नहीं दिख रहा है। बढ़ती महंगाई को देखते हुए ऐसा करना अभी संभव नहीं होगा।

Edited By: Krishna Bihari Singh