नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग स्कीम को मंजूरी दी है। इस स्कीम में शहरी प्रवासियों और गरीबों के लिए किराये के घर विकसित किये जाएंगे। यह योजना प्रधानमंत्री आवास योजना की उपयोजना के रूप में है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडे़कर ने कैबिनेट के फैसलों के बारे में जानकारी देते हुए यह बात कही है। इस योजना से कंस्ट्रक्शन वर्कर्स, लेबर्स और प्रवासी मजदूर जैसे असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों और गरीबों को किफायती किराए के साथ रहने को घर मिल सकेगा।

इस योजना के अंतर्गत  1,000 रुपये से 3,000 रुपये प्रति माह के किराए पर अलग-अलग श्रेणी के लोगों को घर उपलब्‍ध कराए जाएंगे। इस योजना पर अनुमानित कुल व्यय 600 करोड़ रुपये होगा।

इस नई योजना में वर्तमान में खाली पड़े सरकारी वित्त पोषित घरों को अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग कॉम्‍प्‍लेक्‍स में बदला जाएगा। जावड़ेकर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'प्राइवेट सेक्टर द्वारा ऐसे कॉम्‍प्‍लेक्‍स बनाने पर उन्‍हें स्‍पेशल इंसेंटिव्‍स दिए जाएंगे। इसमें 50 फीसद अतिरिक्‍त फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) या प्लोर स्पेस इंडेक्स व टैक्‍स छूट आदि शामिल है।'

इस योजना के तहत टेक्नोलॉजी इनोवेशन ग्रांट के रूप में 600 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। जावड़ेकर ने बताया कि इस योजना से 3 लाख लोगों को फायदा पहुंचेगा।

कैबिनेट ने बुधवार को कई फैसले लिए हैं। कैबिनेट ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना/आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत मिल रहे 24% ईपीएफ योगदान (12% कर्मचारी शेयर और 12% नियोक्ता शेयर) के विस्तार को भी मंजूरी दी है। इसे जून से अगस्त 2020 तक 3 महीने के लिए बढ़ा दिया गया है। इस कदम में 4,860 करोड़ रुपये का कुल व्यय होने का अनुमान है और इससे 72 लाख से अधिक कर्मचारियों को लाभ होगा।

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